प्रद्युत बोरदोलोई का बीजेपी में जाना, दुर्भाग्यपूर्ण : प्रियंका गांधी

Edited by Rajneesh Anand
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प्रियंका गांधी

Priyanka Gandhi : 30 साल तक बीजेपी के साथ रहने के बाद जब पार्टी में अपमानित होने का दावा करके प्रद्युत बोरदोलोई ने पार्टी छोड़कर बीजेपी का दामन थामा, तो कांग्रेस में हड़कंप मच गया.

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Priyanka Gandhi : कांग्रेस की सांसद और महासचिव प्रियंका गांधी ने असम के नेता प्रद्युत बोरदोलोई के बीजेपी में शामिल हो जाने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा कि वे एक सीट पर टिकट को लेकर नाराज थे, काश मेरी उनसे बातचीत हो पाती.


चुनाव से महज 20 दिन पहले कांग्रेस को लगा झटका


असम में विधानसभा चुनाव के लिए 9 अप्रैल को वोटिंग होना है. ऐसे में जब कांग्रेस पार्टी अपनी पूरी ऊर्जा बीजेपी के खिलाफ लगा रही है, उसके अपने ही खेमे से 30 साल पार्टी में गुजारने वाले प्रद्युत बोरदोलोई ने इस्तीफा देकर बीजेपी ज्वाइन कर लिया. इतना ही नहीं उन्होंने कहा कि पार्टी में किसी की सुनी नहीं जाती है. उन्हें घुटन महसूस हो रही थी उनका लगातार अपमान हो रहा था.

असम चुनाव की स्क्रीनिंग कमेटी की अध्यक्ष हैं प्रियंका गांधी

प्रियंका गांधी असम चुनाव के लिए उम्मीदवारों के नाम तय करने वाली स्क्रीनिंग कमेटी की अध्यक्ष हैं. उन्होंने कहा कि बोरदोलोई का बीजेपी में शामिल दुर्भाग्यपूर्ण है. वे नाराज थे. कांग्रेस के नेताओं के बीजेपी में शामिल होने पर चुटकी लेते हुए उन्होंने कहा कि विचारधारा भी मायने रखती है. कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा कि पार्टी बोरदोलोई को अपना फैसला बदलने के लिए मनाने की कोशिश करेगी. बोरदोलोई असम की नगांव लोकसभा सीट से सांसद हैं, जहां की 65 प्रतिशत आबादी मुस्लिम है. बोरदोलोई ने बीजेपी के खिलाफ जीत दर्ज की है. विचारधारा से समझौता करना सही नहीं है. हम उन्हें मनाने की कोशिश करेंगे.

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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