Coronavirus Lockdown : भारतीय सेना ने कोरोना वायरस से लड़ने के लिए अपनाया अनोखा तरीका

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Coronavirus Pandemic : भारतीय सेना ने छुट्टी, अस्थायी ड्यूटी और प्रशिक्षण पाठ्यक्रम से लौटने वाले अपने कर्मियों को 'हरे, पीले और लाल' की तीन श्रेणियों में रखने का फैसला किया है.

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नयी दिल्ली : भारतीय सेना ने छुट्टी, अस्थायी ड्यूटी और प्रशिक्षण पाठ्यक्रम से लौटने वाले अपने कर्मियों को ‘हरे, पीले और लाल’ की तीन श्रेणियों में रखने का फैसला किया है.

सरकारी सूत्रों ने सोमवार को बताया कि कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए उपाय किए गए हैं. नये निर्देशों के तहत, सेना मुख्यालय ने अभियान चलाने के लिए अहम उत्तरी कमान के सभी रैंक के अधिकारियों और सेना चिकित्सा कोर, सेना दंत कोर तथा सेना नर्सिंग सेवा के कर्मियों को शीर्ष प्राथमिकता के वर्ग में रखा है.

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सेना चिकित्सा कोर, सेना दंत कोर तथा सेना नर्सिंग सेवा के कई कर्मी संक्रमण का इलाज करने वाली विभिन्न टीमों का हिस्सा हैं. जिन कर्मियों को शीर्ष प्राथमिकता में रखा गया है, उनमें वे सैनिक भी शामिल हैं जिनकी इकाई या स्टेशन उनके अवकाश वो स्थान से 500 किलोमीटर के दायरे में हैं और वह सड़क से वहां पहुंच सकते हैं.

अपने सभी बेस, प्रतिष्ठानों और फॉर्मेशन को भेजे निर्देश में सेना ने कहा है कि सभी कर्मियों को ड्यूटी शुरू करने के बाद 14 दिन के पृथकवास में जाना जरूरी है और उन्हें ‘पीली’ श्रेणी में रखा जाएगा. सूत्रों ने बताया कि 14 दिन का पृथकवास पूरा करने के बाद कर्मियों को ‘ हरी’ श्रेणी में रखा जाएगा और जिनमें लक्षण दिखेंगे और उन्हें पृथक करने की जरुरत होगी, उन्हें ‘लाल’ श्रेणी में रखा जाएगा.

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पिछले कुछ हफ्तों में सेना मुख्यालय ने 13 लाख कर्मियों वाली मजबूत फौज को कोरोना वायरस से बचाने के लिए कई निर्देश जारी किए हैं. देश में कोविड-19 से 540 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है और 17000 से अधिक मामले हैं. सेना के भी आठ कर्मी संक्रमित पाए गए हैं.

नये दिशानिर्देशों के मुताबिक, वे सभी कर्मी जो छुट्टी, अस्थायी ड्यूटी और पाठ्यक्रम से लौट रहे हैं, उन्हें पीली श्रेणी में रखा जाएगा और उन्हें रिपोर्टिंग स्टेशन या इकाई में 14 दिन का पृथकवास पूरा करना होगा. इसके बाद इन कर्मियों को सेना की गाड़ी या विशेष ट्रेनों से रिपोर्टिंग स्टेशन से ड्यूटी स्टेशन या इकाई में भेजा जाएगा.

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अगर कोई कर्मी सैन्य अधिकारियों की निगरानी में नहीं जाता है तो उसे फिर से ‘पीली’ श्रेणी में समझा जाएगा और उसे फिर से 14 दिन के पृथक वास में जाना होगा. निर्देशों के मुताबिक, पूर्वी कमान के सभी रैंक के अधिकारियों और अन्य कमान की अहम नियुक्तियों को दूसरे उच्चतर प्राथमिकता वर्ग में रखा गया है.

सेना ने कहा कि कर्मी को छुट्टी और अस्थायी ड्यूटी देने वाली इकाई या फॉर्मेशन अथवा प्रतिष्ठान के विशिष्ट निर्देश मिलने पर ही उसे ड्यूटी पर फिर से आने की इजाजत दी जाएगी. निर्देशों के मुताबिक, जिस किसी की छुट्टी का स्थान इकाई या ड्यूटी स्टेशन से 500 किलोमीटर के दायरे में है, उसे सिर्फ निजी गाड़ी से सीधे इकाई में रिपोर्ट करने की इजाजत है.

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निर्देशों के मुताबिक, जो 500 किलोमीटर के दायरे में नहीं आते हैं, वे सिर्फ निजी गाड़ी से नजदीक की इकाई या स्टेशन मुख्यालय में रिपोर्ट करेंगे. निर्देशों में कहा गया है कि नेपाल के सैन्य कर्मी जो छुट्टी पर घर पर हैं, वे नेपाल में हालात स्थिर होने तक और सरकार की ओर से सीमा खोलने तक वहीं रुकें. सेना ने स्पष्ट किया है कि ये निर्देश उन पर लागू नहीं होंगे जो हॉटस्पॉट जोन से आते हैं और क्षेत्र को हॉटस्पॉट की श्रेणी में से हटाने तक उन पर आवाजाही नहीं करने के पहले के निर्देश लागू रहेंगे.

भारत में 25 मार्च से 14 अप्रैल तक का 21 दिन का बंद था, जिसे पिछले मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन मई तक के लिए बढ़ा दिया है. हालांकि सरकार ने कुछ क्षेत्रों को 20 अप्रैल से गतिविधियां शुरू करने की इजाजत दी है. पिछले हफ्ते भारतीय सेना ने अपने सभी सैन्य प्रतिष्ठानों, छावनियों फॉर्मेशन मुख्यालयों और क्षेत्र इकाई को 19 अप्रैल तक आवाजाही पूरी तरह से प्रतिबंधित करने का निर्देश दिया था.

यह निर्देश सरकार की ओर से बंद को लेकर आए नये दिशा निर्देशों के मद्देनजर दिया गया था. आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि सेना मुख्यालय, कमान मुख्यालय और फॉर्मेशन मुख्यालय के कार्यालय 19 अप्रैल से तीन मई तक 50 प्रतिशत कार्यबल के साथ काम करना शुरू कर देंगे. इसने कहा कि सभी प्रशिक्षण गतिविधियों और अस्थायी ड्यूटी को तीन मई तक निलंबित रखा जाएगा.

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ArbindKumar Mishra

लेखक के बारे में

By ArbindKumar Mishra

अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.

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