नोरा फतेही के गाने सरके चुनर पर बैन, समझिए सरकार ने क्यों उठाया यह कदम

Edited by Rajneesh Anand
Updated:
विज्ञापन

अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में कहा-सरके चुनर पर बैन लगा दिया गया है.

Sarke Chunri Teri Sarke : नोरा फतेही का गाना सरके चुनर तेरी सरके गाना जितनी तेजी से सोशल मीडिया में वायरल हुआ, उतनी ही तेजी से इसपर विवाद भी शुरू हो गया है. अब सरकार ने इस विवाद में दखल देते हुए  केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) को नोरा फतेही के गाने सरके चुनर के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और इसे सभी प्लेटफॉर्म से हटाने का निर्देश दिया है. आइए समझते हैं क्या है पूरा विवाद. 

विज्ञापन

Sarke Chunri Teri Sarke : बाॅलीवुड में डबल मीनिंग के गानों का इतिहास रहा है, कई डबल मीनिंग गाने यहां बने और चर्चा में भी रहे. चोली के पीछे क्या है…, सात सहेलियां खड़ी–खड़ी सहित कई ऐसे गाने यहां बने जिन्हें डबल मीनिंग वाला बताया गया और उनपर प्रतिबंध की मांग भी उठी. अब कन्नड़ मूवी केडी: दि डेविल का गाना सरके चुनर तेरी सरके के लिरिक्स पर विवाद हो रहा है. 

केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में कहा कि गाने पर बैन लगा दिया गया है. हमें फ्रीडम ऑफ स्पीच है, लेकिन हमें इसका सही तरीके से उपयोग करना चाहिए. फ्रीडम ऑफ स्पीच पूरी तरह से नहीं हो सकती, यह समाज और संस्कृति के हिसाब से होती है. समाजवादी पार्टी के नेता आनंद भदौरिया ने इस मसले पर सरकार से सवाल पूछा था.

सरके चुनर तेरी सरके पर क्या है विवाद?

सरके चुनर तेरी सरके गाने के लिरिक्स पर घोर आपत्ति जताई जा रही है. कहा जा रहा है कि इस गाने के बोल बहुत ही अश्लील हैं और गाने को बहुत ही फूहड़ और उत्तेजक तरीके से पेश किया गया है. गाने के वायरल होने के बाद इसपर कई लोगों ने कड़ी आपत्ति जताई. जिसके बाद इस गाने को लेकर सामाजिक, राजनीतिक और फिल्मी जगत में बहस छिड़ गई है. आपत्तियों के बाद गाने के हिंदी वर्जन को यूट्‌यूब से हटा दिया गया है, लेकिन कन्नड़, तमिल, तेलुगु और मलयालम वर्जन अभी मौजूद है.

KD: The Devil मूवी एक पैन इंडिया प्रोजेक्ट है

KD: The Devil मूवी कन्नड़ भाषा में बन रही है और यह एक पैन इंडिया प्रोजेक्ट है, जो 30 अप्रैल को पूरे  देश में रिलीज होगी. इस फिल्म के डायरेक्टर प्रेम के हैं, उन्होंने ही इस गाने के लिरिक्स को लिखा है. हिंदी में अनुवाद रकीब आलम ने किया है. पूरे विवाद के बाद ऑल  इंडिया सिने वर्कर्स एसोसिएशन ने गाने पर बैन लगाने की मांग भी की है. एसोसिएशन का कहना है कि इस तरह के गानों से निगेटिविटी फैलती है. वहीं फिल्म के डायरेक्टर प्रेम की पत्नी और अभिनेत्री रक्षिता ने सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखकर कहा है कि चोली के पीछे पर सवाल क्यों नहीं उठे थे, जो सरके चुनर पर आपत्ति की जा रही है.

ये भी पढ़ें : अमेरिकी हमलों के जवाब में संयुक्त अरब अमीरात क्यों है ईरान के निशाने पर?

कौन है NIA की गिरफ्त में आया अमेरिकी मैथ्यू वैनडाइक? लीबिया, सीरिया, यूक्रेन में लड़ा, अब भारत के लिए खतरा!

विज्ञापन
Rajneesh Anand

लेखक के बारे में

By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola