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ट्रेनों से सेना की आवाजाही की जानकारी जुटा रहे थे पाकिस्तान उच्चायोग के अधिकारी, जांच में हुआ खुलासा

Updated at : 02 Jun 2020 9:23 AM (IST)
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ट्रेनों से सेना की आवाजाही की जानकारी जुटा रहे थे पाकिस्तान उच्चायोग के अधिकारी, जांच में हुआ खुलासा

जासूसी के आरोप में पकड़े गए पाकिस्तानी उच्चायोग के अधिकारियों (विजा सहायक) के पास से बरामद दस्तावेज से कई खुलासे हुए हैं. खुफिया एजेंसियों के इनपुट पर नयी दिल्ली स्थित पाकिस्तान हाई कमिशन में कार्यरत इन दोनों को रविवार को पकड़ा गया था. सोमवार को अटारी-वाघा सीमा से दोनों को पाकिस्तान रवाना कर दिया गया.

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जासूसी के आरोप में पकड़े गए पाकिस्तानी उच्चायोग के अधिकारियों (विजा सहायक) के पास से बरामद दस्तावेज से कई खुलासे हुए हैं. खुफिया एजेंसियों के इनपुट पर नयी दिल्ली स्थित पाकिस्तान हाई कमिशन में कार्यरत इन दोनों को रविवार को पकड़ा गया था. सोमवार को अटारी-वाघा सीमा से दोनों भारत छोड़ पाकिस्तान रवाना हो गए.

Also Read: जासूसों को भारत से निकाला गया, बौखलाया पाक कर सकता है बदले की कार्रवाई

अबिद हुसैन और मुहम्मद ताहिर को रविवार को सैन्य खुफिया के स्पेशल सेल और आईबी टीम द्वारा एक भारतीय से भारतीय सुरक्षा प्रतिष्ठान के दस्तावेज प्राप्त करते हुए और उसे पैसे और एक आईफोन सौंपते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया था. टीओआई ने पुलिस सूत्रों के हवाले से लिखा है कि दोनों अधिकारी ट्रेनों से सेना की यूनिट्स की आवाजाही के बारे में जानकारी जमा कर रहे थे.

पुलिस के मुताबिक, दोनों से पूछताछ में पता चला कि आबिद हुसैन कई फर्जी आईडी के माध्यम से काम करता है. वह अलग-अलग संगठनों और विभागों के लोगों को लालच देता था. हाल ही में उसने भारतीय रेलवे में काम करने वाले एक व्यक्ति से संपर्क के लिए खुद को मीडियाकर्मी का भाई गौतम बताया था.

दर्ज एफआईआर के मुताबिक, आबिद और ताहिर पाकिस्तान में बैठे आईएसआई के मेंटर के इशारे पर इंडियन रेलवे और आर्म्ड फोर्सेस में पैसे के दम पर घुसपैठ करने की कोशिश में जुटे थे. आबिद ने कई फर्जी पहचान पत्रों के जरिए विभिन्न विभागों में काम करने वाले लोगों को लुभाने का काम किया था.

टीओई ने दिल्ली पुलिस के अडिशनल पीआरओ अनिल मित्तल के हवाले से लिखा है कि आबिद हुसैन ने रेलवे कर्मचारी से यह कहा था कि उसका भाई रेलवे पर एक खबर कर रहा है जिसके लिए उसे ट्रेनों की आवाजाही के बारे में सूचना चाहिए. पुलिस ने बताया कि वह रेल कर्मचारी को लालच देकर उसे जाल में फंसाना चाहता था और फिर ट्रेनों के जरिए सेना की इकाइयों और साजो-सामान की आवाजाही के बारे में संवेदनशील जानकारी हासिल करना था.

2016 में भी हुआ था जासूसी गिरोह का भंडाफोड़

गौरतलब है कि दिल्ली पुलिस ने 2016 में एक जासूसी गिरोह का भंडाफोड़ किया था जिसमें पाकिस्तान उच्चायोग का कर्मचारी महमूद अख्तर शामिल था. वह भारत-पाकिस्तान सीमा पर बीएसएफ की तैनाती के बारे में सूचना हासिल करने में लगा था. भारत ने जासूसी करने के आरोप में उसे देश से निकाल दिया था.

Posted by: Utpal kant

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