Shibu Soren Death: जब संसद में गरजे थे शिबू सोरेन, झारखंड को वनांचल कहने पर हुए थे सख्त नाराज, देखें वीडियो

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Shibu Soren Death: झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के संस्थापक शिबू सोरेन का सोमवार को निधन हो गया. वह 81 वर्ष के थे. दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल के नेफ्रोलॉजी विभाग में वो भर्ती थे. डॉ एके भल्ला की निगरानी में 19 जून से उनका उपचार चल रहा था. डॉ भल्ला ने बताया कि शिबू सोरेन को सुबह आठ बजकर 56 मिनट पर मृत घोषित कर दिया गया. शिबू सोरेन आदिवासियों के सबसे बड़े नेता के रूप में जाने जाते थे. उन्होंने झारखंड अलग राज्य के लिए लंबी लड़ाई लड़ी. उन्होंने संसद में भी मजबूती के साथ झारखंड अलग राज्य की मांग रखी. एक बार झारखंड को वनांचल कहने पर नाराज भी हुए थे. अब जब उनका निधन हो चुका है, तो 1996 में लोकसभा में उन्होंने जो भाषण दिया था, उसे लोग याद कर रहे हैं.
Shibu Soren Death: दिशोम गुरु बाबा शिबू सोरेन ने 28 मई 1996 को लोकसभा में जोरदार भाषण दिया था. उन्होंने संसद में झारखंड अलग राज्य की मांग रखी थी. लेकिन उस समय उन्होंने झारखंड और आदिवासी अस्मिता की बात करते हुए झारखंड को वनांचल कहने पर आग बबूला हो गए थे.
झारखंड को वनांचल कहने पर भड़के थे शिबू सोरेन
विश्वास प्रस्ताव पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए शिबू सोरेन ने कहा था, “प्रधानमंत्री बराबर सांस्कृतिक धरोहर की बात करते हैं. और इसी आधार पर बंबई जो अंग्रेजी नाम था, उसे मुंबई किया. झारखंड जो हमारा पौराणिक नाम है, जिसमें हमारी श्रद्धा और संस्कृति रही है, जंगल-झाड़ का, उसको ये लोग वनांचल बोलते हैं. उत्तराखंड जिसे हमलोग बोलते थे, उसे उत्तरांचल बोल दिया. इसके क्या मायने हैं. अगर आदमी का परिचय, आदमी का इतिहास समाप्त हो जाएगा, तो क्या मिलेगा. हमें कौन सा राज्य चाहिए, कौन सा अलग राज्य चाहिए. आदिवासियों की अलग परंपरा है, आदिवासी जंगलों में रहते हैं. उनकी अपनी-अपनी जाति और नाम है. उनका अपना सरनेम होता है. जो टोप्पो, कश्यप और उरांव हैं, उनको ये लोग बोलते हैं अपने नाम के अंत में राम लिखो. तो इसका क्या असर होगा, क्या अंजाम होगा. तो क्या डर के मारे हमलोग अपने नाम के अंत में राम लिखे. दुखी समाज को भी दुख देने का अगर नियम बने तो क्या हो सकता है.”
आदिवासियों की अनदेखी पर भी नाराज हुए थे शिबू सोरेन
लोकसभा में अपने भाषण में शिबू सोरेन ने आदिवासियों की अनदेखी का भी मुद्दा उठाया था. उन्होंने चर्चा में हिस्सा लेते हुए कहा था, केंद्र में जो भी सरकार बनती है, वो आदिवासियों की अनदेखी करती है. आदिवासियों के विकास की बात नहीं की जाती, बल्कि उनका नाश ही होता है. जबकि देश के कई इलाकों, जंगलों में आदिवासी रहते हैं.
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लेखक के बारे में
By ArbindKumar Mishra
मुख्यधारा की पत्रकारिता में 14 वर्षों से ज्यादा का अनुभव. खेल जगत में मेरी रुचि है. वैसे, मैं राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय खबरों पर काम करता हूं. झारखंड की संस्कृति में भी मेरी गहरी रुचि है. मैं पिछले 14 वर्षों से प्रभातखबर.कॉम के लिए काम कर रहा हूं. इस दौरान मुझे डिजिटल मीडिया में काम करने का काफी अनुभव प्राप्त हुआ है. फिलहाल मैं बतौर शिफ्ट इंचार्ज कार्यरत हूं.
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