तो क्या इस वजह से प्रशांत किशोर और कांग्रेस में नहीं बन पायी बात ? आखिर क्या था प्रेजेंटेशन में ऐसा

प्रशांत किशोर ने कहा था कि कांग्रेस को लगभग 370 लोकसभा सीट पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए और महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल एवं तमिलनाडु में गठबंधन के साथ चुनाव मैदान में उतरना चाहिए. जानें आखिर प्रशांत किशोर और कांग्रेस में क्यों नहीं बन पायी बात.
कांग्रेस जहां एक ओर लोकसभा चुनाव 2024 की तैयारी में जुटी हुई है. वहीं दूसरी ओर चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने पार्टी को झटका दे दिया है. दरअसल प्रशांत किशोर ने कांग्रेस में शामिल होने के पार्टी नेतृत्व के ऑफर को ठुकरा दिया है. ऐसा पहली बार नहीं है जब प्रशांत किशोर और कांग्रेस की बात नहीं बनी. यदि आपको याद हो जो इससे पहले भी ऐसा प्रयास किया जा चुका है. कांग्रेस के ऑफर को ठुकराते हुए किशोर ने कहा कि देश की सबसे पुरानी पार्टी में घर कर गई ढांचागत समस्याओं को दूर करने के लिए उनसे ज्यादा जरूरी यह है कि कांग्रेस में नेतृत्व और सामूहिक इच्छाशक्ति हो.
खबरों की मानें तो प्रशांत किशोर को लेकर खुद गांधी परिवार में एक मत नहीं था. कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी किशोर को लेकर सजह नहीं थे. प्रियंका गांधी वाड्रा की बात करें तो वह लगभग हर बैठक में नजर आयीं थीं.वहीं कहा जा रहा है कि सोनिया गांधी भी प्रशांत के पार्टी नेतृत्व को लेकर दिए सुझावों से बहुत ज्यादा सहमत नहीं थी. यही वजह है कि प्रशांत किशोर के साथ कांग्रेस की बात नहीं बन पायी. इसके इतर जो बात कही जा रही है, उसके अनुसार पूर्व में प्रशांत किशोर ने राहुल गांधी पर जमकर हमला किया था जो कांग्रेस को रास नहीं आया. ऐसी भी खबर है कि वे कांग्रेस की कमान प्रियंका गांधी के हाथों में देखना चाहते थे.
मामले को लेकर कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने ट्वीट किया. अपने ट्वीट में उन्होंने कहा कि प्रशांत किशोर की प्रस्तुति और उनके साथ चर्चा के बाद कांग्रेस अध्यक्ष ने ‘विशेषाधिकार प्राप्त कार्य समूह-2024′ का गठन किया. यही नहीं किशोर को निर्धारित जिम्मेदारी के साथ इस समूह का हिस्सा बनकर कांग्रेस में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया. इसके बाद भी उन्होंने हामी नहीं भरी. हम उनके प्रयासों और कांग्रेस को दिये गये सुझावों की सराहना करते हैं. सुरजेवाला की इस टिप्पणी के कुछ देर बाद प्रशांत किशोर ने भी ट्वीट किया. उन्होंने अपने ट्वीट में कहा कि मैंने विशेषाधिकार प्राप्त कार्य समूह का हिस्सा बनकर कांग्रेस में शामिल होने और चुनावों की जिम्मेदारी लेने की कांग्रेस की दरियादिली भरी पेशकश को स्वीकार करने से इनकार किया है. उन्होंने यह भी कहा कि मेरी विनम्र राय है कि मुझसे ज्यादा पार्टी को नेतृत्व और सामूहिक इच्छाशक्ति की जरूरत है ताकि परिवर्तनकारी सुधारों के माध्यम से पार्टी के भीतर घर कर चुकी ढांचागत समस्याओं को दूर किया जा सके.
यहां चर्चा कर दें कि प्रशांत किशोर ने कुछ दिन पहले कांग्रेस नेतृत्व के समक्ष पार्टी को मजबूत करने और अगले लोकसभा चुनाव की तैयारियों के संदर्भ में विस्तार से प्रेजेंटेशन दिया था. उनके सुझावों पर विचार करने के लिए सोनिया गांधी ने आठ सदस्यीय समिति का गठन किया था. सूत्रों ने बताया कि किशोर ने सुझाव दिया कि उत्तर प्रदेश, बिहार और ओडिशा जैसे कुछ राज्यों में कांग्रेस को नये सिरे से अपनी रणनीति बनानी चाहिए और इन प्रदेशों में गठबंधन से परहेज करना चाहिए. कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, अपनी प्रस्तुति में प्रशांत किशोर ने यह भी कहा था कि कांग्रेस को लगभग 370 लोकसभा सीट पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए और महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल एवं तमिलनाडु में गठबंधन के साथ चुनाव मैदान में उतरना चाहिए.
भाषा इनपुट के साथ
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