राम मंदिर ट्रस्ट पर फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा निर्मोही अखाड़ा, 2019 के फैसले के पूर्ण पालन और ट्रस्ट के पुनर्गठन की मांग

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सुप्रीम कोर्ट ( स्रोत-  एएनआई )

सुप्रीम कोर्ट ( स्रोत- एएनआई )

Ram Mandir Donation Theft Case : निर्मोही अखाड़ा ने राम मंदिर के प्रबंधन में उचित प्रतिनिधित्व और ट्रस्ट के पुनर्गठन के लिए सुप्रीम कोर्ट में नई याचिका दायर की है. अखाड़े का आरोप है कि 2019 के फैसले की भावना का पालन नहीं हो रहा है.

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Ram Mandir Donation Theft Case : राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले में पक्षकार रहे निर्मोही अखाड़े ने सुप्रीम कोर्ट में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के खिलाफ याचिका दाखिल की. एएनआई न्यूज एजेंसी के मुताबिक, अखाड़े 9 नवंबर 2019 के अयोध्या फैसले को पूरी तरह लागू कराने की मांग की है. अखाड़े का कहना है कि अदालत के फैसले के अनुरूप उसे राम मंदिर के प्रबंधन में उचित जिम्मेदारी और प्रतिनिधित्व की भूमिका अब तक नहीं मिला है.

ट्रस्ट में उचित प्रतिनिधित्व की मांग

श्री पंच रामानंदी निर्मोही अखाड़ा ने अपने सरपंच महंत राजारामचंद्राचार्य अतीत गुरु महंत रघुनाथ दासजी महाराज के माध्यम से दायर याचिका दायर की है. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा गठित श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में अखाड़े को वह स्थान नहीं दिया गया, जिसकी अपेक्षा सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में की थी.

2019 के फैसले का हवाला

याचिका में संविधान पीठ के फैसले के पैरा 804 और 805(4) का उल्लेख किया है. अखाड़ा परिषद कहा कि अदालत ने निर्मोही अखाड़े की ऐतिहासिक भूमिका को देखते हुए मंदिर प्रबंधन में उचित भागीदारी देने की बात कही थी. अखाड़े का दावा है कि कई साल बीत जाने के बाद भी इस निर्देश का पालन नहीं हुआ.

ट्रस्ट के पुनर्गठन और पारदर्शिता की मांग

निर्मोही अखाड़े ने आरोप लगाया है कि वर्तमान ट्रस्ट निजी संस्था की तरह काम कर रहा है. इसलिए उसने अदालत से ट्रस्ट को सार्वजनिक स्वरूप देने, नियुक्तियों के स्पष्ट नियम बनाने, स्वतंत्र समिति से समीक्षा कराने और वित्तीय लेन-देन का फॉरेंसिक ऑडिट कराने की मांग की है. इन सभी आरोपों पर अभी सुप्रीम कोर्ट ने कोई फैसला नहीं दिया है.

धार्मिक परंपराओं और मूल विग्रह का मुद्दा

याचिका में अखाड़े ने राम मंदिर में पूजा, सेवा, भोग और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों में अपनी पारंपरिक भूमिका बहाल करने की भी मांग की है. इसके साथ ही मूल विग्रहों को गर्भगृह में पुनर्स्थापित करने या वैकल्पिक रूप से उन्हें अखाड़े को सौंपने की अपील की गई है. अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के अगले कदम पर सभी की नजर रहेगी.

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सत्येन्द्र गिरि

लेखक के बारे में

By सत्येन्द्र गिरि

सत्येन्द्र गिरि प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. यहां वे मुख्य रूप से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विषयों से जुड़ी खबरों का लेखन करते हैं. सरल, तथ्यात्मक और पाठक-केंद्रित लेखन उनकी प्रमुख पहचान है. उन्होंने एशिया के प्रतिष्ठित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से मास्टर ऑफ आर्ट्स इन मास कम्युनिकेशन (बैच 2023–25) की डिग्री प्राप्त की है.

पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान उन्होंने समाचार लेखन, डिजिटल मीडिया, रिपोर्टिंग और समसामयिक विषयों की गहन समझ विकसित की. पत्रकारिता के क्षेत्र में उनके पास एक वर्ष का पेशेवर अनुभव है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अमर उजाला के गोरखपुर एडिशन से की, जहां समाचार लेखन और रिपोर्टिंग की बारीकियों को नजदीक से सीखने और समझने का अवसर मिला. इसके बाद उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता में कदम रखते हुए प्रभात खबर डिजिटल से जुड़कर देश-विदेश की महत्वपूर्ण खबरों को पाठकों तक पहुंचाने का कार्य शुरू किया.

सत्येन्द्र की विशेष रुचि इतिहास, अंतरराष्ट्रीय संबंध, राजनीति, कूटनीति और समसामयिक घटनाक्रम से जुड़े विषयों में है. वे जटिल और गंभीर मुद्दों को भी सरल, संतुलित और विश्वसनीय तरीके से प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं. राष्ट्रीय और वैश्विक घटनाओं पर उनकी गहरी नजर रहती है तथा वे तथ्यपरक और निष्पक्ष पत्रकारिता को अपनी कार्यशैली का आधार मानते हैं. वे मूल रूप से उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले के निवासी हैं.

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