High Court: पति यौन इच्छा अपनी पत्नी से व्यक्त नहीं करेगा तो कहां जाएगा, जानें हाई कोर्ट ने क्या कहा

Published by : Amitabh Kumar Updated At : 12 Oct 2024 2:05 PM

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High Court: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि प्राथमिकी और पीड़िता के बयान पर गौर करने से साफ है कि यदि कोई मारपीट की गई तो वह दहेज की मांग के लिए नहीं, बल्कि यौन इच्छा पूरी करने से मना करने के लिए की गई.

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High Court: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक व्यक्ति के खिलाफ दहेज के आरोपों को खारिज किया है. कोर्ट ने मामले को लेकर कहा कि आरोप निराधार हैं और व्यक्तिगत विवादों से प्रेरित हैं. कोर्ट ने इस मामले में कहा कि नैतिक रूप से सभ्य समाज में व्यक्ति यौन इच्छा अपनी पत्नी से व्यक्त नहीं करेगा तो कहां जाएगा. न्यायमूर्ति अनीश कुमार गुप्ता ने प्रांजल शर्मा और दो अन्य के खिलाफ इस मामले को खारिज करते हुए कहा कि प्राथमिकी में प्रस्तुत साक्ष्य और गवाहों के बयान, दहेज के लिए उत्पीड़न के दावों का समर्थन नहीं करते.

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पाया कि प्राथमिक आरोप, दंपति के यौन संबंध से जुड़ी असहमतियों के आसपास केंद्रित हैं और ये विवाद दहेज की मांग से जुड़े नहीं हैं. कोर्ट ने कहा कि यह स्पष्ट है कि पक्षों के बीच यह विवाद यौन संबंध स्थापित नहीं होने को लेकर है जिसकी वजह से विपक्षी द्वारा प्राथमिकी दर्ज कराई गई और दहेज की मांग को लेकर झूठे एवं मनगढ़ंत आरोप लगाए गए.

हाई कोर्ट ने सवाल किया कि नैतिक रूप से सभ्य समाज में व्यक्ति यौन इच्छा अपनी पत्नी से या पत्नी अपनी यौन इच्छा पति से व्यक्त नहीं करेगी तो वे कहां जाएंगे. प्राथमिकी में प्रांजल शुक्ला पर दहेज की मांग करने और पत्नी से गाली गलौज करने के साथ ही उसे अश्लील फिल्में देखने और अप्राकृतिक यौन संबंध बनाने का आरोप लगाया गया हैं. कोर्ट ने कहा कि विश्वसनीय साक्ष्य से ये आरोप साबित नहीं हुए.

पत्नी के साथ अप्राकृतिक यौन संबंध बनाना चाहता है पति

इस मामले के तथ्यों के मुताबिक, मीशा शुक्ला का विवाह आवेदक प्रांजल शुक्ला के साथ हिंदू रीति रिवाज से सात दिसंबर, 2015 को हुआ था. मीशा ने अपने सास-ससुर मधु शर्मा और पुण्य शील शर्मा पर दहेज मांगने का आरोप लगाया. हालांकि, प्राथमिकी में यह भी स्पष्ट किया गया कि शादी से पहले दहेज की कोई मांग नहीं थी. प्राथमिकी में यह भी बताया गया कि प्रांजल शराब पीता और अश्लील फिल्में देखता. साथ ही वह अपनी पत्नी के साथ अप्राकृतिक यौन संबंध बनाने पर जोर देता और मना करने पर वह उस पर ध्यान नहीं देता. बाद में वह अपनी पत्नी को छोड़कर सिंगापुर चला गया.

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मारपीट यौन इच्छा पूरी करने से मना करने के लिए की गई

याचिकाकर्ता के वकील वरिष्ठ अधिवक्ता विनय शरण ने कहा कि प्राथमिकी में लगाए गए आरोप और विपक्षी के बयान शारीरिक संबंध को लेकर हैं और विपक्षी (पत्नी) द्वारा बयान में मारपीट को लेकर जो आरोप लगाए गए हैं वे याचिकाकर्ता की यौन इच्छा पूरी नहीं करने के संबंध में हैं ना कि दहेज की मांग के लिए. कोर्ट ने कहा कि प्राथमिकी और पीड़िता के बयान पर गौर करने से साफ है कि यदि कोई मारपीट की गई तो वह दहेज की मांग के लिए नहीं, बल्कि यौन इच्छा पूरी करने से मना करने के लिए की गई. अदालत ने तीन अक्टूबर को दिए अपने आदेश में शुक्ला के खिलाफ मामले को रद्द कर दिया. कोर्ट ने कहा कि हमारे विचार से मौजूदा प्राथमिकी कुछ और नहीं बल्कि दहेज की मांग को लेकर मनगढ़ंत कहानी है.
(इनपुट पीटीआई)

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By Amitabh Kumar

अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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