पाकिस्तान, सऊदी और तुर्की डिफेंस डील पर आया भारत का बयान, MEA ने कहा- समझौते पर है कड़ी नजर
समझौते पर हस्ताक्षर करते तीनों देशों के नेता, फोटो एक्स
पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच हाल ही में हुए 'मक्का रक्षा समझौते' (Mecca Defence Pact) को लेकर भारत ने अपनी प्रतिक्रिया दी है. विदेश मंत्रालय (MEA) ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि भारत इस त्रिपक्षीय सैन्य समझौते के प्रभावों और राष्ट्रीय सुरक्षा पर पड़ने वाले असर का गहन आकलन कर रहा है.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने द्विसाप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान कहा, "हम पश्चिम एशिया के घटनाक्रमों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं. जहां तक इस नए समझौते का सवाल है, हम अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा, क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के दृष्टिकोण से इसके निहितार्थों की समीक्षा कर रहे हैं." उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इसके लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा.
क्या है मक्का रक्षा समझौता?
7 अगस्त को सऊदी अरब के मक्का शहर में सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोगन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए.
समझौते की मुख्य शर्तें और मुख्य बातें
सामूहिक सुरक्षा: किसी भी एक सदस्य देश पर हुए सशस्त्र हमले को तीनों देशों पर हमला माना जाएगा.
- संयुक्त रक्षा सहयोग: तीनों देश रक्षा उत्पादन बढ़ाने, साझा सैन्य अभ्यास और आतंकवाद विरोधी अभियानों में सहयोग का विस्तार करेंगे.
- संयुक्त राष्ट्र चार्टर का हवाला: तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन के अनुसार, यह समझौता यूएन चार्टर के अनुच्छेद 51 के तहत आत्मरक्षा के अधिकार पर आधारित है और यह किसी विशेष देश के खिलाफ नहीं है.
सऊदी अरब ने दी सफाई
इस समझौते के बाद क्षेत्रीय तनाव की आशंकाओं के बीच सऊदी अरब ने एक अलग बयान जारी कर स्पष्ट किया है कि यह समझौता कोई धार्मिक गुट या परमाणु अभियान नहीं है. रियाध के अनुसार, इसका उद्देश्य केवल आत्मनिर्भर रक्षा क्षमताएं हासिल करना है और इससे अन्य अरब व वैश्विक देशों के साथ उसके मौजूदा संबंधों पर कोई असर नहीं पड़ेगा.
पश्चिम एशिया संकट के बीच हुआ समझौता
यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब पश्चिम एशिया में तनाव अपने चरम पर है. हाल ही में ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर संकट गहरा गया है. भारत के लिए इस नए गुट का बनना सामरिक और कूटनीतिक दोनों मोर्चों पर अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
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लेखक के बारे में
By अरबिंद कुमार मिश्रा
अरबिंद कुमार मिश्रा मुख्यधारा की पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वर्तमान में, वह प्रभात खबर डॉट कॉम (Prabhat Khabar) में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अरबिंद नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स कैटेगरी में अपनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं. गहरी रिसर्च पर आधारित स्पेशल स्टोरीज, रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' लिखना उनकी मुख्य यूएसपी (USP) है.
झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.
करियर का सफरनामा
अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.
प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग
खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:
34वें राष्ट्रीय खेल: झारखंड में आयोजित ऐतिहासिक 34वें नेशनल गेम्स की बेहतरीन और व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग.
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.
पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप (2018): भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की शानदार स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग.
पंचायतनामा: प्रभात खबर के इस खास विंग के लिए ग्रामीण इलाकों का दौरा कर कई प्रेरक 'सक्सेस स्टोरीज' लिखीं.
शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)
UGC NET: साल 2019 में यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की.
बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (BJMC): रांची विश्वविद्यालय से साल 2011 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की.
एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग' से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.
लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.
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