Priyanka Gandhi : प्रियंका गांधी के पीछे संसद पहुंचना चाहते हैं राॅबर्ट वाड्रा, उनके वायनाड से चुनाव लड़ने पर जताई खुशी

Published by : Rajneesh Anand Updated At : 18 Jun 2024 2:23 PM

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राॅबर्ट वाड्रा ने कहा है कि प्रियंका उनसे पहले संसद पहुंच रही हैं, वे उचित समय में उनका अनुसरण करेंगे.

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Priyanka Gandhi : कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी के वायनाड से उपचुनाव लड़ने पर उनके पति राॅबर्ट वाड्रा खुशी जताई है. राॅबर्ट वाड्रा ने कहा कि मुझे बहुत खुशी है कि प्रियंका गांधी वायनाड से चुनाव लड़ रही हैं, मैं चाहता हूं कि वे संसद पहुंचें. पीटीआई न्यूज एजेंसी से बात करते हुए वाड्रा ने कहा मुझे उम्मीद है कि वायनाड की जनता उन्हें अच्छे जनादेश से जीत दिलाएगी. राहुल गांधी ने लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान वायनाड और रायबरेली लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था और अब वे वायनाड सीट से इस्तीफा देंगे, इसकी जानकारी कांग्रेस पार्टी ने सोमवार को दी थी. राहुल के इस्तीफे के बाद वायनाड में उपचुनाव होगा, जिसमें कांग्रेस की प्रत्याशी प्रियंका गांधी होंगी.

प्रियंका मुझसे पहले संसद पहुंच रहीं हैं

प्रियंका गांधी को बधाई देते हुए राॅबर्ट वाड्रा ने इस बात के भी संकेत दिए कि वे भी चुनाव लड़ेंगे. वाड्रा ने कहा कि प्रियंका मुझसे पहले संसद पहुंच रही हैं, जब भी उचित समय आएगा मैं उनका अनुसरण करूंगा. राॅबर्ट वाड्रा कई बार इस बात के संकेत दे चुके हैं कि वे लड़ेंगे. चुनाव प्रचार के दौरान भी उन्होंने यह कहा था कि कई इलाके के लोग उनसे यह मांग करते हैं कि वे अमेठी से चुनाव लड़ें. चुनाव इससे पहले जब कांग्रेस पार्टी ने यह घोषणा की कि प्रियंका गांधी वायनाड से उपचुनाव लड़ेंगी तो उन्होंने अपने एक्स हैंडल से उनकी एक तस्वीर पोस्ट की थी और उन्हें बधाई दी थी.

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जनता ने बीजेपी को सबक सिखाया

पीटीआई के साथ बातचीत में राॅबर्ट वाड्रा ने यह भी कहा कि वो देश की जनता को धन्यवाद देना चाहते हैं क्योंकि उन्होंने बीजेपी को सबक सिखाने का काम किया है. बीजेपी नफरत की राजनीति करती है और लोगों को धर्म के आधार पर बांटना चाहती है. प्रियंका गांधी पहली बार चुनाव लड़ने जा रही हैं, इसके पहले कई बार उनके चुनाव लड़ने की बातें चर्चा में आईं, लेकिन फिर उन्होंने चुनाव नहीं लड़ा. प्रियंका गांधी पार्टी में महासचिव के पद पर हैं और चुनाव प्रचार के दौरान वे काफी एक्टिव रहती हैं. प्रियंका गांधी अभी 52 साल की हैं और एक्टिव पाॅलिटिक्स में कदम रखने जा रही हैं.

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लेखक के बारे में

By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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