RG Kar Case: 'फैसले से संतुष्ट नहीं', बोली ममता बनर्जी, 'केस हमारे हाथ होता तो मिलती फांसी की सजा'

Published by : Pritish Sahay Updated At : 20 Jan 2025 10:30 PM

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RG Kar Case

RG Kar Case: पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने कहा कि हमें नहीं पता कि जांच कैसे की गई. राज्य पुलिस की ओर से जांच किए गए ऐसे ही कई मामलों में मौत की सजा सुनिश्चित की गई है. मैं फैसले से संतुष्ट नहीं हूं.

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RG Kar Case: आरजी कर अस्पताल दुष्कर्म और हत्याकांड मामले में कोर्ट के फैसले से पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने नाखुशी जाहिर की है. आजीवन कारावास की सजा सुनाये जाने पर असंतोष जताते हुए उन्होंने सोमवार को दावा किया कि जांच का जिम्मा कोलकाता पुलिस के पास होता तो निश्चित रूप से मौत की सजा सुनिश्चित की होती. मुर्शिदाबाद में मीडिया से बात करते हुए सीएम ममता बनर्जी मामले में सीबीआई जांच पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि हम सभी ने दोषी के लिए मृत्युदंड की सजा की मांग की थी, लेकिन अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई. ममता बनर्जी ने कहा कि केस सीबीआई ने कोलकाता पुलिस से जबरन अपने हाथों में लिया.

हम जांच करते तो मौत की सजा होती – ममता बनर्जी

पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने कहा कि ‘हमें नहीं पता कि जांच कैसे की गई. राज्य पुलिस की ओर से जांच किये गए ऐसे ही कई मामलों में मौत की सजा सुनिश्चित की गई. मैं फैसले से संतुष्ट नहीं हूं.’ उन्होंने कहा कि मुझे सजा के बारे में मीडिया से पता चला है. हमने हमेशा मौत की सजा की मांग की है और हम इस पर कायम हैं. हालांकि, यह अदालत का फैसला है और मैं इस बारे में ज्यादा कुछ नहीं कह सकती. तीन अन्य मामलों में, राज्य पुलिस ने मौत की सजा सुनिश्चित की है. गहन जांच के माध्यम से 54 से 60 दिनों के भीतर सजा दी गई. यह एक गंभीर मामला था. अगर यह हमारे दायरे में होता, तो हम बहुत पहले ही मौत की सजा सुनिश्चित कर देते.’

हम फैसले से संतुष्ट नहीं- कुणाल घोष

आरजी कर दुष्कर्म और हत्या मामले में सियालदह कोर्ट ने दोषी संजय रॉय को उम्रकैद की सजा सुनाई है. इसपर टीएमसी नेता कुणाल घोष ने कहा कि ‘हम कोर्ट के फैसले से संतुष्ट नहीं हैं. कोर्ट ने उन मामलों में मौत की सजा दी थी जो पश्चिम बंगाल पुलिस के अधीन थे. आरजी कर मामला सीबीआई के अधीन था, इस कारण उम्रकैद की सजा सुनाई गई. उन्होंने भी यह कहा की अगर जांच कोलकाता पुलिस करती तो दोषी को उम्र कैद के बदले फांसी की सजा होती.

सियालदह की कोर्ट ने सुनाई उम्र कैद की सजा

सियालदह की अदालत ने दोषी संजय रॉय को आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में प्रशिक्षु चिकित्सक से दुष्कर्म और हत्या के मामले में दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. सियालदह के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनिर्बान दास की अदालत ने यह फैसला सुनाया. दोषी संजय रॉय को पिछले साल 9 अगस्त को अस्पताल में स्नातकोत्तर प्रशिक्षु चिकित्सक के साथ हुए जघन्य अपराध के मामले में दोषी करार दिया था. इस घटना के बाद पूरे देश में अभूतपूर्व और लंबे समय तक विरोध प्रदर्शन हुए थे. जस्टिस दास ने फैसला सुनाते हुए कहा कि यह अपराध दुर्लभ से दुर्लभतम श्रेणी में नहीं आता है इस कारण दोषी को मृत्युदंड नहीं दिया गया है.

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By Pritish Sahay

प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.

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