पीएम मोदी ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को गिफ्ट की मेलोडी टॉफी, तो ट्रेंड करने लगा Parle
Published by : Rajneesh Anand Updated At : 20 May 2026 1:12 PM
पीएम मोदी ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को गिफ्ट की मेलोडी टॉफी
PM Modi- Giorgia Meloni : भारत की चर्चित कंपनी पारले की मेलोडी टॉफी इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी तक पहुंच गई है. पीएम मोदी ने उन्हें मेलोडी टॉफी का एक पैकेट गिफ्ट किया है. इस शानदार गिफ्ट को पाकर इटली की प्रधानमंत्री मेलोनी बहुत खुश हैं.
PM Modi- Giorgia Meloni : इटली की यात्रा पर पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को मेलोडी टॉफी गिफ्ट की. इस गिफ्ट को पाकर मेलोनी बहुत खुश हैं और उन्होंने इस खास पल का वीडियो एक्स पर शेयर किया है. वीडियो में मेलोनी यह बता रही है कि पीएम मोदी ने उन्हें बहुत ही बढ़िया टॉफी गिफ्ट की है, जिसके बाद पीएम मोदी मेलोडी टॉफी का पैकेट कैमरे की तरफ दिखाते हैं.
भारतीय कंपनी बनाती है मेलोडी टॉफी
मेलोडी टॉफी को भारतीय कंपनी पारले बनाती है. यह टॉफी एक रुपए की एक मिलती है. यह टॉफी बहुत ही चॉकलेटी है, यानी इसमें चॉकलेट का फ्लेवर बहुत ज्यादा है. बावजूद इसके यह टॉफी बहुत सस्ती है. इस टॉफी को बनाने वाली कंपनी पूरी तरह भारतीय हैं और उसके प्रोडक्ट्स काफी चर्चित हैं. भारतीय बाजारों में इनकी अच्छी पहुंच भी है. पारले जी बिस्किट उनमें से एक है.कंपनी की शुरुआत 1929 में मुंबई के विले पार्ले इलाके में हुई थी, जिसकी वजह से कंपनी को पारले नाम दिया गया था.
ट्रेंड कर रहा है पारले
जॉर्जिया मेलोनी के वीडियो शेयर करते ही पारले कंपनी सोशल मीडिया में ट्रेंड करने लगा है. सब यह जानना चाहते हैं कि आखिर पीएम मोदी ने जो मेलोडी टॉफी पीएम मेलोनी को शेयर की है, उसकी खासियत क्या है? साथ ही सब यह भी जानना चाह रहे हैं कि आखिर पीएम मोदी ने यह टॉफी क्यों शेयर की है.
पीएम मोदी ने दिया स्वदेशी का नारा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पीएम मेलोनी को मेलोडी टॉफी गिफ्ट करके स्वदेशी के नारे को बुलंद कर रहे हैं. कुछ समय पहले ही प्रधानमंत्री ने यह कहा था कि अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए स्वदेशी चीजों को प्रमोट करना जरूरी है.
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By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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