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Chinese Loan App Case: चीनी ऋण ऐप के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, ईडी की छापेमारी में 17 करोड़ रुपये जब्त

Updated at : 03 Sep 2022 4:22 PM (IST)
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Chinese Loan App Case: चीनी ऋण ऐप के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, ईडी की छापेमारी में 17 करोड़ रुपये जब्त

प्रवर्तन निदेशालय ने कहा कि छापेमारी में चीन के व्यक्तियों द्वारा नियंत्रित इन कंपनियों के मर्चेंट आईडी और बैंक खातों में जमा 17 करोड़ रुपये जब्त किए गए हैं.

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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शनिवार को कहा कि चीनी नागरिकों के नियंत्रण वाले स्मार्टफोन आधारित गैरकानूनी त्वरित ऋण आवंटन के खिलाफ जारी जांच के सिलसिले में ऑनलाइन भुगतान मंचों रेजरपे, पेटीएम और कैशफ्री के बेंगलुरु परिसरों पर छापेमारी की जा रही है.

चीनी ऐप के खिलाफ जांच अभी जारी

जांच एजेंसी ने बताया कि तलाशी का यह अभियान कर्नाटक की राजधानी में स्थित इन कंपनियों के छह परिसरों में शुक्रवार को शुरू हुआ था और अब भी यह अभियान जारी है. ईडी ने एक बयान में कहा, चीन के व्यक्तियों के नियंत्रण या परिचालन वाले रेजरपे प्राइवेट लिमिटेड, कैशफ्री पेमेंट्स, पेटीएम पेमेंट सर्विस लिमिटेड और अन्य कंपनियों में तलाशी की कार्रवाई की गई.

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चीनी ऐप कंपनियों के मर्चेंट आईडी और खातों से 17 करोड़ रुपये जब्त

प्रवर्तन निदेशालय ने कहा कि छापेमारी में चीन के व्यक्तियों द्वारा नियंत्रित इन कंपनियों के मर्चेंट आईडी और बैंक खातों में जमा 17 करोड़ रुपये जब्त किए गए हैं.

क्या है मामला

एजेंसी ने आरोप लगाया कि ये कंपनियां भारतीय नागरिकों के फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल करके उन्हें फर्जी तरीके से निदेशक बनाती हैं जबकि इन कंपनियों का नियंत्रण एवं परिचालन चीन के लोग करते हैं। उसने बताया कि जांच के दायरे में आई ये कंपनियां भुगतान सेवा कंपनियों और बैंकों से जुड़ी मर्चेंट आईटी या खातों का इस्तेमाल करके अपराध का धन जुटा रही थीं और इन कंपनियों ने जो पते दिए थे वे भी फर्जी हैं.

चीनी ऋण एप की जालसाजी को लेकर सरकार मूकदर्शक क्यों बनी हुई है: कांग्रेस

कांग्रेस ने दावा किया कि चीनी ऋण एप की जालसाजी के कारण कई लोग आत्महत्या करने को मजबूर हुए हैं, लेकिन सरकार ने कोई उचित कार्रवाई नहीं की. पार्टी प्रवक्ता गौरव वल्लभ ने सवाल किया कि केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मामले पर मूकदर्शक क्यों बने हुए हैं? उन्होंने संवाददाताओं से कहा, पिछले 2 साल में चीनी ऋण एप, जिनकी संख्या लगभग 1100 हो चुकी है, उनमें से 600 अवैध हैं. 2017-2020 के बीच इन ऋण एप से डिजिटल ट्रांजेक्शन में 12 गुना की वृद्धि हुई है. वल्लभ ने दावा किया, चीनी ऋण एप के कारण देश के 52 लोग आत्महत्या कर चुके हैं. उनका कहना था, कोरोना के बाद मध्यम व निम्न आय वर्ग के परिवारों को भयंकर आर्थिक चोट लगी. एक तो उनकी नौकरी गई ऊपर से महंगाई की मार. इस दौरान रोजमर्रा के खर्च के लिए वे इन चीनी लोन एप के शिकंजे में फंस गए.

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया, चीनी ऋण ऐप के खिलाफ हो रही है बड़ी कार्रवाई

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद के बीते मानसून सत्र के दौरान राज्यसभा में कहा था कि सरकार संदिग्ध ऋण एप के खिलाफ कार्रवाई कर रही है. उन्होंने कहा था कि उन भारतीय लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा रही है जिन्होंने ऐसे एप को स्थापित करने में मदद दी है. वित्त मंत्री ने बताया था कि ज्यादातर संदिग्ध एप एक विशेष देश से जुड़े हैं और ऋण लेने वाले कई लोगों को परेशान किया जा रहा है और इन एप के जरिए पैसे उगाहे जा रहे हैं. मंत्री से चीनी कंपनियों से जुड़ी संदिग्ध डिजिटल ऋण एप को लेकर सवाल किया गया था जो ऋण देने में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के दिशानिर्देशों का पालन नहीं करते हैं.

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