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प्रशांत किशोर को पंजाब के मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार के पद पर नियुक्ति के खिलाफ दाखिल याचिका खारिज

Updated at : 17 Mar 2021 1:22 PM (IST)
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प्रशांत किशोर को पंजाब के मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार के पद पर नियुक्ति के खिलाफ दाखिल याचिका खारिज

Prashant Kishor, Captain Amarinder Singh, Principal Advisor, Punjab and Haryana High Court : चंडीगढ़ : पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह द्वारा चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर को प्रधान सलाहकार बनाये जाने के खिलाफ नियुक्ति को चुनौती देने के मामले में पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा है कि मुख्यमंत्री को अपना सलाहकार चुनने का पूरा अधिकार है.

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चंडीगढ़ : पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह द्वारा चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर को प्रधान सलाहकार बनाये जाने के खिलाफ नियुक्ति को चुनौती देने के मामले में पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा है कि मुख्यमंत्री को अपना सलाहकार चुनने का पूरा अधिकार है.

याचिकाकर्ता लाभ सिंह और सतिंदर सिंह ने प्रशांत किशोर को मुख्यमंत्री का प्रधान सलाहकार प्रधान सलाहकार बनाये जाने के खिलाफ सर्टिफिकेट की प्रकृति के आधार पर नियुक्ति रद्द करने की मांग करते हुए एक मार्च, 2021 को याचिका दाखिल की थी.

याचिका में कहा गया है कि बिना विज्ञापन निकाले, मानदंड तय करने के बावजूद बिना साक्षात्कार आयोजित किये प्रधान सलाहकार के पद पर नियुक्ति कर दी गयी है. मालूम हो कि लाभ सिंह खन्ना के बॉक्सिंग के कोच हैं. वहीं, सतिंदर सिंह अधिवक्ता होने के साथ-साथ चंडीगढ़ के निगम पार्षद हैं.

साथ ही कहा गया है कि संविधान के अनुच्छेद 16(1) का पालन किये बिना राज्य के अधीन किसी भी कार्यालय में नियुक्ति नहीं की जा सकती है. यह राज्य के किसी भी कार्यालय में रोजगार या नियुक्ति से संबंधित मामलों में सभी नागरिकों को समानता का अवसर प्रदान करता है.

याचिका में है कि प्रशांत किशोर को कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया जायेगा. साथ ही भत्तों के साथ अन्य सुविधाएं दी जायेंगी. इसलिए विज्ञापन जारी करना जरूरी था. क्योंकि, पंजाब में बड़ी संख्या में शिक्षित और योग्य व्यक्ति हैं.

पीठ ने कहा कि मुख्यमंत्री का सलाहकार कोई पद नहीं है. एक कार्यालय है, जो वैधानिक नियमों द्वारा विनयमित नहीं है. इसलिए विज्ञापन का तर्क देना पूरी तरह से गलत है. यह नियुक्ति सिविल नहीं है. केवल पद और रैंक के उद्देश्य से होने के कारण संविधान के अनुच्छेद 16(1) के अंतर्गत नहीं आता है.

अदालत ने दलील दी कि सेवा मामलों में कोई जनहित याचिका सुनवाई योग्य नहीं होती. साथ ही अदालत ने कहा कि वर्तमान मामले में किसी भी वैधानिक प्रावधान का उल्लंघन नहीं किया गया है, इसलिए याचिका खारिज की जाती है.

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