Relaxes Two-Child Norm : इन लोगों को दी गई दो बच्चे के नियम में छूट, सरकार का बड़ा फैसला

Published by : Amitabh Kumar Updated At : 06 Dec 2025 7:56 AM

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असम में दो बच्चों के नियम में ढील दी गई (Photo: AI)

Relaxes Two-Child Norm : असम सरकार ने कुछ समुदायों के लिए दो-बच्चों की नीति में बदलाव किया है. अब ये समुदाय सरकारी नौकरी और चुनाव में तीन बच्चों तक की अनुमति पा सकेंगे. यह फैसला उनकी पहचान बचाने और उनकी संख्या घटने से रोकने के लिए किया गया है.

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Relaxes Two-Child Norm : असम सरकार ने शुक्रवार को दो बच्चों की नीति में संशोधन करते हुए अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी), चाय बागान, मोरन और मटक समुदायों को इसमें छूट दे दी. अधिसूचना के अनुसार, इन समूहों के तीन बच्चों तक वाले सदस्य सरकारी नौकरी, चुनाव लड़ने और स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) के लिए प्रोत्साहन प्राप्त करने के पात्र होंगे.

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के आयुक्त एवं सचिव पतिबंडला अशोक बाबू द्वारा हस्ताक्षरित अधिसूचना में कहा गया कि कुछ चुनिंदा समुदायों के लिए दो बच्चों की शर्त को समाप्त करने और इसे तीन बच्चों तक शिथिल करने का आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है. उन्होंने कहा कि असम के राज्यपाल को असम की जनसंख्या और महिला सशक्तीकरण नीति (संशोधन), 2025 की घोषणा करते हुए प्रसन्नता हो रही है.

जनसंख्या एवं महिला सशक्तीकरण नीति, 2017 में संशोधन

आदेश में कहा गया है कि असम की जनसंख्या एवं महिला सशक्तीकरण नीति, 2017 में उसके अनुसार संशोधन किया गया है. असम मंत्रिमंडल ने गत 23 अक्टूबर को सरकारी नौकरी पाने के संबंध में एसटी, चाय बागान, मोरन और मटक समुदायों के लिए दो बच्चों के मानदंड को समाप्त करने का फैसला किया था और शुक्रवार को इस संबंध में अधिसूचना जारी की गई.

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मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने क्या कहा?

राज्य मंत्रिमंडल की बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने कहा था कि सरकार ने इन समूहों को विलुप्त होने से बचाने के लिए उन्हें जनसंख्या नियंत्रण मानदंडों के दायरे से बाहर रखने का निर्णय लिया है. उन्होंने कहा था कि यदि हम इस नीति पर अड़े रहे तो ये आबादी अपनी विशिष्ट पहचान खो देगी और अगले 50 वर्षों में धीरे-धीरे विलुप्त हो जाएगी. असम लोक सेवा (सीधी भर्ती में छोटे परिवार के मानदंडों का अनुप्रयोग) नियम, 2019 के अनुसार, दो-बच्चे की नीति जनवरी 2021 से लागू की गई.

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अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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