RG Kar Case : संजय रॉय को कोर्ट ने सुनाई उम्र कैद की सजा, सीबीआई ने कहा था- फांसी दी जाए
Published by : Amitabh Kumar Updated At : 20 Jan 2025 2:53 PM
सियालदह कोर्ट के बाहर की तस्वीर
RG Kar Murder Case : आरजी कर मेडिकल कॉलेज में लेडी डॉक्टर के साथ दुष्कर्म और हत्या के मामले में मुख्य आरोपी संजय रॉय को कोर्ट ने उम्र कैद की सजा सुनाई है.
RG Kar Case Verdict: आरजी कर दुष्कर्म-हत्या मामले में कोर्ट ने दोषी संजय रॉय को उम्र कैद की सजा सुनाई है. कोर्ट ने 50,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है. सुनवाई के दौरान जज ने आरोपी संजय रॉय से कहा था कि मैंने आपको पिछले दिन बताया था कि आप पर क्या आरोप लगाए गए हैं. आपके खिलाफ कौन से आरोप साबित हुए हैं. इसपर आरोपी संजय ने जज से कहा, ‘मैंने कुछ नहीं किया है, न दुष्कर्म और न ही हत्या. मुझे झूठा फंसाया जा रहा है. मैं निर्दोष हूं. मैंने आपको पहले ही बताया था कि मुझे प्रताड़ित किया गया. उन्होंने मुझसे जो चाहा, उस पर हस्ताक्षर करवाए.’
कोर्ट में सीबीआई ने कहा था कि कोलकाता कांड से देश हिल गया था. दोषी को फांसी की सजा दी जाए.
कोर्ट ने 18 जनवरी को संजय रॉय को मामले में दोषी पाया था. दुष्कर्म के लिए भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 64 के साथ-साथ धारा 66 और 103(1) के तहत मौत और हत्या करने के लिए उसे दोषी ठहराया गया था. बीएनएस की धारा 103(1) में अधिकतम आजीवन कारावास या फिर मौत की सजा का प्रावधान होता है.
आरजी कर दुष्कर्म-हत्या मामले के दोषी की मां की आई प्रतिक्रिया
ट्रेनी डॉक्टर के साथ दुष्कर्म और हत्या के मामले में संजय रॉय को दोषी ठहराए जाने के बाद उसकी मां की प्रतिक्रिया आई. मां ने कहा कि यदि उनका बेटा दोषी है, तो उसे उसके किए की सजा मिलनी चाहिए, फिर भले ही वह सजा फांसी ही क्यों न हो. रॉय की मां मालती रॉय ने कहा कि वह अकेले में रोएंगी लेकिन उसकी सजा को नियति मानकर स्वीकार भी कर लेंगी. शुरुआत में मीडिया से बात करने में संकोच करने वाली संजय की मां मालती रॉय ने रविवार को मीडिया से बात की. उन्होंने कहा कि एक महिला और तीन बेटियों की मां होने के नाते, ‘‘ मैं उस डॉक्टर की मां की पीड़ा और दर्द को महसूस कर सकती हूं.’’
आखिर संजय रॉय को क्यों बनाया गया मुख्य आरोपी?
संजय रॉय मामले में मुख्य आरोपी बनाया गया था. वह एक सिविल वॉलंटियर था जो सिटी पुलिस के साथ मिलकर काम करता था. कोलकाता पुलिस ने उसे डॉक्टर का शव मिलने के एक दिन बाद यानी 10 अगस्त को गिरफ्तार किया. पीड़ित के शव के पास मिले ब्लूटूथ इयरफोन के आधार पर पुलिस ने संजय रॉय को पकड़ा था. घटना के सीसीटीवी कैमरे में फुटेज में ब्लूटूथ इयरफोन को गले में लटकाए सेमिनार हॉल में इंटर करते वह नजर आया था.
सीबीआई को सौंपी गई आरजी कर मामले की जांच
कलकत्ता हाई कोर्ट ने मामले को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपा था. अपराध के तुरंत बाद पुलिस और राज्य सरकार के रवैये पर सख्त टिप्पणी कोर्ट की ओर से की गई. केंद्रीय एजेंसी ने मुख्य आरोपी के लिए मौत की सजा की मांग की है. एजेंसी ने सबूत नष्ट करने के कथित प्रयासों के लिए आरजी कार के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष और ताला पुलिस स्टेशन के अधिकारी अभिजीत मंडल को भी गिरफ्तार किया, हालांकि बाद में को जमानत पर रिहा कर दिया गया. ऐसा इसलिए क्योंकि एजेंसी 90 दिनों से पहले उनके खिलाफ आरोपपत्र दर्ज करने में सीबीआई विफल रही.
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By Amitabh Kumar
अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.
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