रूसी समाचार एजेंसी का नया खुलासा, गलवान घाटी हिंसा में चीन को हुआ था भारी नुकसान, मारे गये थे इतने सैनिक

Updated at : 11 Feb 2021 2:34 PM (IST)
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रूसी समाचार एजेंसी का नया खुलासा, गलवान घाटी हिंसा में चीन को हुआ था भारी नुकसान, मारे गये थे इतने सैनिक

रूसी समाचार एजेंसी तास ( TASS) के इस दावे से जो बात सामने आ रही है उसके अनुसार गलवान घाटी की हिंसा में चीन के भी 45 सैनिक मारे गए थे. यह खबर और भी जरूरी इसलिए हो जाती है क्योंकि चीन ने कभी यह खुलासा नहीं किया कि झड़प में उसके कितने सैनिक मारे गये थे.

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भारत और चीन के बीच गलवान घाटी पर हुई खूनी झड़प को लेकर रुस की समाचार एजेंसी ने नया खुलासा किया है. रुसी एजेंसी तास (TASS) के अनुसार इस हिंसक झड़प में चीन के कम से कम 45 सैनिक मारे गये थे. गौरतलब है कि पूर्वी लद्दाख के गलवान घाटी में बीते साल 15 जून को दोनों देशेों की सेनाओं के बीच खूनी झड़प हुई थी, जिसमें 20 भारतीय सैनिक शहीद हो गए थे. और बड़ी संख्या में चीनी सैनिक के मारे जाने की सूचना थी.

ऐसे में अब रूसी समाचार एजेंसी तास ( TASS) के इस दावे से जो बात सामने आ रही है उसके अनुसार गलवान घाटी की हिंसा में चीन के भी 45 सैनिक मारे गए थे. यह खबर और भी जरूरी इसलिए हो जाती है क्योंकि चीन ने कभी यह खुलासा नहीं किया कि झड़प में उसके कितने सैनिक मारे गये थे. लेकिन इतना साफ है कि इस झड़प में चीन को ज्यादा नुकसान हुआ था.

इससे पहले चीन की ओर से बयान आया था कि इस झड़प में उसके पांच सैनिक मारे गए थे. भारत के साथ बैठक में भी चीन की ओर से यहीं कहा गया था कि इस लड़ाई में उसके 5 सैनिक मारे गये हैं, लेकिन भारत की खुफिया एजेंसियों ने अनुमान लगाया था कि इस झड़प में चीन के कम से कम 40 सैनिक मारे गए थे. वहीं, अब रुसी समाचार एजेंसी के दावे से यह साफ होता जा रहा है कि चीन जो दावा कर रहा है उसमें ज्यादा सच्चाई नहीं है.

इधर, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आज संसद में बताया कि, पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के बीच जारी विवाद को खत्म करने पर दोनो देश सहमत हो गये है. दोनों ही देश अपनी-अपना सेनाओं को पैंगोंग लेक के नॉर्थ-साउथ इलाके पीछे हटाएगा. गौरतलब है कि गलवान घाटी में हुई हिंसा के बाद से ही दोनों देशों के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है. दोनों देशों ने करीब 50-50 हजार सैनिकों यहां तैनात रखे गये है.

हालांकि, चीन की मंशा पर विश्वास करना बहुत मुश्किल है, इतिहास भी बताता है कि चीन की दोस्ती भरोसे लायक नहीं है. 1962 में हिन्दी-चीनी भाई-भाई के बीच चीन ने हमला कर दिया था. पूरी दुनिया में चीन पीछे से वार करने के लिए कुख्यात है. हालांकि, मौजूदा सरकार की नीति और भारत की सशक्त सेना के बीच अब चीन भी कोई हरकत करने से पहले सौ बार जरूर सोच लेगा.

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Posted by: Pritish Sahay

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