Farmer Protest: किसानों ने दिल्ली कूच पर लगाया 'डेड ब्रेक', दलित प्रेरणा स्थल पर जारी रहेगा धरना, देखें वीडियो

Published by : Pritish Sahay Updated At : 02 Dec 2024 10:53 PM

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Farmer Protest, File Photo

Farmer Protest: किसानों ने अपने दिल्ली चलो मार्च पर फिलहाल ब्रेक लगा दिया है. प्रशासन के साथ किसानों की बात चल रही है. इसके बाद किसान आगे का प्लान बनाएंगे. इस बीच किसानों का प्रदर्शन दलित प्रेरणा स्थल पर जारी रहेगा.

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Farmers Protest: किसानों ने दिल्ली कूच के प्लान पर अचानक ‘डेड ब्रेक’ लगा दिया है. हालांकि, किसान दलित प्रेरणा स्थल पर अपना धरना प्रदर्शन जारी रखेंगे. सोमवार को अपनी मांगों को लेकर किसानों ने दिल्ली कूच मार्च निकाला. सुबह हजारों की संख्या में किसान महामाया फ्लाईओवर के पास जमा हुए. यहां से किसान दिल्ली कूच करने लगे. हालांकि शाम होते-होते किसानों ने अपना प्लान बदल दिया. वे दलित प्रेरणा स्थल पर जमा होने लगे. फिलहाल किसान दलित प्रेरणा स्थल पर ही धरना देंगे. बता दें, किसान नये कृषि कानूनों के तहत मुआवजे और अपनी पांच मांगों पर अड़े हैं.

सड़क से हटाई जा रही बैरिकेडिंग

नोएडा और दिल्ली बॉर्डर पर किसानों का आंदोलन हो रहा है. किसानों के साथ प्रशासन की बैठक होने वाली है. अगर किसान-प्रशासन की बात से हल नहीं निकलता है तो किसान फिर से दिल्ली कूच का फिर से प्रयास करेंगे. हालांकि बैठक से पहले ही किसानों ने सड़क खाली कर दी है. पुलिस बैरिकेडिंग हटा रही है. बातचीत के दौरान आंदोलनकारी किसान दलित प्रेरणा स्थल के अंदर बैठकर प्रदर्शन जारी रखेंगे. सोमवार सुबह किसान नोएडा से दिल्ली कूच करने पर आमादा थे. पुलिस ने नोएडा में दलित प्रेरणा स्थल पर बैरिकेड लगाए थे जिसे किसानों ने तोड़ दिया.

दिल्ली सीमा पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम

राजधानी दिल्ली के संसद भवन में शीतकालीन सत्र चल रहा है. ऐसे में किसान अपनी मांगों को लेकर दिल्ली जाना चाहते हैं. किसानों को दिल्ली कूच से रोकने के लिए पुलिस का काफी मशक्कत करना पड़ रही है. पुलिस ने सीमा पर बैरिकेड लगाए हैं. भारी संख्या में पुलिस बलों की तैनाती की गई है. तीन लेयर की सुरक्षा व्यवस्था की गई है. पुलिस ने कई किसानों को हिरासत में लिया है.

क्या है किसानों की मांग

  • भूमि अधिग्रहण कानून के अनुसार 1 जनवरी 2014 के बाद अधिग्रहित भूमि का चार गुना मुआवजा दिया जाए.
  • नये भूमि अधिग्रहण कानून के लाभ जिले में लागू किए जाएं.
  • किसानों की मांग है कि जमीन अधिग्रहण के बदले 10 फीसदी विकसित भूखंड दिया जाए.
  • भूमिहीन किसानों के बच्चों को रोजगार और पुनर्विकास की सुविधा मिले.
  • हाई पावर कमेटी की सिफारिशें लागू की जाए.

6 दिसंबर को और दो संगठन निकालेंगे मार्च

किसान अपनी मांग पर अड़े हैं. मुख्य सचिव के वार्ता के कारण किसानों ने दिल्ली कूच को विराम दिया है. अगर बात बनती है तो किसान अपना आंदोलन स्थगित कर देंगे. किसी कारण वार्ता विफल होती है तो किसान एक बार फिर दिल्ली चलो नारा बुलंद करेंगे. वहीं 6 दिसंबर को को और किसान संगठन मार्च निकालने वाले हैं. यह आंदोलन किसान मजदूर मोर्चा और संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम, गैर-राजनीतिक) की ओर से निकाला जाएगा. दोनों किसान संगठन 6 दिसंबर से दिल्ली की ओर मार्च करेंगे.

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By Pritish Sahay

प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.

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