कोलोरेक्टल कैंसर पर जागरूकता सबसे बड़ा हथियार: बोले डॉ. साहनी- 'समय पर कराएं जांच, जिंदगी बचाएं'

Colorectal Cancer Awareness, AI Image
मार्च में मनाए जाने वाले Colorectal Cancer Awareness Month के अवसर पर डॉ. कार्तिक साहनी ने बड़ी आंत और मलाशय के कैंसर के प्रति जागरूक रहने और नियमित स्क्रीनिंग कराने की अपील की है. पहले 50 वर्ष से अधिक के उम्र के लोगों में यह बीमारी देखी जाती थी लेकिन अब 40 साल से कम में भी इसके मामले बढ़ रहे हैं.
Colorectal Cancer Awareness: मार्च को दुनियाभर में Colorectal Cancer Awareness Month के रूप में मनाया जाता है. इस अवसर पर Rajiv Gandhi Cancer Institute के कैंसर विशेषज्ञ डॉ. कार्तिक साहनी ने लोगों से बड़ी आंत और मलाशय के कैंसर (कोलोरेक्टल कैंसर) को लेकर जागरूक रहने और नियमित स्क्रीनिंग कराने की अपील की है. “कोलोरेक्टल कैंसर एक साइलेंट किलर की तरह है. शुरुआती चरण में लक्षण बहुत सामान्य होते हैं, इसलिए लोग अक्सर इसे नज़रअंदाज़ कर देते हैं,” डॉ. साहनी ने कहा. “लेकिन अगर समय रहते जांच हो जाए तो इस बीमारी का सफल इलाज संभव है.”
कम उम्र में भी बढ़ रहे मामले
डॉ. साहनी के अनुसार, पहले यह बीमारी 50 वर्ष से अधिक उम्र में अधिक देखी जाती थी, लेकिन अब 40 वर्ष से कम उम्र के मरीज भी सामने आ रहे हैं. “अनियमित खानपान, कम फाइबर वाला आहार, प्रोसेस्ड फूड, धूम्रपान, शराब और शारीरिक निष्क्रियता इसके प्रमुख कारण हैं,” उन्होंने बताया.
किन लक्षणों पर दें ध्यान
डॉ. साहनी ने सलाह दी “यदि ये लक्षण दो सप्ताह से अधिक रहें तो तुरंत गैस्ट्रो या कैंसर विशेषज्ञ से संपर्क करें.”
- मल त्याग की आदतों में बदलाव
- मल में खून आना
- लगातार पेट दर्द या सूजन
- बिना कारण वजन घटना
- लंबे समय तक थकान
कई मरीजों को करानी पड़ती है कोलोस्टोमी
विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि कोलोरेक्टल कैंसर एडवांस स्टेज में पहुंच जाए तो पहले कीमोथेरेपी कर के सर्जरी के दौरान बड़ी आंत या मलाशय का हिस्सा हटाना पड़ सकता है. डॉ. साहनी ने बताया, “कुछ मरीजों में हमें कोलोस्टोमी करनी पड़ती है, जिसमें पेट की दीवार पर एक स्टोमा बनाकर मल को बाहर एक विशेष बैग में एकत्रित किया जाता है. उसी बैग के साथ लंबे समय तक रहना पड़ता है, जो शुरुआत में काफी असुविधाजनक और मानसिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है.” उन्होंने आगे कहा, “मरीज को एक बैग पहनना पड़ता है जिसमें मल एकत्रित होता है. हालांकि, सही मार्गदर्शन, स्टोमा केयर प्रशिक्षण और आधुनिक मेडिकल सुविधाओं की मदद से मरीज सामान्य जीवन जी सकते हैं.”
स्क्रीनिंग है सबसे बड़ा बचाव
उन्होंने कहा कि डॉ. साहनी ने 45 वर्ष की उम्र के बाद नियमित कोलोनोस्कोपी कराने की सिफारिश की. “जिन लोगों के परिवार में कोलोरेक्टल कैंसर का इतिहास है, उन्हें और भी सतर्क रहने की जरूरत है. स्क्रीनिंग से कैंसर बनने से पहले ही पॉलीप्स को हटाया जा सकता है,”
जागरूकता ही बचाव
Colorectal Cancer Awareness Month के अवसर पर विशेषज्ञों ने संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, धूम्रपान और अत्यधिक शराब से दूरी बनाने की सलाह दी है. डॉ. साहनी ने कहा, “यह महीना हमें याद दिलाता है कि समय पर जांच और सही जानकारी से हम कई जिंदगियां बचा सकते हैं.”
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लेखक के बारे में
By Pritish Sahay
12 वर्षों से टीवी पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सेवाएं दे रहा हूं. रांची विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग से पढ़ाई की है. राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय विषयों के साथ-साथ विज्ञान और ब्रह्मांड विषयों पर रुचि है. बीते छह वर्षों से प्रभात खबर.कॉम के लिए काम कर रहा हूं. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में काम करने के बाद डिजिटल जर्नलिज्म का अनुभव काफी अच्छा रहा है.
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