भारत-नेपाल सीमा विवाद पर बोले नेपाली विदेश मंत्री-दोनों देश आपसी बातचीत से सुलझा सकते हैं मुद्दे

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Nepal FM Shisir Khanal

नेपाल के विदेश मंत्री

India- Nepal Relations : नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने रविवार को मीडिया से बात करते हुए भारत-नेपाल सीमा विवाद को आपसी बातचीत से सुलझाने पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि दोनों देश आपसी बातचीत से मुद्दों को सुलझा सकते हैं. हालांकि उन्होंने कालापानी और लिपुलेख पर अपना दावा दोहराया. मीडिया से बात करते हुए शिशिर खनाल ने भारत के जेन जी प्रोटेस्ट पर प्रतिक्रिया देने से मना कर दिया.

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India- Nepal Relations : भारत की यात्रा पर आए नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने कहा कि हम बॉर्डर के मुद्दे पर भारत के साथ द्विपक्षीय वार्ता करना चाहते हैं. जब हम खुले दिल, समझदारी और आपसी सम्मान के साथ बैठते हैं, तो कोई भी समस्या बहुत बड़ी नहीं होती और कोई भी सीमा बहुत मुश्किल नहीं होती. हम यह चाहते हैं कि भारत और नेपाल ऐसी पार्टनरशिप बनाएं जो अतीत की चिंता से बंधी न हो, बल्कि भविष्य की उम्मीदों और संभावनाओं से आगे बढ़े.

आपसी बातचीत में कोई बुराई नहीं

अपनी तीन दिवसीय भारत यात्रा के तीसरे दिन शिशिर खनाल ने कहा कि दोनों देशों के बॉर्डर के मुद्दे काफी समय से रुके हुए हैं. हमने यह प्रस्ताव दिया है कि दोनों देशों के बीच ऐसे मैकेनिज्म मौजूद हैं हैं, जिनके जरिए दोनों देश आमने-सामने टेबल पर बात कर सकते हैं. भारत भी आपसी बातचीत से समस्या का समाधान निकालना चाहता है.

भारत -चीन के एग्रीमेंट पर जताई चिंता

नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने कहा कि कैलाश मानसरोवर यात्रा बहुत अलग-अलग बॉर्डर पॉइंट से होती है. कई लोग नेपाल से होकर जाते हैं. हमारी चिंता भारत और चीन के बीच कालापानी और लिपुलेख इलाके के जरिए हुए एग्रीमेंट के रिन्यूअल को लेकर है, जहां हम बहुत लंबे समय से कहते आ रहे हैं कि यह जमीन हमारी है और नेपाल की मंजूरी के बिना, दोनों देश खुद से ये एग्रीमेंट नहीं कर सकते. हमने दोनों देशों को डिप्लोमैटिक नोट्स समेत अपनी बातचीत के जरिए यह बात साफ-साफ बता दी है.

भारत के जेन जी प्रोटेस्ट पर नहीं दी प्रतिक्रिया

शिशिर खनाल ने मीडिया से बात करते हुए भारत में हो रहे जेन जी प्रोटेस्ट पर बात करने से मना कर दिया. उन्होंने कहा कि नेपाल में सितंबर में हुए प्रोटेस्ट की वजह से हम सत्ता में आए हैं, लेकिन भारत में क्या हो रहा है, मुझे उसपर बात नहीं करनी है. मुझे नेपाल के बारे में बात करके खुशी होगी.

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रजनीश आनंद

लेखक के बारे में

By रजनीश आनंद

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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