कुमार विश्वास बोले- मुझे नमाज पढ़ते लोग सम्मोहित करते हैं, RSS की प्रार्थना पर जताई आपत्ति ... पुराना video वायरल

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 कवि कुमार विश्वास

कवि कुमार विश्वास ( स्रोत- कुमार विश्वास X )

डॉ. कुमार विश्वास का एक पुराना इंटरव्यू, जिसमें वे नमाज और मदरसों पर अपनी राय रखते दिख रहे हैं, सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. उनके इस बयान पर एक बार फिर नई बहस छिड़ गई है. जानिए क्या है पूरा मामला और क्या था उनका कहना.

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मशहूर कवि और वक्ता डॉ. कुमार विश्वास का एक पुराना इंटरव्यू इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर शेयर किए जा रहे इस वीडियो में कुमार विश्वास नमाज और मदरसों को लेकर अपनी राय रखते हुए दिखाई देते हैं. उन्होंने कहा कि मुझे नवाज पढ़ते कतार में बैठे लोग बहुत अच्छे लगते हैं. वहीं उन्होंने RSS की प्रार्थना गीत पर आपत्ति जताई. उनके पुराने बयान को लेकर एक बार फिर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है.

RSS का एक धर्म विशेष के प्रति अनुराग और एक धर्म के विद्वेष है, वो मुझे नहीं भाता. उनकी प्रार्थना में एक शद्ब आता है हिन्दू राष्ट्रांगभूता.ये मेरे हिसाब से भारतीय राष्ट्रांगभूता हो तो ठीक है.- कवि कुमार विश्वास

क्या कहा था कुमार विश्वास ने?

इंटरव्यू के दौरान RSS, धर्म और राजनीति पर सवाल पूछे जाने पर कुमार विश्वास ने कहा था कि उन्हें नमाज पढ़ते हुए लोग इसलिए अच्छे लगते हैं क्योंकि वहां अमीर और गरीब एक साथ एक ही कतार में खड़े होकर इबादत करते हैं. उन्होंने कहा कि यह सामाजिक समानता उन्हें आकर्षित करती है. उन्होंने यह भी कहा था कि कुछ व्यवस्थाएँ, जैसे मदरसों का अनुशासन, उन्हें प्रभावित करता है. उन्होंने स्पष्ट किया कि जहां जो बात अच्छी लगती है, उसकी खुलकर सराहना करनी चाहिए.

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पुरानी बात, नई बहस

यह बयान कई साल पुराना है, लेकिन हाल के दिनों में फिर वायरल होने लगा है. सोशल मीडिया पर कुछ लोग इसे कुमार विश्वास के पुराने विचारों का उदाहरण बता रहे हैं, जबकि कुछ लोग उनके वर्तमान में रामकथा ‘अपने-अपने राम’ के मंचों पर दिए जाने वाले वक्तव्यों से इसकी तुलना कर रहे हैं। इसी वजह से यह क्लिप फिर चर्चा का विषय बन गई है.

संदर्भ समझना भी जरूरी

पूरा इंटरव्यू देखने पर स्पष्ट होता है कि कुमार विश्वास किसी धर्म का समर्थन या विरोध नहीं कर रहे थे, बल्कि धार्मिक व्यवस्थाओं में दिखाई देने वाली सामाजिक समानता और अनुशासन की बात कर रहे थे. सोशल मीडिया पर अक्सर छोटे-छोटे वीडियो क्लिप संदर्भ से अलग साझा किए जाते हैं, जिससे बयान का अर्थ बदल सकता है. इसलिए किसी भी वायरल वीडियो पर राय बनाने से पहले उसका पूरा संदर्भ देखना जरूरी है.

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सत्येन्द्र गिरि

लेखक के बारे में

By सत्येन्द्र गिरि

सत्येन्द्र गिरि प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. यहां वे मुख्य रूप से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विषयों से जुड़ी खबरों का लेखन करते हैं. सरल, तथ्यात्मक और पाठक-केंद्रित लेखन उनकी प्रमुख पहचान है. उन्होंने एशिया के प्रतिष्ठित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से मास्टर ऑफ आर्ट्स इन मास कम्युनिकेशन (बैच 2023–25) की डिग्री प्राप्त की है.

पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान उन्होंने समाचार लेखन, डिजिटल मीडिया, रिपोर्टिंग और समसामयिक विषयों की गहन समझ विकसित की. पत्रकारिता के क्षेत्र में उनके पास एक वर्ष का पेशेवर अनुभव है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अमर उजाला के गोरखपुर एडिशन से की, जहां समाचार लेखन और रिपोर्टिंग की बारीकियों को नजदीक से सीखने और समझने का अवसर मिला. इसके बाद उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता में कदम रखते हुए प्रभात खबर डिजिटल से जुड़कर देश-विदेश की महत्वपूर्ण खबरों को पाठकों तक पहुंचाने का कार्य शुरू किया.

सत्येन्द्र की विशेष रुचि इतिहास, अंतरराष्ट्रीय संबंध, राजनीति, कूटनीति और समसामयिक घटनाक्रम से जुड़े विषयों में है. वे जटिल और गंभीर मुद्दों को भी सरल, संतुलित और विश्वसनीय तरीके से प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं. राष्ट्रीय और वैश्विक घटनाओं पर उनकी गहरी नजर रहती है तथा वे तथ्यपरक और निष्पक्ष पत्रकारिता को अपनी कार्यशैली का आधार मानते हैं. वे मूल रूप से उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले के निवासी हैं.

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