Explainer: अटल बिहारी वाजपेयी प्रखर वक्ता ही नहीं, वाकपटुता के भी थे धनी, पढ़ें रोचक किस्से

Chandigarh: Students form a human chain to resemble a hoisted Indian national flag as they celebrate 'Azadi Ka Amrit Mahotsav' celebrations to commemorate 75 years of Indian independence, in Chandigarh, Saturday, Aug. 13, 2022. The students created a Guinness World Record for their formation of World's Largest Human Image of a Waving National Flag. (PTI Photo)(PTI08_13_2022_000236B)
जब देश की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी थी. उस समय उत्तर प्रदेश में दलितों पर अत्याचार की घटना के खिलाफ अटल बिहारी वाजपेयी ने पदयात्रा की थी. तब उस समय उनके मित्र अप्पा घटाटे ने पूछा था, पदयात्रा कब तक चलेगी. तब उस सवाल के जवाब में अटल जी ने कहा था, जब तक पद नहीं मिलता, तब तक यात्रा चलती रहेगी.
देश के पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी (atal bihari vajpayee) की आज पुण्यतिथि है. इस मौके पर उन्हें सभी याद कर रहे हैं. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित सभी दिग्गज नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी. भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी एक दिग्गज नेता होने के साथ-साथ एक प्रखर वक्ता और अपनी वाकपटुता के लिए जाने जाते थे. वाजपेयी जी से जुड़ी कई किस्से हैं, जिसको आज भी याद किया जाता है. अपनी पार्टी वाले तो वाजपेयी जी का सम्मान करते ही थे, विरोधी दल के लोग भी उन्हें पूरे सम्मान के साथ सुनते थे. आइये अटल जी की वाकपटुका से जुड़े कुछ किस्सों को याद करें.
1. इस बारात के दूल्हा वीपी सिंह हैं
अटल बिहारी वाजपेयी अपनी वाकपटुता के चलते कई बार गंभीर सवालों से भी बचकर निकल जाते थे. यह उनकी कला थी. इंदिरा गांधी की हत्या के बाद जब कांग्रेस 401 सीटें जीतकर, प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता पर आयी थी, तो उस समय लोकसभा में लालकृष्ण आडवाणी ने कहा था, यह लोकसभा नहीं, शोकसभा के चुनाव थे. उसी समय अटल जी ने अगले लोकसभा चुनाव के लिए तैयारी शुरू कर दी थी और कांग्रेस को हराने के लिए वीपी सिंह के साथ गठबंधन जरूरी था. बहुत समझाने के बाद वीपी सिंह गठबंधन के लिए राजी हुए. प्रेस कॉन्फ्रेंस में जब एक पत्रकार ने अटल जी से पूछा कि चुनाव के बाद अगर भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनती है, तो आप प्रधानमंत्री पद संभालने के लिए तैयार हैं. इसपर अटल जी ने मुस्कुराते हुए कहा, इस बारात के दूल्हा वीपी सिंह हैं.
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2. एक बार अटज जी ने कहा था, अब समझ आया, ईश्वर की मूर्ति पत्थर की क्यों होती है
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को एक सभा में तीन लाख रुपये भेंट किये जाने थे. मेहनत से पैसे जुटाने वाले कार्यकर्ताओं को एक-एक कर वाजपेयी जी को माला पहनाने का अवसर दिया गया. फिर क्या था, समर्थकों की भीड़ वाजपेयी जी को माला पहनाने के लिए उमड़ पड़ी. बार-बार वाजपेयी जी को माला उतारकर रखना पड़ रहा था, तब उस समय उन्होंने तपाक से कहा था कि अब समझ आया कि ईश्वर की मूर्ति पत्थर की क्यों होती है. ताकि वह भक्तों के प्यार को सहन कर सकें. इसपर वहां मौजूद लोग हंस पड़े थे.
3. पद यात्रा पर वाजपेयी जी ने दिया था मजेदार जवाब
जब देश की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी थी. उस समय उत्तर प्रदेश में दलितों पर अत्याचार की घटना के खिलाफ अटल बिहारी वाजपेयी ने पदयात्रा की थी. तब उस समय उनके मित्र अप्पा घटाटे ने पूछा था, पदयात्रा कब तक चलेगी. तब उस सवाल के जवाब में अटल जी ने कहा था, जब तक पद नहीं मिलता, तब तक यात्रा चलती रहेगी.
4. वाजपेयी जी ने पंडित जवाहरलाल नेहरू पर भी किया था मजेदार कमेंट्स
अटल बिहारी वाजपेयी पहली बार 1957 में लोकसभा चुनाव जीतकर संसद भवन पहुंचे थे. उस समय उन्हें संसद में अधिक बोलने का मौका नहीं मिलता था. लेकिन उन्होंने अपनी अच्छी हिंदी के कारण बहुत जल्द पहचान बना ली थी. खुद तात्कालिक प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू भी वाजपेयी जी को बोलते हुए सुनना पसंद करते थे. एक बार की बात है, जब नेहरू जी ने जनसंघ की आलोचना की थी, तो अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा था, मैं जानता हूं पंडित जी शीर्षासन करते हैं. लेकिन मेरी पार्टी की तस्वीर उल्टी न देखें. अटल बिहारी वाजपेयी के इस जवाब पर खुद नेहरू जी भी हंसने लगे थे.
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