ePaper

सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण, कितनी संपत्ति लूटकर ले गया महमूद गजनवी

Updated at : 09 Jan 2026 1:54 PM (IST)
विज्ञापन
Somnath Mandir

सोमनाथ मंदिर की सांकेतिक तस्वीर

Somnath Mandir : गुजरात के सोमनाथ मंदिर में स्वाभिमान पर्व शुरू हो गया है. केंद्र और राज्य के मंत्री कार्यक्रम में शामिल हुए. ऐतिहासिक सोमनाथ मंदिर के बारे में आइए आपको बताते हैं कुछ खास बातें.

विज्ञापन

Somnath Mandir : गुजरात के गिर सोमनाथ जिले में वेरावल कस्बे के पास स्थित ऐतिहासिक सोमनाथ मंदिर में 8 जनवरी को चार दिवसीय सोमनाथ स्वाभिमान पर्व शुरू हुआ. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 10 जनवरी से गुजरात का तीन दिवसीय दौरा करेंगे और 11 जनवरी को सोमनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगे. वे सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के अंतर्गत एक किलोमीटर लंबे रोड शो ‘शौर्य यात्रा’ का नेतृत्व भी करते नजर आएंगे. रोड शो में 108 घोड़े शामिल किये जाएंगे.

स्वाभिमान पर्व भारतीय सभ्यता की जीवटता को प्रदर्शित करने के लिए मनाया जाता है, जिसका प्रतीक सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण है. प्राचीन मंदिर को विदेशी आक्रांताओं ने बार-बार तबाह किया था और इसकी शुरूआत करीब 1,000 साल पहले महमूद गजनवी के हमले के साथ हुई थी. इस पर्व का आयोजन गजनी द्वारा सोमनाथ मंदिर पर किए गए पहले हमले के 1,000 वर्ष पूरे होने पर किया जा रहा है.

महमूद गजनवी के आक्रमण के बाद भी मंदिर को फिर से बनाया गया

सोमनाथ एक भव्य और प्रसिद्ध मंदिर है. यह मंदिर गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में वेरावल के पास प्रभास पाटन के समुद्र तट पर स्थित है जहां सैकड़ों  लोग दर्शन के लिए पहुंचते हैं. यह भगवान शिव के 12 पवित्र ज्योतिर्लिंगों में से एक है, इसलिए इसका धार्मिक महत्व बहुत ज्यादा ही है. सोमनाथ मंदिर का उल्लेख शिव पुराण के 13वें अध्याय में भी मिलता है. इतिहास में इस मंदिर को कई बार तोड़ा गया, लेकिन हर बार इसका पुनर्निर्माण करवाया गया. 11वीं शताब्दी में महमूद गजनवी के आक्रमण के बाद भी मंदिर को फिर से बनाया गया.

यह भी पढ़ें : 1000 साल पहले…, पीएम मोदी ने सोमनाथ मंदिर की पुरानी तस्वीर शेयर करके की खास अपील

सोमेश्वर कहा जाता था सोमनाथ को

सोमनाथ का स्थान प्राचीन काल से ही एक प्रमुख तीर्थ स्थल रहा है, क्योंकि यह त्रिवेणी संगम पर स्थित है. यहां कपिला, हिरण और सरस्वती नदियों का संगम होता है. girsomnath.nic.in पर मौजूद जानकारी के अनुसार, इस पवित्र स्थल का उल्लेख कई ऐतिहासिक अभिलेखों में मिलता है. गुर्जर-प्रतिहार वंश के राजा नागभट्ट द्वितीय ने अपने अभिलेखों में सौराष्ट्र के तीर्थों की यात्रा का उल्लेख किया है, जिनमें सोमनाथ भी शामिल था. इसे उस समय सोमेश्वर कहा जाता था.

दो करोड़ दीनार की संपत्ति अपने साथ ले गया महमूद गजनवी

1026 ईस्वी में भीम प्रथम के शासनकाल के दौरान तुर्की मुस्लिम शासक महमूद गजनवी ने सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण कर उसे लूटा और ज्योतिर्लिंग को तोड़ा. वह लगभग दो करोड़ दीनार की अपार संपत्ति अपने साथ ले गया. इसके बाद भी मंदिर का महत्व कम नहीं हुआ. 1143 से 1172 के बीच शासन करने वाले राजा कुमारपाल ने 1169 के एक अभिलेख के अनुसार सोमनाथ मंदिर का उत्कृष्ट पत्थरों से पुनर्निर्माण कराया और इसे रत्नों से अलंकृत किया. उन्होंने पुराने और जर्जर लकड़ी के मंदिर के स्थान पर एक भव्य पत्थर का मंदिर बनवाया, जो आस्था और पुनर्जागरण का प्रतीक बना. 

विज्ञापन
Amitabh Kumar

लेखक के बारे में

By Amitabh Kumar

डिजिटल जर्नलिज्म में 14 वर्षों से अधिक का अनुभव है. करियर की शुरुआत Prabhatkhabar.com से की. राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों पर अच्छी पकड़ है. राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर गहन लेखन का अनुभव रहा है. तथ्यपरक रिपोर्टिंग और विश्लेषणात्मक लेखन में विशेष रुचि है. ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग खबरों पर लगातार फोकस रहता है.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola