Republic Day 2022: क्या जानते हैं कि गैस चैंबर में रखी जाती है संविधान की मूल प्रति? जानिए कुछ रोचक बातें

15 जनवरी 1947 को अपना देश अंग्रेजी हुकूमत से आजाद हुआ था. 26 नवंबर 1949 तक भारत का संविधान बनकर तैयार हो गया था, मगर इसे 26 जनवरी 1950 को अपने देश में भारतीय संविधान लागू किया गया. इसके पीछे भी कई अहम तथ्य हैं.
Republic Day 2022 : आज 26 जनवरी है और आज के दिन में हम गणतंत्र दिवस मनाते हैं. गणतंत्र दिवस मनाने की अहम वजह यह है कि आज ही के दिन 26 जनवरी 1950 को अपने देश में भारतीय संविधान लागू किया गया था. 15 जनवरी 1947 को अपना देश अंग्रेजी हुकूमत से आजाद हुआ था. 26 नवंबर 1949 तक भारत का संविधान बनकर तैयार हो गया था और इसी दिन संविधान सभा ने इसे अंगीकार भी कर लिया था. आम तौर पर इतनी बातें, तो भारत के आम नागरिक को भी पता है, लेकिन आज 73वें गणतंत्र दिवस के मौके पर हम अपने भारतीय संविधान से जुड़ी कुछ रोचक बातें बताने जा रहे हैं.

भारत को आजाद होने के बाद 26 नवंबर 1949 को संविधान सभा ने भारतीय संविधान को अंगीकार लिया, लेकिन इसे लागू करने और हर साल गणतंत्र दिवस के तौर पर मनाए जाने की तारीख 26 जनवरी तय हुई. इसके पीछे एक अहम वजह थी. संविधान को लागू करने के लिए 26 जनवरी को दिन इसलिए चुना गया, क्योंकि 1930 में इसी दिन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने भारत को पूर्ण स्वराज घोषित किया था. इसलिए भारतीय संविधान को 20 साल बाद उसी दिन लागू करके पूरी दुनिया को यह संदेश दिया गया कि भारत एक लोकतांत्रिक और संवैधानिक देश है.
भारत का संविधान एक मामले में विश्व भर के देशों से अलग है और वह उसकी मूल प्रति है. भारतीय संविधान हाथ से बने कागज यानी लुगदी पर हाथ से ही लिखा हुआ है. देश के संविधान की मूल प्रति के हर पन्ने पर सोने की पत्तियों के फ्रेम बने हैं. हर अध्याय के आरंभिक पृष्ठ पर एक कलाकृति भी बनाई गई है.

आपको यह जानकर भी हैरानी होगी कि भारतीय संविधान की मूल प्रति को सोने की पत्तियों का फ्रेम बनाने और फिर उसे कलात्मक आकार देने का काम नंदलाल बोस ने किया था. कई अन्य पृष्ठों को भी बेहर राममनोहर सिन्हा द्वारा सुशोभित किया गया था, जिन्होंने या तो “राम” या “राममनोहर” के रूप में हस्ताक्षर किए थे। उन्होंने रेखा-चित्रों और स्वर्ण-कार्यों के निष्पादन में महत्वपूर्ण योगदान दिया.

भारतीय संविधान की मूल प्रति में 1857 की महान क्रांति के दो नायक महारानी लक्ष्मी बाई और टीपू सुल्तान की भी तस्वीर छपी है. इसके अलावा, नटराज शिव, महात्मा गौतम बुद्ध, शिवाजी महाराज, गुरु गोविंद सिंह, रामायण की आकृति, पृथ्वी पर गंगा को उतारने वाले भगीरथ और गंगा, मुगल बादशाह अकबर, कुरुक्षेत्र के मैदान में कृष्ण और अर्जुन, भगवान महावीर और सुभाष चंद्र बोस समेत कई प्रकार की तस्वीरें छपी हैं.

लुगदी पर हाथ से ही लिखे संविधान को संजोकर रखना मुश्किल काम है. इसके लिए संविधान का खास रखरखाव किया जाता है. संविधान की मूल प्रति को फलालेन के कपड़े में लपेटकर नेफ्थलीन बॉल्स के साथ रखा गया था.

आपको यह जानकर हैरानी होगी कि भारतीय संविधान की मूल प्रति को नाइट्रोजन गैस की एक चैंबर में रखा गया है. ये गैस चैंबर संसद भवन के पुस्तकालय में बनाया गया है. जिस समय भारत में संविधान का निर्माण किया गया था, उस समय इस गैस चैंबर को वैज्ञानिक विधि से तैयार किया गया था.
भारतीय संविधान की मूल प्रति को सबसे पहले फलालेन के कपड़े में रखा गया, लेकिन पाया गया कि संविधान की प्रतियां सुरक्षित नहीं है. वैज्ञानिकों ने दुनिया के अन्य देशों में संविधानों को किस तरह सुरक्षित रखा गया है, इस बात की जांच की. पता चला कि अमेरिकी संविधान सबसे सुरक्षित वातावरण में है. इसके बाद वैज्ञानिकों ने 1994 में संसद भवन के पुस्तकालय में एक चैंबर तैयार कराया, जिसे और सुरक्षित बनाने के लिए ऐसी गैस का इस्तेमाल किया गया, जो कागज और स्याही पर असर न डाले. इसके लिए चैंबर में नाइट्रोजन गैस का प्रयोग किया गया.
Also Read: भारतीय संविधान ने अदालतों के लिए मूक दर्शक की भूमिका तय नहीं की : सुप्रीम कोर्टभारतीय संविधान की सुरक्षा के लिए हर साल चैंबर की नाइट्रोजन गैस खाली की जाती है और अच्छे से जांच परख होती है. हर दो महीने में भी चैंबर की चेकिंग की जाती है. इसके अलावा, सीसीटीवी कैमरों से लगातार निगरानी की जाती है.
Poste by : Kuamr Vishwat Sen
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