हाई लेवल मीटिंग : लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर होंगे लियू लिन के सामने, चीन के सामने रख सकते हैं ये मांग
Author : Amitabh Kumar Published by : Prabhat Khabar Updated At : 06 Jun 2020 9:35 AM
high level meeting : लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर जारी गतिरोध के बीच भारत (india) और चीन (china) के बीच आज हाई लेवल मीटिंग होने जा रही है. सेना के सूत्रों की मानें तो 14 वीं कॉर्प्स के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह (general harinder singh) मेजर जनरल लियू लिन के साथ बातचीत करेंगे और अपना पक्ष रखेंगे. आपको बता दें कि मेजर जनरल लियू लिन चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के दक्षिण झिंजियांग सैन्य क्षेत्र के कमांडर हैं.
लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर जारी गतिरोध के बीच भारत और चीन के बीच आज हाई लेवल मीटिंग होने जा रही है. सेना के सूत्रों की मानें तो 14 वीं कॉर्प्स के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह मेजर जनरल लियू लिन के साथ बातचीत करेंगे और अपना पक्ष रखेंगे. आपको बता दें कि मेजर जनरल लियू लिन चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के दक्षिण झिंजियांग सैन्य क्षेत्र के कमांडर हैं. पूर्वी लद्दाख में चल रहे विवाद पर चर्चा करने के लिए एलएसी के चीन की तरफ मोल्दो में आज भारत और चीन के सैन्य कमांडरों की बैठक होगी. आइए इससे पहले आपको बताते हैं इस वार्ता से पहले कुछ खास बातें…
14 Corps Commander Lieutenant Gen Harinder Singh will hold discussions with Maj Gen Liu Lin, who is the commander of South Xinjiang Military Region of Chinese People’s Liberation Army (PLA) to address the issue: Indian Army Sources https://t.co/1Qlz1rDYlO
— ANI (@ANI) June 6, 2020
आज की मीटिंग में भारत यह मांग रख सकता है कि चीन के सैनिक भारतीय इलाके से हट जाएं और एलएसी पर फारवर्ड पोस्ट्स पर तैनात चीनी सैनिकों को चीन वापस बुलाए. भारत की ओर से यह कहा जा सकता है कि गलवान में उसके द्वारा इन्फ्रास्ट्रक्चर का काम जारी रखने दिया जाए. यही नहीं भारत यह आश्वासन भी चीन से मांगेगा कि भविष्य में और हिंसक झड़पें नहीं होंगी. गौर हो कि पिछले महीने हिंसक झड़प यहां देखने को मिली थी जिसके बाद से ही तनाव है.
Also Read: पेन्गौंग झील को लेकर क्या है तनाव, आइए भारत चीन वार्ता से पहले इसे समझेंसूत्रों ने कहा कि भारत को बैठक से किसी ठोस नतीजे की उम्मीद नहीं है लेकिन वह इसे महत्वपूर्ण मानता है क्योंकि उच्च-स्तरीय सैन्य संवाद गतिरोध के हल के लिए मार्ग प्रशस्त कर सकता है. दोनों पक्षों के मध्य पहले ही स्थानीय कमांडरों के बीच कम से कम 12 दौर की और मेजर जनरल स्तरीय अधिकारियों के बीच तीन दौर की बातचीत हो चुकी है. इसके बाद भी कोई सकारात्मक बात सामने नहीं आयी है.
वीडियो कांफ्रेंस के जरिये विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव (पूर्वी एशिया), नवीन श्रीवास्तव और चीनी विदेश मंत्रालय में महानिदेशक वु जिआनघाओ के बीच हुई वार्ता में दोनों देशों ने तनाव को दूर करने में सकारात्मक रूख अपनाने के संकेत दिए. पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन की सेनाओं के बीच एक महीने से चल रहे गतिरोध को दूर करने के लिए लेफ्टिनेंट जनरल स्तर की वार्ता होने से एक दिन पहले दोनों राजनयिकों के बीच यह वार्ता हुई है. सैन्य गतिरोध का प्रत्यक्ष रूप से जिक्र किये बगैर विदेश मंत्रालय ने कहा कि दोनों पक्षों ने ‘‘मौजूदा घटनाक्रमों” सहित द्विपक्षीय संबंधों की स्थिति की समीक्षा की.
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अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.
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