रोहिणी नक्षत्र से पहले धान की तैयारी में जुटे किसान, बिचड़ा डालने की तैयारी तेज, पोर्टल बंद रहने से ऑनलाइन आवेदन अटका

Author : Karuna Tiwari Published by : karunatiwari Updated At : 20 May 2026 1:28 PM

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खेत की तस्वीर

Arwal News: (निशिकांत की रिपोर्ट) 25 मई से रोहिणी नक्षत्र की शुरुआत होगी, जो आठ जून तक रहेगा. रोहिणी नक्षत्र को धान की खेती के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है.

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Arwal News: (निशिकांत की रिपोर्ट) 25 मई से रोहिणी नक्षत्र की शुरुआत होगी, जो आठ जून तक रहेगा. रोहिणी नक्षत्र को धान की खेती के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. जिले के किसान धान का बिचड़ा डालने की तैयारी में जुट गये हैं. लेकिन, मौसम साथ नहीं दे रहा है. साधन संपन्न किसान “आगे खेती, आगे-पीछे खेती भागे” कहावत के तर्ज पर खेतों की तैयारी कर रहे हैं. किसान खेतों में सिंचाई कर रहे हैं. पानी सूखने के बाद खेतों में गोबर डालकर जुताई की जायेगी. इसके बाद दोबारा सिंचाई कर पानी में जुताई की जायेगी.

रोहिणी नक्षत्र में बिचड़ा बेहतर, रोग लगने की संभावना कम

किसानों का मानना है कि रोहिणी नक्षत्र में तैयार किया गया बिचड़ा तेजी से बढ़ता है और उसमें रोग लगने की संभावना भी कम रहती है. किसानों ने बताया कि इस नक्षत्र में धान का बीज तैयार करने से रोपनी समय से शुरू हो जाती है. खेती-किसानी में नक्षत्र का विशेष महत्व माना जाता है और रोहिणी नक्षत्र किसानों के लिए किसी उत्सव से कम नहीं होता.

140 से 160 दिन वाली धान प्रजातियों की बुआई उपयुक्त

15 दिनों की यह अवधि धान का बिचड़ा लगाने के लिए काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है. किसान रमेश सिंह, सुदर्शन शर्मा और अंजनी सिंह ने बताया कि 25 मई से आठ जून तक रोहिणी नक्षत्र रहेगा. इस दौरान 140 से 160 दिन अवधि वाले धान प्रभेद का बीज खेतों में डाला जा सकता है. उन्होंने कहा कि रोहिणी नक्षत्र में बोये गये बिचड़ा से उपज बेहतर होती है और रोपनी समयानुसार हो जाती है. अनुमंडल कृषि पदाधिकारी मनीष कुमार ने बताया कि जल जमाव वाली जमीन के लिए लंबी अवधि वाले धान प्रभेद उपयुक्त माने जाते हैं. आमतौर पर किसान रोहिणी नक्षत्र में ही लंबी अवधि वाले धान का बिचड़ा डालते हैं.

खेत में सड़ा गोबर व वर्मी कंपोस्ट डालने की दी गयी सलाह

किसान सुनील कुमार, विजय सिंह, गुप्तेश्वर सिंह व सत्यप्रकाश सिंह ने बताया कि जिस खेत में नर्सरी डालनी हो, उसमें सड़ा हुआ गोबर व वर्मी कंपोस्ट अवश्य डालना चाहिए. इससे नर्सरी उखाड़ने में आसानी होती है और पौधे टूटने का डर कम रहता है. उन्होंने बताया कि लंबी अवधि वाली धान प्रजातियों की नर्सरी मई तक डाल देनी चाहिए, क्योंकि यह 130 से 150 दिनों में तैयार होती है. 25 जून तक मानसून आने पर यह रोपाई के लिए तैयार हो जायेगी. वहीं छोटी अवधि वाली प्रजातियों की नर्सरी 28 मई से आठ जून के बीच डालनी चाहिए. इधर, कृषि विभाग का पोर्टल नहीं खुलने के कारण धान बिचड़ा के लिए किसानों का ऑनलाइन आवेदन अभी शुरू नहीं हो सका है. पहले सूचना दी गयी थी कि 15 मई से ऑनलाइन प्रक्रिया शुरू होगी, लेकिन अब तक पोर्टल नहीं खुलने से किसान बीज के लिए आवेदन नहीं कर पा रहे हैं.

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By Karuna Tiwari

करुणा तिवारी पत्रकारिता में अपने करियर की शुरुआत Doordarshan Bihar के साथ की. 8 वर्षों तक टीवी और डिजिटल माध्यम में सक्रिय रहने के बाद, वर्तमान में वह प्रभात खबर डिजिटल, बिहार टीम के साथ कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें बिहार की राजनीति, ग्राउंड रिपोर्टिंग और सामाजिक मुद्दों में विशेष रुचि है. अपने काम के प्रति समर्पित करुणा हर दिन कुछ नया सीखने और बेहतर करने की कोशिश करती हैं.

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