Nirbhaya Case : जुलाई, 2021 तक क्यूरेटिव और दया याचिका दाखिल करना चाहता है दोषी मुकेश

निर्भया गैंगरेप मामले में दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने गुरुवार को एक बार फिर चारों दोषियों को फांसी पर लटकाये जाने का नया डेथ वारंट जारी किया है. उसके एक दिन बाद इन चारों दोषियों में से एक मुकेश सिंह ने सुप्रीम कोर्ट से अपने अधिकार के तहत एक बार फिर जुलाई, 2021 तक क्यूरेटिव और दया याचिका दाखिल करने की अनुमति देने की इच्छा जाहिर की है.
नयी दिल्ली : निर्भया गैंगरेप मामले में फांसी की सजा पाये चारों दोषियों में से एक मुकेश सिंह जुलाई, 2021 तक क्यूरेटिव और दया याचिका दाखिल करने की अनुमति चाहता है. फांसी की सजा पाये चारों दोषियों में से एक मुकेश सिंह ने दावा किया है कि उपचारात्मक और दया याचिकाओं पर हस्ताक्षर करने के लिए कोर्ट द्वारा नियुक्त कानूनी सलाहकार वृंदा ग्रोवर ने मजबूर किया. उसने दावा किया है कि है कि वृंदा ग्रोवर ने झूठे तरीके से उसे जानकारी दी कि अदालती आदेशों के तहत उसे सात जनवरी को डेथ वारंट जारी होने सात दिनों के अंदर एक क्यूरेटिव याचिका दाखिल करनी थी.
अंग्रेजी की पत्रिका इंडिया टूडे की वेबसाइट पर शुक्रवार को प्रकाशित खबर के अनुसार, अधिवक्ता एमएल शर्मा के माध्यम से दायर याचिका में मुकेश सिंह ने दया याचिका दायर करने की तारीख से तीन साल पहले क्यूरेटिव पिटीशन दाखिल करने की सीमा अवधि का दावा किया है. उसकी रिव्यू पिटीशन को सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई, 2018 में ही खारिज कर दिया था. अब मुकेश सिंह कोर्ट से कह रहा है कि उसे उपलब्ध अधिकारों को बहाल करने के लिए और उसे जुलाई, 2021 क्यूरेटिव पिटीशन और दया याचिका दायर करने की अनुमति दी जाए.
खबर के अनुसार, मुकेश सिंह के परिवार ने पहले एमएल शर्मा को अपने वकील के रूप में हटा दिया था, लेकिन गुरुवार को जब वे वकालतनामा के साथ पटियाला हाउस कोर्ट में पेश हुए, तो उन्हें दोबारा अपना वकील नियुक्त कर लिया. गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही के दौरान वकील शर्मा ने वृंदा ग्रोवर के खिलाफ तर्क दिया, लेकिन अदालत ने उनके खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी नहीं करने की चेतावनी दी. गुरुवार को दिल्ली की एक अदालत ने मुकेश सिंह समेत निर्भया कांड के चारों दोषियों के लिए नया डेथ वारंट जारी किया है और उन्हें 20 मार्च को उन्हें फांसी देने की तारीख मुकर्रर की है.
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By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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