अरवल सिविल सर्जन पर हमला के विरोध में 22 जुलाई को बिहार भर में बंद रहेगा ओपीडी, जानिए पूरी डिटेल्स

Author Nishikant kumr|Edited by Nikhil Anurag
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प्रेस वार्ता में जानकारी देते भाषा कि टीम | Prabhat Khabar Network

प्रेस वार्ता में जानकारी देते (BHSA) की टीम

Doctor protest OPD closure: बिहार में स्वास्थ्य सेवाएं ठप हो सकती हैं. सिविल सर्जन के साथ मारपीट की घटना के विरोध में स्वास्थ्य सेवा संघ ने ओपीडी सेवा बंद रखने का फैसला किया है. जानिए क्या हैं डॉक्टरों की मांगें और आगे क्या हो सकता है.

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Doctor protest OPD closure: सिविल सर्जन के साथ हुई मारपीट की घटना के विरोध में बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ (BHSA) ने बुधवार को पूरे बिहार में ओपीडी सेवा बंद रखने का निर्णय लिया है. भाषा के महासचिव डॉ. रोहित कुमार ने कहा कि जिला प्रशासन को 72 घंटे का समय दिया गया था, लेकिन अब तक चिकित्सकों की एक भी मांग पूरी नहीं हुई है.

गौरतलब है कि पिछले शुक्रवार को सदर अस्पताल में सदर प्रखंड के फखरपुर गांव निवासी रागिनी कुमारी की सिजेरियन ऑपरेशन के दौरान मौत हो गई थी. इसके बाद परिजनों ने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया था. इस दौरान सिविल सर्जन के साथ मारपीट की घटना भी हुई थी.

12 लोगों पर दर्ज हुई थी प्राथमिकी

घटना के बाद अस्पताल प्रशासन ने पुलिस को आवेदन देकर पूर्व विधायक महानंद सिंह समेत 12 लोगों के खिलाफ सदर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई थी. चिकित्सकों ने हंगामा करने वालों की गिरफ्तारी, सिविल सर्जन को अंगरक्षक उपलब्ध कराने, सदर अस्पताल में टीओपी की स्थापना और अस्पताल में मानव बल बढ़ाने की मांग जिला प्रशासन के समक्ष रखी थी.

घटना के चार दिन बीत जाने के बावजूद मांगें पूरी नहीं होने पर बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ की टीम सिविल सर्जन कार्यालय पहुंची और चिकित्सकों के साथ बैठक की.

मांगें पूरी नहीं हुईं तो होगा बड़ा आंदोलन

बैठक के बाद भाषा के महासचिव डॉ. रोहित कुमार ने कहा कि सिविल सर्जन के साथ हुई मारपीट की घटना चिकित्सकों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला है. इसके विरोध में बुधवार को पूरे बिहार में ओपीडी सेवा ठप रखने का निर्णय लिया गया है. उन्होंने कहा कि यदि सरकार चिकित्सकों की मांगों को जल्द पूरा नहीं करती है, तो इसके बाद और अधिक धारदार आंदोलन किया जाएगा.

बैठक में शामिल हुए जिले के चिकित्सक

सिविल सर्जन कार्यालय में आयोजित बैठक में भाषा के उपाध्यक्ष डॉ. अविनाश कुमार, प्रवक्ता डॉ. विनय कुमार, डॉ. अरविंद कुमार, डॉ. राव बिजेंद्र सिंह, सिविल सर्जन डॉ. राज किशोर प्रसाद, डॉ. रमन आर्यभट्ट, डॉ. उमेश प्रसाद समेत जिले के सभी चिकित्सक उपस्थित रहे.

चिकित्सकों ने एक स्वर में कहा कि अस्पतालों में कार्यरत डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है तथा इस दिशा में ठोस कदम उठाए जाने चाहिए.


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