मशहूर लेखिका सादिया देहलवी का निधन
Author : Agency Published by : Prabhat Khabar Updated At : 06 Aug 2020 5:00 PM
दिल्ली की मशहूर लेखिका एवं कार्यकर्ता सादिया देहलवी का कैंसर से लंबी जंग लड़ने के बाद निधन हो गया. वह 63 वर्ष की थीं. सादिया ने बुधवार को अपने घर पर अंतिम सांस ली. हाल ही में उन्हें शहर के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था.
नयी दिल्ली : दिल्ली की मशहूर लेखिका एवं कार्यकर्ता सादिया देहलवी का कैंसर से लंबी जंग लड़ने के बाद निधन हो गया. वह 63 वर्ष की थीं. सादिया ने बुधवार को अपने घर पर अंतिम सांस ली. हाल ही में उन्हें शहर के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था.
सादिया को बृहस्पतिवार को शहर के सिदिपुर कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक किया गया. उनके परिवार में उनका बेटा अरमान अल देहलवी है . दिल्ली की दीवानी सादिया के ट्विटर हैंडल पर उनका परिचय शहर के लिए उनका प्रेम दर्शाता है.
उस पर लिखा है, ‘‘स्तंभकार … ‘सूफीइज्म : द हार्ट ऑफ़ इस्लाम’ और ‘द सूफी कोर्टयार्ड: दरगाह ऑफ दिल्ली’ की लेखक. मैं दिल्ली में रहती हूं, एक शहर जिससे मुझे प्यार है.” प्रख्यात इतिहासकार एस. इरफान हबीब ने ट्वीट किया, ‘‘ सादिया देहलवी के निधन की खबर सुनकर दुखी हूं. दिल्ली की एक प्रसिद्ध सांस्कृतिक शख्सियत, मेरी अच्छी दोस्त और एक बेहतरीन इंसान. भगवान आपकी आत्मा को शांति दे.” शाही ‘शमा’ परिवार से ताल्लुक रखने वाली सादिया ने महिलाओं की उर्दू पत्रिका ‘बानो’ का सम्पादन किया.
उनके दादा हाफिज यूसुफ देहलवी ने 1938 में प्रतिष्ठित उर्दू फिल्म और साहित्यिक मासिक पत्रिका शमा की शुरुआत की थी. सादिया ने 40 से अधिक वर्षों तक महिलाओं, अल्पसंख्यकों, इस्लामी आध्यात्मिकता और दिल्ली की विरासत और संस्कृति के बारे में लिखा. कई प्रतिभाओं की धनी सादिया ने ‘अम्मा एंड फैमिली’ (1995) सहित कई टेलीविजन धारावाहिक तथा वृत्तचित्रों का निर्माण किया और कई की पटकथा भी लिखी. ‘अम्मा एंड फैमिली’ में मशहूर अदाकारा जोहरा सहगल ने भी काम किया था.
वह दिवंगत लेखक खुशवंत सिंह की करीबी मित्र थी. सिंह ने अपनी किताब ‘नॉट ए नाइस मैन टू नो’ उनको समर्पित की थी. उन्होंने लिखा था, ‘‘ सादिया देहलवी के लिए, जिन्होंने मुझे जो स्नेह और शोहरत दी उसका में पात्र नहीं था.” सिंह की किताब ‘मेन एंड वीमेन इन माय लाइफ’ में भी एक अध्याय सादिया को समर्पित था और उसके कवर पर सादिया की तस्वीर भी है. सादिया की मदद से पुस्तक ‘ये उन दिनों की बात है’ लिखने वाले यासिर अब्बासी ने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘‘उनका परिवार बेहद शानदार था.
अगर मैं कहूं कि उस परिवार ने भारत में उर्दू को जिंदा रखने की हमेशा अगुवाई की तो यह अतिशयोक्ति नहीं होगी.” अब्बासी ने कहा, “शमा समूह के तहत, उन्होंने बानो और खिलौना सहित अन्य पत्रिकाएं शुरू कीं. आज हम सोच भी नहीं सकते कि शमा कितनी लोकप्रिय पत्रिका थी. यह हर उर्दू बोलने वाले घर में मिलती थी.” सादिया को भी अपने परिवार की तरह खाने का बेहद शौक था.
इस परिवार ने दिलीप कुमार, राज कपूर और वहीदा रहमान जैसे बॉलीवुड सितारों की अपने ‘हवेली’ में मेजबानी की. अब्बासी ने कहा, “दिल्ली के चाणक्यपुरी के डिप्लोमैटिक एन्क्लेव में देहलवी का विशाल घर शमा कोठी के नाम से जाना जाता था, जहां कई फिल्मी सितारे आया करते थे. उनके यहां की पार्टियों की पूरे शहर में चर्चा होती थी.
यह परिवार खाने का बेहद शौकीन था. सादिया उनके यहां की पार्टियों में परोसे जाने वाले कई कबाबों के बारे में अक्सर बात करती थीं.” सादिया ने अपनी मां के साथ 1979 में दिल्ली के चाणक्यपुरी में एक रेस्तरां ‘अल कौसर’ भी खोला, जो अपने कबाब के लिये बेहद प्रसिद्ध था. उन्होंने दिल्ली की पाक कला के इतिहास पर 2017 में एक किताब लिखी थी, जिसका शीर्षक है ‘जैस्मीन एंड जिन्स: मेमोरिज एंड रेसिपीज ऑफ माय डेल्ही’ था.
Posted By – Pankaj Kumar Pathak
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