Election Commission: बिहार के राजनीतिक दलों के बीएलए को प्रशिक्षण दे रहा है चुनाव आयोग

Published by : Anjani Kumar Singh Updated At : 16 Apr 2025 7:22 PM

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चुनाव आयोग ने राज्य में आगामी चुनाव को देखते हुए बूथ लेवल एजेंटों (बीएलए) का प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू कर दिया है. बिहार के 10 मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों से जुड़े लगभग 280 बीएलए दिल्ली में आयोजित 2 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में शिरकत कर रहे हैं. यह कार्यक्रम इंडिया इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर डेमोक्रेसी एंड इलेक्शन मैनेजमेंट, आईआईआईडीईएम आयोजित कर रहा है.

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Election Commission: बिहार में अक्टूबर-नवंबर में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों के साथ चुनाव आयोग ने भी तैयारी शुरू कर दी है. चुनाव आयोग ने राज्य में आगामी चुनाव को देखते हुए बूथ लेवल एजेंटों (बीएलए) का प्रशिक्षण शुरू कर दिया है. बिहार के 10 मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों से जुड़े लगभग 280 बीएलए दिल्ली में आयोजित 2 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में शिरकत कर रहे हैं. यह कार्यक्रम इंडिया इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर डेमोक्रेसी एंड इलेक्शन मैनेजमेंट, आईआईआईडीईएम आयोजित कर रहा है.

बीएलए की भूमिका काफी महत्वपूर्ण

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि इस तरह का पहला प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया जा रहा है. इस दौरान दोनों चुनाव आयुक्त डॉक्टर सुखबीर सिंह संधू और डॉक्टर विवेक जोशी भी मौजूद रहे. इस प्रशिक्षण की परिकल्पना 4 मार्च, 2025 को आयोजित मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) सम्मेलन के दौरान की गयी थी. ज्ञानेश कुमार ने कहा कि चुनाव प्रक्रियाओं में बीएलए की भूमिका काफी मायने रखती है. यह प्रशिक्षण कार्यक्रम बीएलए को जनप्रतिनिधित्व कानून 1950 और 1951, मतदाता पंजीकरण नियम 1960, चुनाव संचालन नियम 1961 और समय-समय पर निर्वाचन आयोग के जारी किए गए मैनुअल, दिशा-निर्देश और निर्देश का पालन करने में मदद करेगा.  

चुनावी पारदर्शिता के लिए आयोग हुआ सक्रिय


प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान बीएलए को कानूनी ढांचे के अनुसार उनकी नियुक्ति, भूमिका और जिम्मेदारियों की जानकारी दी जायेगी. साथ ही उन्हें चुनाव प्रक्रियाओं के विभिन्न पहलुओं से परिचित कराया गया. जैसे मतदाता सूचियों की तैयारी, सूची में संशोधन तथा संबंधित प्रपत्र और प्रारूप शामिल हैं. बीएलए को मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल नियुक्त करते हैं और वे जनप्रतिनिधित्व कानून 1950 के प्रावधानों के अनुसार त्रुटि-रहित मतदाता सूची सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

बीएलए को जनप्रतिनिधित्व कानून 1950 की धारा 24(ए) और 24(बी) के तहत प्रथम और द्वितीय अपील के प्रावधान का उपयोग करना भी सिखाया जाएगा ताकि वे प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची से असंतुष्ट होने पर उचित कार्रवाई कर सकें.गौरतलब है कि हाल में कई विपक्षी दलों ने मतदाता सूची में गड़बड़ी, फर्जी पहचान पत्र और चुनावी पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाया है. विपक्षी दलों के आरोप के बाद आयोग ने देश स्तर पर राजनीतिक दलों के साथ व्यापक संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया था. साथ ही फर्जी वोटर कार्ड पर रोक लगाने के लिए इसे आधार कार्ड से जोड़ने का निर्णय लिया है. 

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