भारत-नेपाल सीमा विवाद पर बोले नेपाली विदेश मंत्री-दोनों देश आपसी बातचीत से सुलझा सकते हैं मुद्दे

Published by : Rajneesh Anand Updated At : 07 Jun 2026 2:34 PM

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नेपाल के विदेश मंत्री

India- Nepal Relations : नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने रविवार को मीडिया से बात करते हुए भारत-नेपाल सीमा विवाद को आपसी बातचीत से सुलझाने पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि दोनों देश आपसी बातचीत से मुद्दों को सुलझा सकते हैं. हालांकि उन्होंने कालापानी और लिपुलेख पर अपना दावा दोहराया. मीडिया से बात करते हुए शिशिर खनाल ने भारत के जेन जी प्रोटेस्ट पर प्रतिक्रिया देने से मना कर दिया.

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India- Nepal Relations : भारत की यात्रा पर आए नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने कहा कि हम बॉर्डर के मुद्दे पर भारत के साथ द्विपक्षीय वार्ता करना चाहते हैं. जब हम खुले दिल, समझदारी और आपसी सम्मान के साथ बैठते हैं, तो कोई भी समस्या बहुत बड़ी नहीं होती और कोई भी सीमा बहुत मुश्किल नहीं होती. हम यह चाहते हैं कि भारत और नेपाल ऐसी पार्टनरशिप बनाएं जो अतीत की चिंता से बंधी न हो, बल्कि भविष्य की उम्मीदों और संभावनाओं से आगे बढ़े.

आपसी बातचीत में कोई बुराई नहीं

अपनी तीन दिवसीय भारत यात्रा के तीसरे दिन शिशिर खनाल ने कहा कि दोनों देशों के बॉर्डर के मुद्दे काफी समय से रुके हुए हैं. हमने यह प्रस्ताव दिया है कि दोनों देशों के बीच ऐसे मैकेनिज्म मौजूद हैं हैं, जिनके जरिए दोनों देश आमने-सामने टेबल पर बात कर सकते हैं. भारत भी आपसी बातचीत से समस्या का समाधान निकालना चाहता है.

भारत -चीन के एग्रीमेंट पर जताई चिंता

नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने कहा कि कैलाश मानसरोवर यात्रा बहुत अलग-अलग बॉर्डर पॉइंट से होती है. कई लोग नेपाल से होकर जाते हैं. हमारी चिंता भारत और चीन के बीच कालापानी और लिपुलेख इलाके के जरिए हुए एग्रीमेंट के रिन्यूअल को लेकर है, जहां हम बहुत लंबे समय से कहते आ रहे हैं कि यह जमीन हमारी है और नेपाल की मंजूरी के बिना, दोनों देश खुद से ये एग्रीमेंट नहीं कर सकते. हमने दोनों देशों को डिप्लोमैटिक नोट्स समेत अपनी बातचीत के जरिए यह बात साफ-साफ बता दी है.

भारत के जेन जी प्रोटेस्ट पर नहीं दी प्रतिक्रिया

शिशिर खनाल ने मीडिया से बात करते हुए भारत में हो रहे जेन जी प्रोटेस्ट पर बात करने से मना कर दिया. उन्होंने कहा कि नेपाल में सितंबर में हुए प्रोटेस्ट की वजह से हम सत्ता में आए हैं, लेकिन भारत में क्या हो रहा है, मुझे उसपर बात नहीं करनी है. मुझे नेपाल के बारे में बात करके खुशी होगी.

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लेखक के बारे में

By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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