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राजस्थान चुनाव में गरमाया कोटा में हवाई अड्डा के विकास का मुद्दा, भाजपा-कांग्रेस में आरोप-प्रत्यारोप

Updated at : 20 Nov 2023 5:16 PM (IST)
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राजस्थान चुनाव में गरमाया कोटा में हवाई अड्डा के विकास का मुद्दा, भाजपा-कांग्रेस में आरोप-प्रत्यारोप

कोटा में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के भरोसेमंद शांति धारीवाल का मुकाबला वसुंधरा राजे के वफादार और भाजपा नेता प्रह्लाद गुंजल से है. वाणिज्यिक उड़ानों की सेवा प्रदान करने वाले एक नियमित हवाई अड्डे की यहां लंबे समय से मांग होती रही है और यह मुद्दा चुनाव अभियानों में अनिवार्य रूप से जगह बनाता है.

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कोटा : राजस्थान विधानसभा चुनाव में प्रचार के जोर पकड़ने के साथ कोटा में एक हवाई अड्डे के विकास की मांग गरमाती दिख रही है. लेकिन, इस विकास परियोजना के साकार नहीं होने के लिए कांग्रेस और भाजपा एक-दूसरे पर आरोप लगा रही हैं. कोटा में एक छोटा हवाई अड्डा है, लेकिन नियमित उड़ान सेवाओं के अभाव में केवल वीआईपी या विशेष विमान ही वहां उतरते हैं. यह मुद्दा विशेष रूप से कोटा उत्तर सीट पर प्रचार अभियान में जगह बना चुका है.

कोटा में गहलोत-वसुंधरा के वफादारों में टक्कर

कोटा में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के भरोसेमंद शांति धारीवाल का मुकाबला वसुंधरा राजे के वफादार और भाजपा नेता प्रह्लाद गुंजल से है. वाणिज्यिक उड़ानों की सेवा प्रदान करने वाले एक नियमित हवाई अड्डे की यहां लंबे समय से मांग होती रही है और यह मुद्दा चुनाव अभियानों में अनिवार्य रूप से जगह बनाता है. यह 2018 के विधानसभा चुनाव और 2019 के लोकसभा चुनाव में भी एक चुनावी मुद्दा था.

इंजीनियरिंग-मेडिकल की पढ़ाई का हब है कोटा

इंजीनियरिंग और मेडिकल प्रवेश परीक्षा जेईई और एनईईटी की तैयारी के लिए सालाना दो लाख से अधिक छात्र कोटा आते हैं. इनमें से कई दूर-दराज के इलाकों से यात्रा करते हैं और यहां नियमित हवाई अड्डे के अभाव में उन्हें नई दिल्ली, जयपुर या उदयपुर के रास्ते कोटा आना पड़ता है. यहां प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहीं आंध्र प्रदेश के कुरनूल की छात्रा सरीना संदीप ने कहा कि देशभर से छात्र कोटा आते हैं. कुछ बहुत दूर के राज्यों से आते हैं और जहां से यात्रा करने में बहुत समय लगता है. यह सुविधा (हवाई अड्डा) कोटा में होनी चाहिए.

कोटा जाने में छात्रों को लगता है काफी समय

इंजीनियरिंग परीक्षा की तैयारी कर रहे एक छात्र ने कहा कि अगर हमें घर जाना है, तो हम जल्दी जा सकते हैं और बिना समय बर्बाद किए वापस आ सकते हैं. यहां छुट्टियां भी बहुत कम मिलती हैं. अगर एक नियमित हवाई अड्डा होगा, तो हमारा समय बचेगा. मध्य प्रदेश के शहडोल के एक अभिभावक राजेंद्र सिंह ने कहा कि ट्रेन कनेक्टिविटी अच्छी है, लेकिन कई बार केवल एक दिन का समय होता हैख् जिसमें बच्चे से मिलकर वापस लौटना होता है और ऐसी स्थिति में अगर विमान सेवा हो तो बहुत समय बच सकता है. पटना निवासी एक अन्य छात्र के अभिभावक प्रवीण कुमार सिंह ने भी कहा कि ट्रेन में सफर के कारण बहुत समय नष्ट होता है, कोटा से विमान सेवा की सुविधा होनी ही चाहिए.

राजस्थान सरकार ने नहीं दी जमीन : भाजपा

इस मुद्दे के बारे में पूछे जाने पर कोटा उत्तर से भाजपा उम्मीदवार प्रह्लाद गुंजल ने दावा किया कि मंजूरी के बाद राज्य को जो जमीन देनी थी वह नहीं दी गई है. उन्होंने आरोप लगाया कि यह राज्य सरकार की जिम्मेदारी थी. जहां भी हवाई अड्डा बनते हैं, राज्य सरकार जमीन उपलब्ध कराती है. राज्य सरकार ने अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभाई. वे कुछ भी कह सकते हैं, लेकिन इसके लिए राज्य सरकार जिम्मेदार है.

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कांग्रेस ने भाजपा पर साधा निशाना

कोटा उत्तर के मौजूदा विधायक और अशोक गहलोत सरकार में कैबिनेट मंत्री शांति धारीवाल ने इस मुद्दे पर भाजपा की आलोचना की और परियोजना को रोकने के लिए केंद्र को जिम्मेदार ठहराया. गहलोत ने इसके पहले सितंबर में कोटा में प्रस्तावित ग्रीनफील्ड हवाई अड्डे के निर्माण में देरी के लिए केंद्र को दोषी ठहराया था. उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष और स्थानीय सांसद ओम बिरला पर इस डर से हवाई अड्डे के विकास के लिए सकारात्मक भूमिका नहीं निभाने का भी आरोप लगाया था कि इसका श्रेय राज्य की कांग्रेस सरकार को मिल जाएगा. यह दावा करते हुए कि राज्य सरकार हवाई अड्डे के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है, गहलोत ने कहा था कि शहरी सुधार ट्रस्ट (कोटा) ने 34 हेक्टेयर जमीन भारतीय हवाई अड्डा प्राधिकरण को मुफ्त में हस्तांतरित कर दी है.

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केंद्र ने परियोजना पर काम शुरू नहीं किया : शांति धारीवाल

कैबिनेट मंत्री शांति धारीवाल ने ने आरोप लगाया था कि वन भूमि के ‘डायवर्जन’ के लिए 21.13 करोड़ रुपये की पहली किस्त भी वन विभाग को जारी कर दी गई, लेकिन इसके बावजूद केंद्र ने परियोजना पर काम नहीं शुरू किया. नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पलटवार करते हुए कहा था कि राजस्थान सरकार की ‘अस्थिर प्रतिक्रिया और जमीन सौंपने की धीमी गति’ के कारण कोटा में एक हवाई अड्डे के विकास की प्रक्रिया में देरी हुई है.

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