ई-फार्मेसी ऑपरेशन और भारी डिस्काउंट के विरोध में 20 मई को देशभर में दवा दुकानें बंद
Published by : Rajneesh Anand Updated At : 20 May 2026 12:03 PM
देशभर में दवा दुकानें बंद
AIOCD : देश भर में दवा दुकानें बंद हैं, जिसकी वजह मरीजों को 24 घंटे तक दवाइयां नहीं मिलेंगी. दवाओं की ऑनलाइन ब्रिकी के विरोध में दवा विक्रेताओं ने हड़ताल की है.
AIOCD : ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) के आह्ववान पर बुधवार को देश भर में दवा दुकानें बंद रहेंगी, जिसकी वजह से मरीजों को 24 घंटे तक दवाएं नहीं मिलेंगी. AIOCD ने 24 घंटे की यह हड़ताल ई-फार्मेसी ऑपरेशन, भारी डिस्काउंट और डॉक्टर की लिखी दवाओं की बिना वेरिफ़ाई की ऑनलाइन बिक्री के विरोध में की है. इस हड़ताल की वजह से देशभर में मेडिकल दुकानें और फार्मेसी बंद हैं.
दवा विक्रेताओं की हड़ताल का असर
दवा विक्रेताओं की हड़ताल का असर पूरे देश में दिख रहा है. देश के लगभग सभी शहरों में ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स के आह्वान पर दवा दुकानें बंद हैं. दवा दुकानों के बंद रहने की वजह से मरीजों को परेशानी हो रही है.
तेलंगाना में पब्लिक एडवाइजरी जारी
ड्रग्स कंट्रोल एडमिनिस्ट्रेशन (DCA) ने तेलंगाना में मंगलवार को एक पब्लिक एडवाइजरी जारी की ताकि बुधवार को ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) द्वारा बुलाए गए एक दिन के देशव्यापी बंद के दौरान दवाओं की बिना रुकावट उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके. DCA के मुताबिक, मरीजों के हितों की रक्षा करने और पूरे राज्य में जरूरी दवाओं तक पहुंच में रुकावट से बचने के लिए AIOCD के तेलंगाना चैप्टर के साथ एक मीटिंग की गई. एडवाइजरी के मुताबिक, इमरजेंसी और रेगुलर मेडिकल जरूरतों को पूरा करने के लिए अस्पतालों से जुड़े फार्मेसी स्टोर बंद के दौरान चालू रहेंगे. AIOCD के डिस्ट्रिक्ट चैप्टर को भी इमरजेंसी में लोकल मेडिकल स्टोर से दवाइयों की उपलब्धता पक्का करने के लिए ड्रग इंस्पेक्टर के साथ मिलकर काम करने का निर्देश दिया गया है.
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By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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