Agriculture: केंद्र ने राज्यों काे उम्मीद से कम बारिश होने के अनुमान को देखते हुए अलर्ट रहने का दिया निर्देश

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Agriculture: केंद्र ने राज्यों काे उम्मीद से कम बारिश होने के अनुमान को देखते हुए अलर्ट रहने का दिया निर्देश

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि चुनौती सिर्फ वर्षा के पूर्वानुमान की नहीं, बल्कि जमीनी तैयारियों को लेकर भी है. सरकार की कोशिश मौसम की मार का असर खेत और किसान पर कम से कम हो इसके लिए तैयार रखने की है. कम बारिश के अनुमान के बावजूद देश के प्रमुख जलाशयों में जल भंडारण सामान्य स्तर से 127.01 फीसदी है.

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Agriculture: देश में इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून के सामान्य से कम रहने और अल नीनो के असर के कारण सामान्य से कम बारिश होने का अनुमान जताया गया है. मौसम विभाग के अनुमान को देखते हुए केंद्र सरकार अलर्ट मोड में आ गयी है. पश्चिम एशिया संकट के कारण वैश्विक बाजार में खाद की बढ़ती कीमत और सामान्य से कम बारिश होने से कृषि क्षेत्र पर असर पड़ना तय माना जा रहा है. पश्चिम एशिया संकट के कारण खाद की आपूर्ति पर असर पड़ा है और संकट के बाद भारत सरकार ने घरेलू स्तर पर खाद की जरूरत को पूरा करने के लिए 25 लाख मीट्रिक टन की खरीद की है. लेकिन इसके लिए केंद्र सरकार को पश्चिम एशिया संकट के कारण पहले के मुकाबले 50 फीसदी अधिक रकम चुकानी पड़ी है. किसानों को वैश्विक स्तर पर बढ़ी कीमतों का बोझ नहीं पड़े, इसके लिए कम कीमत पर खाद मुहैया करायी जा रही है. वहीं दूसरी ओर कम बारिश के अनुमान से कृषि क्षेत्र पर प्रतिकूल असर पड़ना तय माना जा रहा है. इस संकट को देखते हुए मंगलवार को केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की. बैठक में मौसम पूर्वानुमान, जल उपलब्धता और बीजों की व्यवस्था को लेकर राज्यों की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की गई.

किसानों को हर संभव मदद देगी सरकार

मौसम विभाग ने इस साल मौसमी वर्षा दीर्घकालीन औसत के मुकाबले लगभग 92 फीसदी रहने का अनुमान जताया है. देश में अभी भी कृषि उत्पादन मानसून पर निर्भर है और मौसम विभाग के अनुमान के बाद केंद्र सरकार एक्शन मोड में आ गयी है. सरकार ने किसानों को हर संभव मदद देने का भरोसा दिया है. केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि चुनौती सिर्फ वर्षा के पूर्वानुमान की नहीं, बल्कि जमीनी तैयारियों को लेकर भी है. सरकार की कोशिश मौसम की मार का असर खेत और किसान पर कम से कम हो इसके लिए तैयार रखने की है. कम बारिश के अनुमान के बावजूद देश के प्रमुख जलाशयों में जल भंडारण सामान्य स्तर से 127.01 फीसदी है. कृषि मंत्री ने कहा कि जलाशयों में पानी की पर्याप्त मात्रा में उपलब्धता के बावजूद इसका संतुलित उपयोग होना चाहिए ताकि सभी किसानों को पानी मिल सके. 

बैठक में जिला स्तर पर आकस्मिक फसल योजना का निर्माण स्थानीय स्थिति के अनुसार करने, खरीफ और रबी दोनों मौसमों के लिए जरूरत से अधिक बीज उपलब्ध कराने और  ‘राष्ट्रीय बीज रिजर्व’ तैयार रखने का निर्देश दिया गया. इसके अलावा यदि किसी क्षेत्र में बारिश के बीच लंबा सूखा अंतराल (ड्राई स्पेल) आता है, तो किसानों को तुरंत कम अवधि वाली और कम पानी में तैयार होने वाली सूखा-सहनशील वैकल्पिक किस्मों के बीज मुहैया कराने की व्यवस्था तैयार करने को कहा गया. कीट-रोग प्रबंधन और मौसम की मार से बचने के लिए कॉल सेंटर, मोबाइल संदेश और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए किसानों को सलाह देने, ग्रामीण विकास मंत्रालय के सहयोग से जल-संरक्षण, खेत-तालाब और नमी बनाए रखने वाली स्थानीय संरचनाओं के निर्माण पर तुरंत काम शुरू करने को कहा गया है.

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Anjani Kumar Singh

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By Anjani Kumar Singh

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