Palace on Wheels: जल्द पटरी पर दौड़ेगी लग्जरी ट्रेन 'पैलेस ऑन व्हील्स', सुविधाएं जानकर दंग रह जाएंगे

आरटीडीसी ने इस संबंध में बताया कि सितंबर माहीने में शुरू हो रही पैसेल ऑन व्हील्स ट्रेन की सूची में बूंदी और कुछ अन्य पर्यटन स्थलों को जोड़ने पर विचार कर रहा है. इसके मार्ग और समय सारणी पर भी विचार किया जा रहा है.
कोरोना काल के दो साल बाद पैलेस ऑन व्हील्स पटरी पर दौड़ने के लिए तैयार है. राजस्थान पर्यटन विकास निगम (RTDC) ने यह जानकारी दी. आरटीडीसी के अध्यक्ष धर्मेंद्र राठौड़ ने बताया कि पैलेस ऑन व्हील्स देशभर में राजस्थान की पहचान है. ट्रेन को दोबारा शुरू करने के लिए निगम की ओर से गंभीर प्रयास किए जा रहे हैं. ट्रेन चलाने की पूरी तैयारी कर ली गई है और संभवत: सितंबर के अंतिम सप्ताह तक ट्रेन पटरी पर दौड़ना शुरू हो जाएगी.
पैसेल ऑन व्हील्स ट्रेन नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से खुलती है और राजस्थान के जयपुर, सवाई माधोपुर, उदयपुर, जैसलमेर, जोधपुर समेत कई हेरिटेज स्थलों को कवर करती है. आरटीडीसी ने इस संबंध में बताया कि सितंबर माहीने में शुरू हो रही पैसेल ऑन व्हील्स ट्रेन की सूची में बूंदी और कुछ अन्य पर्यटन स्थलों को जोड़ने पर विचार कर रहा है. इसके मार्ग और समय सारणी पर भी विचार किया जा रहा है, जिसकी घोषणा जल्द होने की संभावना है.
आरटीडीसी के अध्यक्ष धर्मेंद्र राठौड़ ने बताया कि भारतीय रेलवे और आरटीडीसी ने ओ एंड एम मॉडल के तहत ट्रेन के संचालन पर सहमति व्यक्त कर चुकी है. इसके लिए रेलवे ने स्वीकृति पत्र भी जारी किया है. वहीं, इस ट्रेन में एक यात्री के लिए एक रात का किराया 55 हजार रुपये निर्धारित है. इसमें रहने, खाने की सुविधाओं के अलावा बेवरेज, जिम , लॉन्ड्री और स्पा भी उपलब्ध है.
मालूम हो कि राजस्थान में अक्टूबर के माहीने में पर्यटन की शुरुआत हो जाती है. वहीं, पिछले दो सालो में कोरोना महामारी के प्रकोप के कारण पर्यटन को भारी नुकसान पहुंचा है. ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि पैसेल ऑन व्हील्स ट्रेन के माध्यम से ज्यादा से ज्यादा यात्री पर्यटन का लुप्त ले सकेंगे. इधर, टूर ऑपरेटर और उद्योग जगत भी अच्छे सीजन की उम्मीद कर रहा है.
पैसेल ऑन व्हील्स ट्रेन को पिछले 40 सालों से चलाया जा रहा है. इसकी शुरुआत 1982 मं देश की पहली लग्जरी हेरिटेज ट्रेन के तौर पर हुई थी. ट्रेन के कोच का शाही अंदाज में निर्माण किया गया है, जो मूल रूप से राजपूताना और अन्य रियासतों के तत्कालीन शसकों के निजी रेलवे कोच थे. बता दें कि ट्रेन के को कोच को राजस्थान की सांस्कृतिक और विरासत को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है.
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