देश में कच्चे तेल की कोई कमी नहीं, पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा- मांग के अनुसार पर्याप्त भंडार
सुजाता शर्मा, संयुक्त सचिव पेट्रोलियम मंत्रालय
Gas Shortage : ईरान युद्ध की वजह से देश में कच्चे तेल की कमी हो सकती है, जिसकी वजह से रसोई गैस, पेट्रोल और डीजल की कमी हो सकती है और इनकी कीमत आसमान को छू सकती है. इन आशंकाओं की वजह से देश में रसोई गैस एजेंसियों के बाहर लंबी लाइन लगी है. अफरा-तफरी का आलम यह है कि लोग मारपीट पर उतारू नजर आ रहे हैं और सोशल मीडिया पर Gas Shortage ट्रेंड कर रहा है.
Gas Shortage : होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे समुद्री मार्ग से कच्चे तेल की आपूर्ति बंद होने की आशंकाओं के बीच सरकार की ओर से यह बयान सामने आया है कि देश में कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित नहीं है. पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने मीडिया को बताया कि कच्चे तेल की आपूर्ति होर्मुज जलडमरूमध्य के अलावा अन्य मार्गों से की जा रही है. उन्होंने कहा कि हमारी गैस कंपनियों ने नये सोर्स से LNG कार्गो (प्राकृतिक गैस, खासकर मीथेन) खरीदे हैं. दो LNG कार्गो भारत आ रहे हैं, जिसकी जो डिमांड को पूरा करने में सहयोग करेंगे.
मांग के अनुसार अभी तेल की सप्लाई सुरक्षित
प्रेस ब्रीफिंग में सुजाता शर्मा ने कहा कि देश के पास अभी हर दिन लगभग 55 लाख बैरल क्रूड ऑयल है. यह सामान्य स्थिति से बेहतर आंकड़ा है. उन्होंने बताया कि सरकार और तेल कंपनियों ने सप्लाई सोर्स को बढ़ाने का काम किया है और अन्य सोर्स से भी एलएनजी कार्गो खरीदे हैं, ताकि एनर्जी इंपोर्ट बिना किसी रुकावट के जारी रहे. अभी भारत के पास क्रूड ऑयल सप्लाई सुरक्षित बनी हुई है. उन्होंने यह भी बताया कि अभी देश की डिमांड को पूरा करने के लिए पर्याप्त तेल की सप्लाई मौजूद है. सरकार ने यह भरोसा तब दिखाया है जब पश्चिम एशिया में युद्ध की वजह से समुद्री मार्ग बाधित है और कभी भी सप्लाई बाधित हो सकता है.
आम आदमी को रसोई गैस की कमी नहीं होने देगी सरकार
संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि सरकार यह हरसंभव कोशिश कर रही है कि आम आदमी को रसोई गैस की कोई कमी ना हो. इसी वजह से अभी LPG घरेलू इस्तेमाल के लिए दिया जा रहा है. नॉन-डोमेस्टिक LPG के लिए हॉस्पिटल और एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन जैसे जरूरी सेक्टर को प्रायोरिटी दी जा रही है.
ये भी पढ़ें : पीएम मोदी ने समझौता कर लिया है, इस मुद्दे पर लोकसभा में राहुल गांधी और रविशंकर के बीच तीखी बहस
क्या जिंदा हैं ईरानी सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई? इस सवाल के पीछे की 3 बड़ी वजह
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










