12 को बनाए गए थे सीएम विजय के ओएसडी, 13 मई को विवाद के बाद रिकी राधन पंडित की नियुक्ति रद्द

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रिकी राधन पंडित

Radhan Pandit : तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय के करीबी और उनके ज्योतिष रहे रिकी राधन पंडित वेट्रिवेल की नियुक्ति सीएम के ओएसडी पद पर किए जाने के बाद विवाद खड़ा हो गया. बुधवार को यह मामला विधानसभा में भी गूंजा, जिसके बाद राधन पंडित की नियुक्ति को रद्द कर दिया गया है.

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Radhan Pandit : टीवीके के प्रवक्ता और प्रसिद्ध ज्योतिष राधन पंडित की तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय के ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी (OSD) के तौर पर नियुक्ति रद्द कर दी गई है. यह आदेश प्रिंसिपल सेक्रेटरी रीता हरीश ठक्कर ने जारी किया है. ओएसडी के तौर पर राधन पंडित की नियुक्ति को रद्द करने का आदेश 13 मई को जारी किया गया है, जबकि उनकी नियुक्ति महज एक दिन पहले ही हुई थी.

ओएसडी पद पर नियुक्ति के बाद हुआ विवाद

राधन पंडित जिनका पूरा नाम रिकी राधन पंडित वेट्रिवेल है, उनके बारे में यह कहा जाता है कि उन्होंने यह भविष्यवाणी की थी कि विजय सीएम बनेंगे. उन्होंने विजय की कुंडली को सुनामी बताया था. उन्होंने विजय के राजनीतिक सफर को दिशा देने में अहम भूमिका निभाई थी, इसी वजह से उन्हें ओएसडी के तौर पर नियुक्त किया गया था. उनकी नियुक्ति के बाद विवाद खड़ा हो गया था क्योंकि वे ज्योतिष हैं. डीएमके ने इस अहम पद पर राधन पंडित की नियुक्ति की निंदा की थी. अन्य कई पार्टियों ने भी इस कदम की निंदा की थी. आज विधानसभा में भी यह मुद्दा उठा और डीएमके की सहयोगी देसिया मुरपोक्कू द्रविड़ कझगम की विधायक प्रेमलता विजयकांत ने ज्योतिषी को ओएसडी बनाए जाने पर सवाल उठाए और कहा कि विजय उन्हें पर्सनल सेक्रेटरी अपॉइंट कर सकते थे, जिसके बाद राधन पंडित की नियुक्ति को रद्द कर दिया गया है.

कौन हैं राधन पंडित?

रिकी राधन पंडित वेट्रिवेल एक प्रसिद्ध ज्योतिष हैं. उन्होंने जयललिता जैसी शख्सियत को अपनी सलाह दी है. उनके अलावा भी कई राजनेताओं ने राधन पंडित से सलाह ली है. जयललिता के साथ इनका विवाद हो गया था. इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार राधन पंडित ने जयललिता से यह कहा था कि वो जेल नहीं जाएंगी, लेकिन जयललिता को जेल जाना पड़ा था, जिसके बाद इनके संबंध खराब हो गए थे. विवाद के बाद राधन पंडित सिंगापुर चले गए थे. उनके सिंगापुर से लौटने के बाद विजय से उनकी मुलाकात कराई गई थी.

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रजनीश आनंद

लेखक के बारे में

By रजनीश आनंद

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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