Sawan 2024 : इस बार भी कैलाश में भगवान शिव रह जाएंगे 'प्यासे', वजह चीन
Published by : Amitabh Kumar Updated At : 20 Jul 2024 2:08 PM
Sawan 2024/ Kailash Mansarovar : कैलाश मानसरोवर में विराजमान भगवान शिव के दर्शन इस बार भी भक्त नहीं कर पाएंगे. भारतीयों के लिए यहां की यात्रा साल 2020 से लगातार पांचवें साल बंद है.
Sawan 2024/ Kailash Mansarovar : सावन का महीना शुरू होने वाला है. लोग अपने भगवान पर जल चढ़ाने शिवालयों में जाएंगे. कैलाश मानसरोवर में भी भगवान शिव विराजमान हैं, लेकिन भारतीयों के लिए यहां की यात्रा साल 2020 से लगातार पांचवें साल भी बंद है. यहां पहुंचने के दो आधिकारिक रास्ते हैं और दोनों ही बंद पड़े हैं. नेपाल के रास्ते पिछले साल चीन ने खोले लेकिन लेकिन उसकी चालाकी यहां भी दिखाई दी. दरअसल, कड़े नियमों की बात की गई जिस वजह से भारतीयों के लिए व्यावहारिक रूप से यह रास्ता भी बंद है.
महामारी कोरोना को यात्रा बंद होने का कारण बताया जा रहा है, लेकिन वास्तविकता कुछ अलग है. 2020 से भारत-चीन सीमा तनाव के बाद से यह चीन की एक रणनीति है जिसकी वजह से भारत के लोग अपने अराध्य के दर्शन नहीं कर पा रहे हैं. अब लोगों को कैलाश मानसरोवर जाने के लिए इंतजार करना होगा. जब चीन की सहमति होगी तो भारत के लोग वहां पहुंच सकेंगे.
नेपाल के रास्ते छूट महज दिखावा
चीन ने पिछले साल नेपाल के रास्ते अपनी सीमाएं खोलने की बात कही थी, लेकिन भारतीयों के लिए नियम काफी सख्त करने की वजह से और फीस बढ़ाने समेत कई पाबंदियां लगाई गई थी. इससे भारतीयों के लिए कैलाश यात्रा पर जाना लगभग नामुमकिन हो गया. इस साल जनवरी के महीने में केवल 38 भारतीयों ने नेपाल के नेपालगंज से चार्टर्ड विमान से कैलाश मानसरोवर के हवाई दर्शन किए.
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कैलाश यात्रा 3 अलग-अलग राजमार्ग से होती है
- लिपुलेख दर्रा (उत्तराखंड)
- दूसरा- नाथू दर्रा (सिक्किम)
- काठमांडू
उपरोक्त तीनों रास्तों पर कम से कम 14 और अधिकतम 21 दिन का वक्त लगता है. साल 2019 में 31 हजार भारतीय कैलाश की यात्रा पर गए थे.
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By Amitabh Kumar
अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.
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