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भारत में इलाज कराना भी महंगा : आमदनी का 10-25% खर्च कर रहे 9 करोड़ लोग, जीवन-यापन में आ रही दिक्कतें

Updated at : 01 Jul 2023 7:11 PM (IST)
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भारत में इलाज कराना भी महंगा : आमदनी का 10-25% खर्च कर रहे 9 करोड़ लोग, जीवन-यापन में आ रही दिक्कतें

सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) राष्ट्रीय संकेतक ढांचा प्रगति रिपोर्ट 2023 के अनुसार, भारतीय परिवारों में रहने वाले कुल 31 करोड़ लोग स्वास्थ्य देखभाल पर अपने घरेलू खर्च का एक चौथाई से अधिक खर्च करते हैं.

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नई दिल्ली : भारत में आम आदमी को इलाज कराना भी महंगा हो गया है. आलम यह है कि भारत के नौ करोड़ से अधिक लोग अपने और अपने परिवार के इलाज पर अपने घरेलू खर्च का करीब 10 से 25 फीसदी तक खर्च कर देते हैं, जिससे उनके जीवन-यापन में कठिनाइयां आ रही हैं. मीडिया की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में स्वास्थ्य देखभाल पर होने वाला खर्च उस खतरनाक स्तर को पार कर गया है, जहां से आम आदमी का जीवन-यापन करना दुभर हो गया है.

घरेलू खर्च का एक चौथाई स्वास्थ्य देखभाल पर खर्च

सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) राष्ट्रीय संकेतक ढांचा प्रगति रिपोर्ट 2023 के अनुसार, भारतीय परिवारों में रहने वाले कुल 31 करोड़ लोग स्वास्थ्य देखभाल पर अपने घरेलू खर्च का एक चौथाई से अधिक खर्च करते हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि स्वास्थ्य देखभाल पर अपने खर्च का 10-25 फीसदी खर्च करने वाले परिवारों का अनुपात 2017-18 और 2022-23 के बीच काफी बढ़ गया है.

केरल में सबसे अधिक खर्च

रिपोर्ट में पाया गया कि स्वास्थ्य देखभाल पर 10 फीसदी से अधिक खर्च करने वाले परिवारों की संख्या 4.5 फीसदी से बढ़कर 6.7 फीसदी हो गई है. इसी तरह, स्वास्थ्य देखभाल पर अपने खर्च का 25 फीसदी से अधिक खर्च करने वाले परिवार 1.6 फीसदी से बढ़कर 2.3 फीसदी हो गए हैं. कई राज्यों में 2022-23 में स्वास्थ्य देखभाल खर्च का अधिकतम अनुपात केरल में दर्ज किया गया है, जहां लगभग 16 फीसदी परिवारों ने अपने व्यय का 10 फीसदी से अधिक खर्च किया और उनमें से 6 फीसदी ने 25 फीसदी से भी अधिक खर्च किया. अन्य राज्य जिन्होंने स्वास्थ्य देखभाल व्यय में इतनी महत्वपूर्ण वृद्धि दर्ज की है, उनमें महाराष्ट्र, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, ओडिशा और तेलंगाना शामिल हैं.

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40 करोड़ भारतीयों के पास वित्तीय सुरक्षा का अभाव

नीति आयोग की जून 2021 की रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 40 करोड़ भारतीयों (जनसंख्या का 30 फीसदी) के पास स्वास्थ्य के लिए किसी भी वित्तीय सुरक्षा का अभाव है, जिसके कारण उनकी जेब से खर्च अधिक होता है. रिपोर्ट में यह भी अनुमान लगाया गया है कि पीएमजेएवाई योजना में मौजूदा कवरेज अंतराल के परिणामस्वरूप कवर नहीं की गई आबादी के कारण वास्तविक संख्या अधिक होने की संभावना है.

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