मणिपुर हिंसा की जांच के लिए CBI ने 29 महिला समेत 53 अधिकारियों को किया तैनात, जानें अब कैसी है राज्य की स्थिति

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Manipur-Violence

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मणिपुर में जातीय हिंसा के कारण विस्थापित हुए 3,000 परिवारों को आश्रय देने के लिए राज्य सरकार पूर्वनिर्मित मकानों की पहली खेप के निर्माण के लिए तेजी से काम कर रही है ताकि लोगों को राहत शिविरों से स्थानांतरित किया जा सके.

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केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने मणिपुर हिंसा मामलों की जांच के लिए बुधवार को विभिन्न रैंक की 29 महिला अधिकारियों सहित 53 अधिकारियों को तैनात किया है. यह जानकारी अधिकारियों ने दी है.

महिला अधिकारियों में लवली कटियार और निर्मला देवी शामिल

अधिकारियों ने बताया कि तीन उप महानिरीक्षक रैंक के अधिकारी राज्य में हिंसा के मामलों की जांच के लिए अपनी-अपनी टीम का नेतृत्व करेंगे, जिनमें महिला अधिकारी लवली कटियार और निर्मला देवी शामिल हैं. उन्होंने कहा कि सभी अधिकारी संयुक्त निदेशक घनश्याम उपाध्याय को रिपोर्ट करेंगे जो विभिन्न मामलों में जांच की निगरानी करेंगे.

विस्थापित लोगों के लिए 3,000 पूर्वर्निमित मकानों का निर्माण कर रही सरकार

मणिपुर में जातीय हिंसा के कारण विस्थापित हुए 3,000 परिवारों को आश्रय देने के लिए राज्य सरकार पूर्वनिर्मित मकानों की पहली खेप के निर्माण के लिए तेजी से काम कर रही है ताकि लोगों को राहत शिविरों से स्थानांतरित किया जा सके. हिंसा से प्रभावित कई लोग पिछले तीन महीने से अधिक समय से अस्थायी राहत शिविरों में शरण लिए हुए हैं. मणिपुर पुलिस हाउसिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड के पुलिस अधीक्षक पी ब्रोजेंद्रो ने कहा, पांच अलग-अलग स्थानों पर 26 जून से निर्माण कार्य शुरू हुआ था और राज्य सरकार की इस पहल को हम समय से पहले जल्द से जल्द पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं. मणिपुर पुलिस हाउसिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड मकानों की निर्माण परियोजना कार्य का जिम्मा संभाल रही है.

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मकानों के निर्माण कार्य में लगे हैं 200 से अधिक मजदूर

इंफाल पूर्व जिले में सजीवा जेल के पास बनाए जा रहे दो सौ मकानों का निर्माण कार्य जल्द पूरा होने का जिक्र करते हुए अधिकारी ने बताया कि प्रत्येक घर में दो कमरे, एक शौचालय और सामान्य रसोई होगी तथा एक पंक्ति में दस मकान होंगे. उन्होंने बताया कि 200 पूर्वनिर्मित मकानों को पूरा करने की समय-सीमा 20 अगस्त है और इन्हें पूरा करने के लिए लगभग 160 मजदूर काम कर रहे हैं. अधिकारी ने बताया, इन मकानों के निर्माण में आने वाली सबसे बड़ी चुनौती है उसमें प्रयोग होने वाली सामग्री को मणिपुर लाना क्योंकि राज्य में जगह-जगह सड़कें बंद हैं और राजमार्ग पर नाकेबंदी हो रखी है.

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मणिपुर अशांति की दवा सिर्फ संगीत है : कुकी, मैतेई कलाकार

मणिपुर हिंसा में शामिल दोनों समुदायों से जुड़े संगीतकारों ने माइकल जैक्सन के प्रसिद्ध गीत ‘मुझे अच्छे संगीत से प्यार है, इसका कोई रंग नहीं, इसकी कोई सीमा नहीं’ का जिक्र किया और कहा कि अशांति के इस माहौल को समाप्त करने में संगीत जादू सा असर डाल सकता है. कुकी और मैतेई दोनों समुदाय के संगीतकारों ने कहा कि मतभेदों को दूर करने में अभी भी देर नहीं हुई है और संगीत सबसे बेहतर मरहम का काम कर सकता है.

कुकी समुदाय के गायक ने क्या कहा

कुकी समुदाय के प्रसिद्ध गायक डोन्नी ने कहा, संगीतकार होने के नाते, हम सभी काफी अच्छा वक्त बिताते हैं. हम दूसरे समुदाय के लोगों से मिलते हैं और उनकी अद्भुत संगीत शैली को सुनकर हमारे संबंध बनते हैं. हम अक्सर एक-दूसरे के साथ बैठकर बात करते हैं और अपनी-अपनी जिंदगियों में क्या चल रहा है उसके बारे में जानते हैं. डोन्नी ने कहा, इन हालात की शुरुआत से पहले, हम मणिपुर के संगीत प्रेम को नई ऊंचाईयों पर ले जाना चाहते थे, जहां हर सप्ताह कोई न कोई समारोह होता रहता था. मेरा निजी तौर पर मानना है कि जब तक हिंसा नहीं भड़की थी तब तक महत्वाकांक्षी संगीतकार संगीत को एक मुख्य करियर विकल्प के रूप में ले रहे थे.

3 मई से हिंसा की आग में जल रहा मणिपुर

तीन मई को राज्य में पहली बार जातीय हिंसा भड़कने के बाद से 160 से अधिक लोग मारे गए हैं, और कई सौ लोग घायल हुए हैं. बहुसंख्यक मैतेई समुदाय की अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की मांग के विरोध में पहाड़ी जिलों में ‘आदिवासी एकजुटता मार्च’ आयोजित किये जाने के दौरान यह हिंसा भड़की थी. मणिपुर की कुल आबादी में मैतेई समुदाय के लोगों की संख्या लगभग 53 प्रतिशत है और वे ज्यादातर इम्फाल घाटी में रहते हैं, जबकि आदिवासी नगा और कुकी समुदाय के लोगों की संख्या 40 प्रतिशत है और वे ज्यादातर पहाड़ी जिलों में रहते हैं.

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अरबिंद कुमार मिश्रा

लेखक के बारे में

By अरबिंद कुमार मिश्रा

अरबिंद कुमार मिश्रा मुख्यधारा की पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वर्तमान में, वह प्रभात खबर डॉट कॉम (Prabhat Khabar) में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अरबिंद नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स कैटेगरी में अपनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं. गहरी रिसर्च पर आधारित स्पेशल स्टोरीज, रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' लिखना उनकी मुख्य यूएसपी (USP) है.

झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.

करियर का सफरनामा

अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग

खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:

34वें राष्ट्रीय खेल: झारखंड में आयोजित ऐतिहासिक 34वें नेशनल गेम्स की बेहतरीन और व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग.

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.

पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप (2018): भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की शानदार स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग.

पंचायतनामा: प्रभात खबर के इस खास विंग के लिए ग्रामीण इलाकों का दौरा कर कई प्रेरक 'सक्सेस स्टोरीज' लिखीं.

शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)

UGC NET: साल 2019 में यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की.

बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (BJMC): रांची विश्वविद्यालय से साल 2011 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की.

एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग' से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.

लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.

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