बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर राहुल के साइन नहीं? कांग्रेस ने बताई वजह
Published by : ArbindKumar Mishra Updated At : 10 Feb 2026 4:31 PM
राहुल गांधी, फोटो पीटीआई
विपक्ष ने मंगलवार को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पद से हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव लाने का नोटिस दिया. नोटिस में 118 सांसदों के साइन हैं, लेकिन लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के इस्ताक्षर नहीं हैं. विपक्ष का आरोप है कि बिरला ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर सदन में राहुल गांधी और दूसरे विपक्षी नेताओं को बोलने से रोका था. साथ ही, आठ MPs को सस्पेंड करने का भी प्रस्ताव रखा.
नोटिस पर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, द्रमुक और कई अन्य विपक्षी दलों के कुल 118 सांसदों ने साइन किए हैं. लोकसभा महासचिव को नोटिस सौंपे जाने के बाद ओम बिरला ने खुद को सदन की कार्यवाही से अलग कर लिया और आसन पर नहीं बैठे.
राहुल गांधी ने नोटिस पर क्यों नहीं किया साइन?
न्यूज एजेंसी एएनआई ने कांग्रेस सूत्रों के हवाले से बताया, लोकसभा के LoP और राहुल गांधी ने स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ नो-कॉन्फिडेंस मोशन के नोटिस पर साइन नहीं किया, क्योंकि संसदीय लोकतंत्र में LoP के लिए स्पीकर को हटाने की पिटीशन पर साइन करना सही नहीं है.
नो-कॉन्फिडेंस मोशन में क्या कहा गया?
कांग्रेस की तरफ से लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ पेश किए गए नो-कॉन्फिडेंस मोशन में कहा गया है, भारत के संविधान के आर्टिकल 94(c) के नियमों के तहत, ओम बिरला को लोकसभा स्पीकर के पद से हटाने के लिए एक प्रस्ताव का नोटिस इसलिए दिया गया है क्योंकि वह लोकसभा का काम खुलेआम एकतरफा तरीके से कर रहे हैं. कई मौकों पर, विपक्षी पार्टियों के नेताओं को बोलने नहीं दिया गया, जो संसद में उनका बुनियादी लोकतांत्रिक अधिकार है.

नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी : लोकसभा सचिवालय
लोकसभा सचिवालय के सूत्रों ने विपक्ष का नोटिस मिलने की बात स्वीकार करते हुए कहा कि इस पर विचार किया जाएगा और नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी. निचले सदन में कांग्रेस के उप नेता गौरव गोगोई, कांग्रेस के मुख्य सचेतक कोडिकुनिल सुरेश और सचेतक मोहम्मद जावेद ने लोकसभा महासचिव उत्पल कुमार सिंह को यह नोटिस सौंपा.
तृणमूल कांग्रेस के सांसदों ने नोटिस पर नहीं किया साइन
अविश्वास प्रस्ताव के मुद्दे पर भी विपक्षी एकता को झटका लगा है. तृणमूल कांग्रेस के सांसदों ने इस नोटिस पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं.
संविधान के अनुच्छेद 94 (सी) के तहत नोटिस दिया गया
कांग्रेस सांसद गोगोई ने कहा कि लोकसभा महासचिव को संविधान के अनुच्छेद 94 (सी) के तहत यह प्रस्ताव संबंधी नोटिस सौंपा गया है. विपक्ष ने नोटिस में कहा, बीते दो फरवरी को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर बोलते समय अपना भाषण पूरा नहीं करने दिया गया. यह कोई अकेली घटना नहीं है. करीब-करीब हमेशा ही ऐसा होता है कि लोकसभा में विपक्ष के नेता को बोलने नहीं दिया जाता. उन्होंने दावा किया कि गत 3 फरवरी को, विपक्ष के आठ सांसदों को पूरे बजट सत्र के लिए मनमाने ढंग से निलंबित कर दिया गया और उन्हें केवल अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल करने के लिए दंडित किया जा रहा है.
नोटिस में बिना नाम लिए निशिकांत दुबे पर निशाना
नोटिस में भाजपा सांसद निशिकांत दुबे का नाम लिए बगैर कहा गया है, बीते चार फरवरी 2025 को, बीजेपी के एक सांसद को दो पूर्व प्रधानमंत्रियों पर पूरी तरह आपत्तिजनक और व्यक्तिगत हमले करने की अनुमति दी गई और स्थापित परंपराओं और मर्यादा के मानदंडों की अवहेलना करने के बावजूद उन्हें एक बार भी नहीं टोका गया. हमारे अनुरोध के बावजूद इस सांसद के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई, जबकि वह आदतन ऐसी गतिविधियां करते हैं.
ओम बिरला के बयान का भी विपक्ष ने नोटिस में किया जिक्र
विपक्ष ने ओम बिरला द्वारा सदन में पांच फरवरी को दिए गए उस वक्तव्य का भी हवाला दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि चार फरवरी को कांग्रेस के कई सदस्य सदन के नेता (प्रधानमंत्री) की सीट के पास पहुंचकर किसी अप्रत्याशित घटना को अंजाम देना चाहते थे, इसलिए उनके अनुरोध पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सदन में नहीं आए. नोटिस में आरोप लगाया गया है, ये टिप्पणियां कांग्रेस के सदस्यों के खिलाफ खुले तौर पर झूठे आरोप लगाने वाली और अपमानजनक प्रकृति की हैं. अध्यक्ष, जिन्हें कार्य-संचालन नियमों और संसदीय मर्यादा के मानकों का संरक्षक होना चाहिए, उन्होंने सदन के पटल से ऐसे बयान दिए, जो इस संवैधानिक पद के दुरुपयोग को दर्शाते हैं. विपक्ष ने कहा, हम लोकसभा अध्यक्ष को व्यक्तिगत रूप से सम्मान देते हैं, लेकिन जिस प्रकार से उन्होंने लगातार विपक्ष की आवाज को दबाने का प्रयास किया है, उससे हम अत्यंत आहत और व्यथित हैं.
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अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.
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