Home Ministry: ड्रग सरगना कहीं भी छिप जाए, उनके लिए कोई भी जगह अब सुरक्षित नहीं

अमित शाह
मोदी सरकार के ड्रग कार्टेल को पूरी तरह से खत्म करने के मिशन के तहत देश की नार्को विरोधी एजेंसियों ने वैश्विक एजेंसियों के एक मजबूत नेटवर्क के जरिये सीमा पार भी अपनी पकड़ बना ली है. ड्रग सरगना कहीं भी छिप जाएं, अब उनके लिए कोई भी जगह सुरक्षित नहीं है.
Home Ministry: ड्रग तस्करी के खिलाफ केंद्र सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है. मंगलवार को दिल्ली एयरपोर्ट के टेक्निकल एरिया में तुर्की से एक विशेष विमान आया, जिसमें अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नारकोटिक्स सिंडिकेट का मास्टरमाइंड सलीम डोला मौजूद था. भारत पहुंचते ही डोला को नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो(एनसीबी) ने हिरासत में ले लिया. यह भारत के लिए बड़ी सफलता है. डोला भारत से फरार होकर इस्तांबुल में रह रहा था. भारतीय एजेंसियां उसकी हर हरकत पर निगरानी रख रही थी और तुर्की के जांच एजेंसियों के सहयोग से उसके प्रत्यर्पण को अंजाम देने का काम किया. भारतीय एजेंसियां ड्रग तस्करी, हथियार तस्करी, अवैध कारोबार सहित उन तमाम सिंडिकेटों पर प्रहार कर रही है, जो भारत में अपना नेटवर्क फैलाना चाहता है.मंगलवार को केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि नार्को सिंडिकेट के खिलाफ मोदी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत तुर्की से कुख्यात ड्रग तस्कर मोहम्मद सलीम डोला को वापस लाने में एक बड़ी सफलता हासिल की है. मोदी सरकार के ड्रग कार्टेल को पूरी तरह से खत्म करने के मिशन के तहत देश की नार्को विरोधी एजेंसियों ने वैश्विक एजेंसियों के एक मजबूत नेटवर्क के जरिये सीमा पार भी अपनी पकड़ बना ली है. ड्रग सरगना कहीं भी छिप जाएं, अब उनके लिए कोई भी जगह सुरक्षित नहीं है.
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने अंतरराष्ट्रीय और भारतीय खुफिया एजेंसियों के साथ मिलकर ‘ऑपरेशन ग्लोबल-हंट’ के तहत वांछित ड्रग तस्कर मोहम्मद सलीम डोला को तुर्की से वापस लाने में सफलता हासिल की है. सूत्रों के मुताबिक सलीम डोला को एक विशेष विमान से लाने के साथ ही उससे एजेंसियां पूछताछ शुरू कर दी. जांच एजेंसियां उससे अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी और उससे जुड़े नेटवर्क के बारे में पता लगा रही है. इस सिंडिकेट में और कौन-कौन लोग शामिल है तथा वह अपने गिरोह को किस तरह से संचालित कर रहा है यह सारी पूछताछ उससे की जा रही है. हालांकि यह भी बताया जा रहा है कि सलीम शातिर है और बहुत सारे सवालों का जवाब वह देने से बच रहा है. माना जा रहा है कि उसकी गिरफ्तारी से ड्रग तस्करी के बड़े नेटवर्क का खुलासा एनसीबी कर सकती है. दिल्ली में पूछताछ के बाद आगे की प्रक्रिया के तहत उसे मुंबई स्थित एनसीबी को सौंपा जा सकता है, जहां उससे जुड़े कई मामलों में गहराई से पूछताछ होगी.
कैसे हुई गिरफ्तारी
मुंबई निवासी 59 वर्षीय सलीम डोला के खिलाफ मार्च 2024 में भारत के अनुरोध पर इंटरपोल ने रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया. भारत में कई नशीले पदार्थों की तस्करी के मामलों में मुकदमा चलाने के लिए उसकी लंबे समय से तलाश थी और वह भारतीय एजेंसियों की गिरफ्त से बाहर था. जांच एजेंसियों का दावा है कि पिछले कुछ सालों में डोला ने मध्य पूर्व, अफ्रीका और यूरोप के कई देशों में एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी सिंडिकेट खड़ा कर लिया था. महाराष्ट्र और गुजरात में हेरोइन, चरस, मेफेड्रोन, मैंड्रेक्स और मेथामफेटामाइन की बड़ी खेप पकड़े जाने से जुड़े मामलों में डोला की भूमिका जांच के दौरान सामने आयी. गुजरात एटीएस और मुंबई पुलिस को भी उसकी तलाश थी. इससे पहले उसके बेटे ताहिल सलीम डोला और अन्य सहयोगियों को 2025 में संयुक्त अरब अमीरात से प्रत्यर्पण के बाद मुंबई पुलिस ने गिरफ्तार किया था. ड्रग्स तस्करी के खिलाफ भारत सरकार की सख्त नीति और खाड़ी देशों के साथ सहयोग के कारण हाल के वर्षों में दाऊद गैंग से जुड़े कई लोगों को भारत लाने में सफलता मिली. इससे पहले वर्ष 2018 में 1993 में मुंबई धमाके में शामिल और दाऊद के सहयोगी फारुख टकला को दुबई से भारत लाया गया. टकला ड्रग सिंडिकेट का अहम हिस्सा माना जाता है. वर्ष 2020 में इजाज लकड़ावाला को बैंकाक में गिरफ्तार किया गया और उसे भारत लाने में सफलता मिली. पिछले कुछ सालों में दाऊद के कई करीबियों के गिरफ्तारी के बाद सलीम डोला के लोकेशन का पता जांच एजेंसियों को चला और उसकी गिरफ्तारी संभव हो पायी.
नेपाल से शेख सलीम भी गिरफ्तार
वांछित अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए भारतीय जांच एजेंसियां सक्रिय है. इससे पहले भारत के सबसे वांछित अवैध हथियार सप्लायर शेख सलीम उर्फ ‘सलीम पिस्टल’ को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और नेपाल पुलिस के एक संयुक्त ऑपरेशन में अगस्त 2025 में नेपाल से गिरफ्तार किया गया था. सलीम के विषय में सूत्र बताते हैं कि वह पाकिस्तान से भारत में अत्याधुनिक हथियारों की सप्लाई करता था और उनका कनेक्शन कई चरमपंथी गुटों सहित अलगाववादियों और आतंकियों से था. जांच में यह भी सामने आया था कि उनका संबंध पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी(आईएसआई) और दाऊद इब्राहिम से है. जांच एजेंसियों ने उसके लोकेशन का पता लगाकर दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को नेपाल भेजा और वहां की पुलिस के सहयोग से उसे गिरफ्तार किया. दिल्ली का रहने वाला सलीम, साल 2000 से ही क्राइम की दुनिया में एक्टिव था, पहले वह छोटा अपराध करता था, लेकिन बाद में वह अपना गुट बनाकर लूट सहित कई गंभीर अपराधों में लिप्त हो गया. एक बार उसे गिरफ्तार भी किया गया था, लेकिन वह विदेश भाग गया. बाद में उसे नेपाल से गिरफ्तार किया गया.
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