Mewar Royal Family Dispute: क्या है मेवाड़ राजपरिवार का विवाद? विश्वराज सिंह को मिली धूनी दर्शन की अनुमति

Published by : ArbindKumar Mishra Updated At : 27 Nov 2024 9:10 PM

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Ajmer Sharif Dargah

Mewar Royal Family Dispute: मेवाड़ के 77वें महाराणा विश्वराज सिंह मेवाड़ को भारी विवाद के बाद बुधवार को पांच लोगों के साथ महल के अंदर धूनी दर्शन की अनुमति मिल गई.

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Mewar Royal Family Dispute: मेवाड़ राजपरिवार विवाद के बीच विश्वराज सिंह मेवाड़ समेत 5 लोगों को महल के अंदर धूनी दर्शन की अनुमति दी गई. दर्शन के बाद राज्याभिषेक की प्रक्रिया पूरी हो गई. धूनी दर्शन के बाद मेवाड़ के नव-महाराणा विश्वराज सिंह मेवाड़ ने कहा, एक तरफ हम दर्शन से संतुष्ट हैं, वहीं दूसरी तरफ हम सोच रहे हैं कि अगर हम यह सब बिना किसी परेशानी के कर लेते तो बेहतर होता. कानूनी कार्यवाही चल रही है. मैं समर्थकों का शुक्रगुजार हूं और मैंने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है.

Mewar Royal Family Dispute: महाराणा विश्वराज सिंह मेवाड़ को सिटी पैलेस में धूनी दर्शन के लिए नहीं मिली थी इजाजत

राजसमंद से भाजपा विधायक और मेवाड़ के नव-विरासित महाराणा विश्वराज सिंह मेवाड़ और उनके समर्थकों को महल में प्रवेश करने से रोक दिया गया था. जिसके बाद सिटी पैलेस के बाहर विश्वराज अपने समर्थकों के साथ डेरा डाल दिया था. विश्वराज सिंह के समर्थकों का सिटी पैलेस के प्रतिनिधियों के साथ झड़प और बाद में पथराव भी हुआ था. इस बीच जिला प्रशासन लगातार स्थिति को कंट्रोल में करने की कोशिश कर रहा था.

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विश्वराज सिंह मेवाड़ का चचेरे भाई लक्ष्य और चाचा अरविंद से गतिरोध

मेवाड़ के 77वें महाराणा विश्वराज सिंह मेवाड़ का राज्याभिषेक के बाद अपने चचेरे भाई डॉ लक्ष्य राज सिंह मेवाड़ और चाचा अरविंद सिंह मेवाड़ के साथ गतिरोध हुआ.

खून से राजतिलक की अनोखी परंपरा

जब मेवाड़ के 77वें महाराणा विश्वराज सिंह मेवाड़ को फतेह प्रकाश महल की राजगद्दी पर बैठाया गया, तो उन्हें खून से राजतिलक किया गया. यह परंपरा बहुत पुरानी है. जिसे सलूंबर ठिकानेदार पूरा करते हैं. राज्याभिषेक के बाद मेवाड़ के शासक को एकलिंगजी महादेव मंदिर में दर्शन करने जाना पड़ता है. क्योंकि शासक खुद को एकलिंगनाथ जी का दीवान मानते हैं.

क्या है मेवाड़ राजपरिवार का विवाद?

मेवाड़ राजपरिवार का विवाद बहुत पुराना है. 1955 में जब भगवंत सिंह महाराणा बने, तो उन्होंने पैतृक संपत्ती को बेचना और लीज पर देना शुरू कर दिया. जिसका विरोध उनके बड़े बेटे महेंद्र सिंह ने की. महेंद्र सिंह ने अपने पिता के खिलाफ केस कर दिया और संपत्ती को हिंदू उत्तरााधिकारी कानून के तहत बांटने की मांग की. जिसके बाद भगवंत सिंह ने 15 मई 1984 को अपनी वसीयत तैयार की और छोटे बेटे अरविंद सिंह को संपत्ति का एग्जीक्यूटर बनाया. साथ ही उन्होंने अपने बड़े बेटे अरविंद सिंह को संपत्ति से बेदल कर दिया. हालांकि उसी साल उनका निधन हो गया. उसके बाद छोटे बेटे अरविंद सिंह ने मेवाड़ पर अपना कब्जा कर लिया. उसी के बाद विवाद शुरू हो गया.

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लेखक के बारे में

By ArbindKumar Mishra

अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.

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