महबूबा का छलका असली दर्द : 'जम्मू-कश्मीर बन गया है खुली जेल, केवल मुंह खोलने पर लोग कर दिए जाते हैं कैद'

जम्मू-कश्मीर एक खुला जेल बन गया है और लोगों को केवल मुंह खोलने पर ही कैद कर दिया जा रहा है. इस डर की वजह से वे अपने घरों की चहारदीवारी के अंदर ही फुसफुसाते रहते हैं. आज स्थिति यह है कि भारत में असहमति को अपराध बना दिया गया है.
नई दिल्ली : अभी हाल ही में प्रधानमंत्री की ओर से बुलाई गई सर्वदलीय बैठक के बाद जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती का दर्द अब जाकर उभरा है. शनिवार को उन्होंने इंडिया टुडे के दिए एक साक्षात्कार में कहा कि केंद्र सरकार विश्वास बहाली पर विशेष ध्यान देना चाहिए.
इस साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर एक खुला जेल बन गया है और लोगों को केवल मुंह खोलने पर ही कैद कर दिया जा रहा है. इस डर की वजह से वे अपने घरों की चहारदीवारी के अंदर ही फुसफुसाते रहते हैं. आज स्थिति यह है कि भारत में असहमति को अपराध बना दिया गया है.
महबूबा ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के नेताओं का अपराधीकरण कर दिया गया, लेकिन अब यह केवल महबूबा मुफ्ती या केवल जम्मू-कश्मीर तक ही सीमित नहीं है. देश भर के युवा छात्रों को कैद किया जा रहा है. जमानत अपवाद बन गई है. कोई कायदा-कानून बचा नहीं रह गया. यह बात दीगर है कि जम्मू-कश्मीर के लोगों को देश के दूसरे लोगों से भले ही बुरा माना जाता है.
महबूबा ने आगे कहा कि राज्य में कारोबार में गिरावट आ रही है. युवा उदास हैं. मेरे लिए चिंता का विषय यह है कि पीड़ित लोगों को राहत दी जाए. उन्होंने कहा कि क्या आप इस बात की कल्पना कर सकते हैं कि वास्तव में लोगों के साथ क्या हो रहा है? एक नाबालिग को केवल एक ट्वीट करने पर जेल भेजा रहा है. असहमति को अपराध बना दिया गया है. आपको अपने लोगों के साथ ऐसा नहीं करना चाहिए.
महबूबा ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के पीड़ित नागरिकों की स्थिति में सुधार के लिए केंद्र सरकार को पाकिस्तान के साथ बातचीत करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि लोग चाहते हैं कि भारत-पाकिस्तान बात करें. मैंने सर्वदलीय बैठक में पीएम मोदी से कहा कि आप चीन से बात कर रहे हैं, पाकिस्तान से भी करें.
पीडीपी अध्यक्ष ने कहा कि वे केंद्र सरकार के साथ बात करने के लिए हमेशा तैयार हैं. आगे भी बातें होती रहेंगी, लेकिन इसके पहले विश्वास बहाली के उपायों को लागू किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि मेरे पिता बातचीत के पक्षधर थे. लोकतंत्र का मतलब संवाद करने से है. आप संवाद से मुंह नहीं मोड़ सकते.
उन्होंने कहा कि हम दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपने दिल की बात कहने आए हैं. उन्होंने हमें बुलाया, हम आए और हमने वही कहा, जो हमारे दिल में है. उन्होंने कहा कि मुझे यह पता नहीं कि पीएम ने हमें क्यों बुलाया, लेकिन यह अच्छा है. वह केंद्र सरकार के साथ हुई बातचीत को जम्मू-कश्मीर में जो रहा है, उसे बताने को लेकर इस्तेमाल करना चाहती हैं.
Posted by : Vishwat Sen
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