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समलैंगिक शादियों को मान्यता देने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, पढ़ें फैसला सुनाते हुए जजों ने क्या कहा

Updated at : 17 Oct 2023 12:56 PM (IST)
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समलैंगिक शादियों को मान्यता देने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, पढ़ें फैसला सुनाते हुए जजों ने क्या कहा

**EDS: GRAB VIA SUPREME COURT OF INDIA YOUTUBE** New Delhi: Chief Justice of India DY Chandrachud during pronouncement of verdict on same-sex marriages. (PTI Photo) (PTI10_17_2023_000036A)

समलैंगिकता केवल शहरी अवधारणा नहीं है या समाज के उच्च वर्ग तक ही सीमित नहीं है. समलैंगिक लोगों सहित सभी को अपने जीवन की नैतिक गुणवत्ता का आकलन करने का अधिकार है. जानें सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिक विवाह मामले पर फैसला सुनाते हुए क्या कहा

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सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने का अनुरोध करने वाली याचिकाओं पर मंगलवार को अपना फैसला सुनाया. कोर्ट ने भारत में LGBTQIA+ समुदाय को वैवाहिक समानता का अधिकार देने से इनकार कर दिया है. प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ ने समलैंगिक विवाह मामले पर कहा कि इस मामले में चार अलग-अलग फैसले हैं. प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ ने समलैंगिक विवाह को कानूनी रूप से वैध ठहराए जाने का अनुरोध करने वाली 21 याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए कहा कि विशेष विवाह अधिनियम में बदलाव करना संसद का काम है और न्यायालय कानून की केवल व्याख्या कर सकता है, उसे बना नहीं सकता है.

प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि न्यायालय सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता का यह बयान दर्ज करता है कि केंद्र समलैंगिक लोगों के अधिकारों के संबंध में फैसला करने के लिए पैनल बनाएगा. इस बीच न्यायमूर्ति एस. के. कौल ने समलैंगिक जोड़ों को कुछ अधिकार दिए जाने को लेकर प्रधान न्यायाधीश से सहमति जताई. न्यायमूर्ति कौल ने कहा कि समलैंगिक और विपरीत लिंग के संबंधों को एक ही सिक्के के दो पहलुओं के रूप में देखा जाना चाहिए. समलैंगिक संबंधों को कानूनी मान्यता देना वैवाहिक समानता की दिशा में एक कदम है.

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वहीं न्यायमूर्ति हिमा कोहली ने न्यायमूर्ति एस रवींद्र भट्ट के लिखे फैसले से सहमति जताई. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट की पांच न्यायाधीशों की पीठ ने समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने से इनकार किया.

समलैंगिक व्यक्तियों को अपना साथी चुनने का अधिकार

समलैंगिक विवाह मामले पर न्यायमूर्ति एस. रवींद्र भट्ट ने कहा कि वह प्रधान न्यायाधीश चंद्रचूड़ के कुछ विचारों से सहमत और कुछ से असहमत हैं. समलैंगिक व्यक्तियों को अपना साथी चुनने का अधिकार है, देश के लिए ऐसे संबंधों से जुड़े अधिकारों को मान्यता देना बाध्यकारी नहीं हो सकता है. न्यायमूर्ति भट्ट ने गोद लेने के समलैंगिक जोड़ों के अधिकार पर प्रधान न्यायाधीश से असहमति जताई और कहा कि उन्होंने कुछ चिंताएं व्यक्त की हैं. उन्होंने कहा कि कानून के अभाव में विवाह का कोई योग्य अधिकार नहीं है. न्यायमूर्ति भट्ट ने प्रधान न्यायाधीश, न्यायमूर्ति कौल की इस बात से सहमति जताई कि संविधान में विवाह के किसी मौलिक अधिकार की गारंटी नहीं दी गई है. समलैंगिक जोड़ों को बिना किसी बाधा एवं परेशानी के एक साथ रहने का अधिकार है.

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निर्णय करना है संसद को : प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़

प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ ने कहा कि यह कल्पना करना कि समलैंगिकता केवल शहरी इलाकों में मौजूद है, उन्हें मिटाने जैसा होगा, किसी भी जाति या वर्ग का व्यक्ति समलैंगिक हो सकता है. उन्होंने कहा कि यह कहना गलत होगा कि विवाह एक स्थिर और अपरिवर्तनीय संस्था है. विशेष विवाह अधिनियम की व्यवस्था में बदलाव की आवश्यकता है या नहीं, इसका निर्णय संसद को करना है.

इन लोगों को अधिकार देना चाहिए: प्रधान न्यायाधीश

प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि जीवन साथी चुनने की क्षमता अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और स्वतंत्रता के अधिकार से जुड़ी है. इन लोगों को अधिकार देना चाहिए. सरकार मामले पर कमिटी बनाए. उन्होंने कहा कि संबंधों के अधिकार में जीवन साथी चुनने का अधिकार, उसकी मान्यता शामिल है; इस प्रकार के संबंध को मान्यता नहीं देना भेदभाव है. समलैंगिक लोगों सहित सभी को अपने जीवन की नैतिक गुणवत्ता का आकलन करने का अधिकार है. इस अदालत ने माना है कि समलैंगिक व्यक्तियों के साथ भेदभाव न किया जाना समानता की मांग है.

…तो यह देश को आजादी से पहले के युग में ले जाएगा

वैवाहिक समानता मामले पर सुनवाई करते हुए सीजेआई चंद्रचूड़ ने कहा कि यह कहना गलत है कि विवाह एक स्थिर और अपरिवर्तनीय संस्था है. अगर विशेष विवाह अधिनियम को खत्म कर दिया गया तो यह देश को आजादी से पहले के युग में ले जाएगा. विशेष विवाह अधिनियम की व्यवस्था में बदलाव की आवश्यकता है या नहीं, यह संसद को तय करना है. इस न्यायालय को विधायी क्षेत्र में प्रवेश न करने के प्रति सावधान रहना चाहिए.

प्रधान न्यायाधीश ने मामले पर सुनवाई करते हुए कहा कि कानून यह नहीं मान सकता कि केवल विपरीत लिंग के जोड़े ही अच्छे माता-पिता साबित हो सकते हैं क्योंकि यह समलैंगिक जोड़ों के खिलाफ भेदभाव होगा. उन्होंने कहा कि केंद्र, राज्य और केंद्र शासित प्रदेश यह सुनिश्चित करें कि समलैंगिक समुदाय के साथ भेदभाव न हो.

समलैंगिक अधिकारों के बारे में आम लोगों को जागरूक करने के लिए कदम उठाए सरकार

प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों को यह सुनिश्चित करना होगा कि लिंग-परिवर्तन ऑपरेशन की अनुमति उस उम्र तक न दी जाए जब तक, इसके इच्छुक लोग इसके परिणाम को पूरी तरह समझने में सक्षम नहीं हों. केंद्र, राज्य, केंद्रशासित प्रदेश समलैंगिक अधिकारों के बारे में आम लोगों को जागरूक करने के लिए कदम उठाएं. प्रधान न्यायाधीश ने पुलिस को समलैंगिक जोड़े के संबंधों को लेकर उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने से पहले प्रारंभिक जांच करने का निर्देश दिया. प्रधान न्यायाधीश चंद्रचूड़ ने कहा कि समलैंगिकता प्राकृतिक होती है जो सदियों से जानी जाती है, इसका केवल शहरी या अभिजात्य वर्ग से संबंध नहीं है.

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11 मई को याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था कोर्ट ने

आपको बता दें कि प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने 10 दिनों की सुनवाई के बाद 11 मई को याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. पीठ के अन्य सदस्यों में न्यायमूर्ति संजय किशन कौल, न्यायमूर्ति एस रवींद्र भट, न्यायमूर्ति हिमा कोहली और न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा शामिल हैं.

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शीर्ष अदालत ने मामले पर सुनवाई 18 अप्रैल को हुई थी शुरू

इससे पहले सुनवाई के दौरान केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने का आग्रह करने वाली याचिकाओं पर उसके द्वारा की गई कोई भी संवैधानिक घोषणा ‘कार्रवाई का सही तरीका’ नहीं हो सकती, क्योंकि अदालत इसके परिणामों का अनुमान लगाने, परिकल्पना करने, समझने और उनसे निपटने में सक्षम नहीं होगी. केंद्र ने कोर्ट को यह भी बताया था कि उसे समलैंगिक विवाह के मुद्दे पर सात राज्यों से प्रतिक्रियाएं मिली हैं और राजस्थान, आंध्र प्रदेश तथा असम की सरकारों ने समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने के याचिकाकर्ताओं के आग्रह का विरोध किया है. आपको बता दें कि शीर्ष अदालत ने मामले पर सुनवाई 18 अप्रैल को शुरू की थी.

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Amitabh Kumar

लेखक के बारे में

By Amitabh Kumar

डिजिटल जर्नलिज्म में 14 वर्षों से अधिक का अनुभव है. करियर की शुरुआत Prabhatkhabar.com से की. राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों पर अच्छी पकड़ है. राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर गहन लेखन का अनुभव रहा है. तथ्यपरक रिपोर्टिंग और विश्लेषणात्मक लेखन में विशेष रुचि है. ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग खबरों पर लगातार फोकस रहता है.

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