इबोला का कोई पक्का इलाज नहीं, मृत्यु दर ज्यादा; डॉ रणदीप गुलेरिया ने बचाव का तरीका बताया

डॉ रणदीप गुलेरिया, फोटो ANI एक्स
Ebola Virus: अफ्रीका के कुछ हिस्सों में खासकर कांगो में इबोला ने तबाही मचा दी है. अब तक 904 संक्रमण के मामले सामने आ चुके हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया है. हालांकि भारत में इसके मामले में अब तक सामने नहीं आए हैं. इस बीच मेदांता के डॉ रणदीप गुलेरिया ने इबोला से बचाव के उपाय बताए हैं.
Ebola Virus: मेदांता गुरुग्राम में इंटरनल मेडिसिन, रेस्पिरेटरी और स्लीप मेडिसिन के चेयरमैन डॉ रणदीप गुलेरिया ने इबोला संक्रमण पर कहा, अगर हम इन्फेक्शन कंट्रोल के तरीकों का पालन करें और किसी इन्फेक्टेड व्यक्ति के संपर्क में न आएं, तो इन्फेक्शन होने की कोई संभावना नहीं है. इबोला वायरस का इन्क्यूबेशन पीरियड 2-21 दिन होता है.
इबोला का कोई पक्का इलाज नहीं: रणदीप गुलेरिया
डॉ रणदीप गुलेरिया ने कहा- इबोला का कोई पक्का इलाज नहीं है, जिसकी वजह से मृत्यु दर ज्यादा होती है, लेकिन लोग ठीक भी हो जाते हैं. घबराने की कोई जरूरत नहीं है. इन्फेक्टेड जगहों पर गैर-जरूरी यात्रा से बचना चाहिए; उन इलाकों से आने वाले यात्रियों की स्क्रीनिंग की जानी चाहिए.
इबोला का क्या है लक्ष्ण?
डॉ गुलेरिया ने इबोला के लक्ष्ण को लेकर बताया- शुरुआती लक्षणों में बुखार, बदन दर्द, गले में खराश, उल्टी और दस्त शामिल हैं. गंभीर लक्षणों में मुंह या मल से खून आना, या सांस लेने में दिक्कत होना शामिल हो सकता है.
भारत सरकार ने इबोला को लेकर जारी की एडवाइजरी
भारत सरकार ने अफ्रीका के कुछ हिस्सों में बंडिबुग्यो वायरस से फैल रहे इबोला संक्रमण के मद्देनजर नागरिकों को कांगो गणराज्य, युगांडा और दक्षिण सूडान की गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह दी है. भारत सरकार द्वारा 23 मई को जारी परामर्श में कहा गया कि कांगो गणराज्य और युगांडा से सटे देशों, जिनमें दक्षिण सूडान भी शामिल है, में संक्रमण फैलने का जोखिम अधिक आंका गया है. इसमें कहा गया है, भारत सरकार अपने सभी नागरिकों को कांगो गणराज्य, युगांडा और दक्षिण सूडान की गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह देती है.
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लेखक के बारे में
By अरबिंद कुमार मिश्रा
अरबिंद कुमार मिश्रा मुख्यधारा की पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वर्तमान में, वह प्रभात खबर डॉट कॉम (Prabhat Khabar) में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अरबिंद नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स कैटेगरी में अपनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं. गहरी रिसर्च पर आधारित स्पेशल स्टोरीज, रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' लिखना उनकी मुख्य यूएसपी (USP) है.
झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.
करियर का सफरनामा
अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.
प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग
खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:
34वें राष्ट्रीय खेल: झारखंड में आयोजित ऐतिहासिक 34वें नेशनल गेम्स की बेहतरीन और व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग.
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.
पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप (2018): भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की शानदार स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग.
पंचायतनामा: प्रभात खबर के इस खास विंग के लिए ग्रामीण इलाकों का दौरा कर कई प्रेरक 'सक्सेस स्टोरीज' लिखीं.
शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)
UGC NET: साल 2019 में यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की.
बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (BJMC): रांची विश्वविद्यालय से साल 2011 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की.
एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग' से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.
लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.
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