इजरायल ने लेबनान के अंदर घुसकर किया ब्यूफोर्ट किले पर कब्जा, बताया रणनीतिक जीत

ब्यूफोर्ट किला
Beaufort Castle : इजरायल ने लेबनान में काफी अंदर घुसकर हमला किया है और लितानी नदी के पार अपने सैनिकों को भेजा है. इस बारे में वहां के रक्षा मंत्री ने सोशल मीडिया पोस्ट कर जानकारी दी है और इसे गर्व का विषय बताया है.
Beaufort Castle : पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल कैट्ज ने कहा है कि दक्षिणी लेबनान में ब्यूफोर्ट रिज पर कब्जा करना एक बड़ी स्ट्रेटेजिक कामयाबी है. उन्होंने कहा कि इजरायली सेना ने लितानी नदी पार कर ली है और नदी के उत्तर में हिजबुल्लाह के ठिकानों के खिलाफ मिलिट्री ऑपरेशन बढ़ा दिए हैं.
ब्यूफोर्ट रिज पर कब्जा बड़ी कामयाबी
इजरायल कैट्ज ने सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में लिखा कि 44 साल बाद इजरायल ने ब्यूफोर्ट पर फिर से कब्जा कर लिया है. उन्होंने लिखा है कि 1982 में गैलिली शांति युद्ध के दौरान जिस तरह इजरायल ने ब्यूफोर्ट की लड़ाई लड़ी थी, 2026 की लड़ाई उसी की याद दिलाती है. यह दोनों ही घटना लगभग एक ही समय में हुई है. इसी वजह से ब्यूफोर्ट पर कब्जे को गैलिली शांति युद्ध में शहीद हुए लोगों को समर्पित किया जाता है.
भीषण लड़ाई के बाद ब्यूफोर्ट पर हुआ कब्जा
इजराइली सैनिकों ने दक्षिणी लेबनान में रणनीतिक रूप से अहम पहाड़ी पर कब्जा कर लिया है जिसके शीर्ष पर ब्यूफोर्ट किला स्थित है. पिछले 26 वर्ष से अधिक समय में लेबनान के इतना अंदर घुसकर इजराइली सेना ने पहली बार हमला किया है. इजइराली सेना ने नबातियेह शहर के पास स्थित ब्यूफोर्ट किले पर आसपास के गांवों में कई दिन तक चली भीषण लड़ाई और हवाई हमलों के बाद कब्जा किया. इजराइली सैनिकों ने इन गांवों के दुर्गम इलाके में हिजबुल्ला सदस्यों से लड़ाई लड़ी.
ये भी पढ़ें : कैसा होगा डीके शिवकुमार का मंत्रिमंडल? इस सवाल के जवाब में मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा-3 जून तक इंतजार करें
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By रजनीश आनंद
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.
राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.
रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.
आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.
रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










