चाबहार पोर्ट पर हमला: अमेरिकी अटैक में भारत को करोड़ों रुपये का नुकसान? विदेश मंत्रालय ने दी पहली प्रतिक्रिया

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ( स्रोत- एएनआई )
Ministry of External Affairs : अमेरिका के हालिया हमलों के बाद भारत ने चाबहार पोर्ट की सुरक्षा पर पहली बार आधिकारिक बयान दिया है. विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारतीय टर्मिनल पूरी तरह सुरक्षित है और परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए बातचीत जारी है.
Ministry of External Affairs : अमेरिका के हालिया हमलों के बाद ईरान के रणनीतिक चाबहार पोर्ट को लेकर कई तरह की खबरें सामने आईं. एएआई न्यूज एजेंसी के मुताबिक, इस मामले में भारत ने पहली बार आधिकारिक तौर पर स्थिति स्पष्ट करते हुए प्रतिक्रिया दी. विदेश मंत्रालय कहा कि जिस टर्मिनल का संचालन भारत करता है, उसे किसी भी तरह का नुकसान नहीं पहुंचा है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि हमले से जुड़े कुछ मीडिया रिपोर्ट जरूर सामने आए हैं, लेकिन भारतीय टर्मिनल पूरी तरह सुरक्षित है.
अमेरिकी छूट खत्म, अब नई रणनीति पर काम
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि चाबहार पोर्ट के संचालन के लिए अमेरिका ने पहले प्रतिबंधों से छूट (Waiver) दी थी, लेकिन यह छूट कुछ समय पहले समाप्त हो चुकी है. इसके बाद भारत लगातार संबंधित पक्षों के साथ बातचीत कर रहा है ताकि इस महत्वपूर्ण परियोजना को आगे बढ़ाने का रास्ता निकाला जा सके. भारत का लक्ष्य है कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के बावजूद चाबहार परियोजना प्रभावित न हो.
भारत के लिए क्यों अहम है चाबहार पोर्ट?
चाबहार पोर्ट भारत की सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक परियोजनाओं में से एक है. इसके जरिए भारत पाकिस्तान को दरकिनार कर अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक व्यापारिक पहुंच बनाता है. यही वजह है कि अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने के बाद इस पोर्ट की सुरक्षा और भविष्य को लेकर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है.
युद्ध के बीच भारत का संतुलित संदेश
ईरान में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई और क्षेत्रीय तनाव के बीच भारत ने साफ संकेत दिया है कि वह अपने रणनीतिक और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए सक्रिय है. विदेश मंत्रालय का यह बयान ऐसे समय आया है जब मिडिल ईस्ट में संघर्ष लगातार बढ़ रहा है. भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि चाबहार टर्मिनल सुरक्षित है और परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए सभी संबंधित पक्षों के साथ बातचीत जारी रहेगी. इससे यह संदेश भी गया कि युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद भारत अपने दीर्घकालिक रणनीतिक हितों पर पूरी मजबूती से कायम है.
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By सत्येन्द्र गिरि
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