सुप्रीम कोर्ट का फैसला- 15 दिनों में घर भेजे जाएं प्रवासी मजदूर, 24 घंटे में ट्रेन दे केंद्र

प्रवासी मजदूरों (migrants worker) को 15 दिन के भीतर पैतृक स्थान भेजने का केंद्र और राज्य सरकारों को निर्देश सुप्रीम कोर्ट (supreme court) ने दिया है. कोर्ट ने केंद्र और राज्यों को निर्देश दिया कि कोविड-19 की वजह से पलायन करने वाले कामगारों को 15 दिन के भीतर उनके पैतृक स्थान पहुंचाया जाये और इनके पुनर्वास के लिये इनकी कौशल क्षमता का आकलन करने के बाद रोजगार की योजनाएं तैयार की जायें.
प्रवासी मजदूरों को 15 दिन के भीतर पैतृक स्थान भेजने का केंद्र और राज्य सरकारों को निर्देश सुप्रीम कोर्ट ने दिया है. कोर्ट ने केंद्र और राज्यों को निर्देश दिया कि कोविड-19 की वजह से पलायन करने वाले कामगारों को 15 दिन के भीतर उनके पैतृक स्थान पहुंचाया जाये और इनके पुनर्वास के लिये इनकी कौशल क्षमता का आकलन करने के बाद रोजगार की योजनाएं तैयार की जायें.
न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति एम आर शाह की पीठ ने लॉकडाउन के दौरान पलायन कर रहे कामगारों की दयनीय स्थिति का स्वत: संज्ञान लिये गये मामले में वीडियो कांफ्रेन्सिंग के जरिये अपने फैसले में विस्तृत निर्देश दिये. पीठ ने केंद्र को निर्देश दिया कि इन श्रमिकों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिये अतिरिक्त रेलगाड़ियों की मांग किये जाने पर 24 घंटे के भीतर राज्यों को ट्रेनें उपलब्ध करायी जायें.
कोर्ट ने लॉकडाउन के नियमों का उल्लंघन करने के आरोपों में इन कामगारों के खिलाफ आपदा प्रबंधन कानून के तहत दर्ज शिकायतें वापस लेने पर विचार करने का भी संबंधित प्राधिकारियों को निर्देश दिया. पीठ ने प्राधिकारियों को उन कामगारों की पहचान करने का निर्देश दिया जो अपने पैतृक स्थान लौटना चाहते हैं और उन्हें भेजने सहित सारी कवायद मंगलवार से 15 दिन के भीतर पूरी की जाये.
पीठ ने इस मामले को जुलाई में सुनवाई के लिये सूचीबद्ध करते हुए कहा कि इन कामगारों के कल्याण और रोजगार की योजनाओं का समुचित प्रचार प्रसार किया जाना चाहिए. शीर्ष अदालत ने कोरोना वायरस महामारी के कारण देश में लागू लॉगडाउन के दौरान अपने अपने पैतृक स्थानों की ओर जा रहे कामगारों की दुर्दशा का स्वत: संज्ञान लिया था. कोर्ट ने मामले में पांच जून को केंद्र और राज्य सरकारों का पक्ष सुनने के बाद कहा था कि इस पर नौ जून को आदेश सुनाया जायेगा.
आपको बता दें कि लॉकडाउन-1 से लेकर लॉकडाउन-4 तक की घोषणा केंद्र सरकार की ओर से की गयी थी जिसके बाद अब अनलॉक का दौर देश में चल रहा है. अनलॉक 1 के तहत देश में बंद पड़े कई संस्थानों को खोलने का काम किया गया. लॉकडाउन से अनलॉक के दौरान ऐसा नहीं रहा कि कोरोना वायरस के मामले घटे बल्कि कोरोना केस में और इजाफा हुआ.
Posted By: Amitabh Kumar
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