Photos : देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन: खुद बनाएगी बिजली, किराया सिर्फ ₹5 से शुरू, जानें और क्या है खास

ट्रेन को रवाना करते पीएम मोदी
भारतीय रेलवे ने हरियाणा के जींद से देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन शुरू कर दी है, जो सोनीपत तक 89 किलोमीटर की यात्रा किया करेगी. इसके किराए की शुरुआत महज 5 रुपये से होती है. फोटो स्टोरी के माध्यम से जानें इस ट्रेन में और क्या-क्या खास है.

हाइड्रोजन से बनती है बिजली
यह ट्रेन 1,200 किलोवाट क्षमता वाले प्रोटॉन एक्सचेंज मेम्ब्रेन (PEM) फ्यूल सेल सिस्टम से संचालित होती है. इसमें दो ड्राइविंग पावर कार (DPC) लगे हैं, जिससे इसकी कुल क्षमता 2,400 किलोवाट यानी लगभग 3,200 हॉर्सपावर हो जाती है. हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की रासायनिक प्रक्रिया से बिजली तैयार होती है, जिससे ट्रेन चलती है और केवल पानी के भाप का उत्सर्जन होता है.

PM मोदी ने दिखाई हरी झंडी
भारतीय रेलवे ने 17 जुलाई 2026 को हरियाणा के जींद से देश की पहली हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन का संचालन शुरू कर दिया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अत्याधुनिक ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. यह ट्रेन भारतीय रेलवे के हरित ऊर्जा मिशन की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है, जिसका उद्देश्य डीजल आधारित ट्रेनों पर निर्भरता कम करना और पर्यावरण-अनुकूल परिवहन को बढ़ावा देना है.

रफ्तार और सफर की क्षमता
हाइड्रोजन ट्रेन की डिजाइन स्पीड 110 किलोमीटर प्रति घंटा है, हालांकि फिलहाल इसे 75 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलाया जा रहा है. एक बार हाइड्रोजन गैस भरने के बाद यह ट्रेन लगभग 250 से 350 किलोमीटर तक का सफर तय कर सकती है. इससे लंबी दूरी के रूट पर भी बिना बार-बार रिफ्यूलिंग के संचालन संभव हो सकेगा.

10 कोच, 2,600 यात्रियों की सुविधा
भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन में कुल 10 कोच हैं, जिनमें 8 यात्री कोच और 2 पावर कार शामिल हैं. यह ब्रॉड गेज नेटवर्क पर दुनिया की सबसे लंबी हाइड्रोजन पैसेंजर ट्रेन मानी जा रही है. इसमें 682 सीटों की व्यवस्था है, जबकि एक समय में करीब 2,600 यात्री सफर कर सकते हैं. यात्रियों को लग्जरी सीटें, मोबाइल चार्जिंग पॉइंट, ऑटोमैटिक दरवाजे और बायो-टॉयलेट जैसी सुविधाएं भी मिलेंगी.

सुरक्षा के लिए हाई-टेक सिस्टम
यात्रियों की सुरक्षा के लिए ट्रेन में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया है. आगे और पीछे हाई-प्रेशर सिलेंडरों में हाइड्रोजन गैस सुरक्षित रखी जाती है. इसके अलावा हाइड्रोजन लीक डिटेक्टर, फ्लेम डिटेक्टर, धुआं और तापमान की निगरानी करने वाले सेंसर चौबीसों घंटे सक्रिय रहते हैं. किसी भी खतरे की स्थिति में हाइड्रोजन सप्लाई स्वतः बंद हो जाती है और ऑटोमैटिक शटडाउन सिस्टम काम करने लगता है.

स्टेशन वार किराया सूची (जींद से शुरू)
जींद सिटी से पांडु पिंडारा: ₹5, जींद से भंभेवा: ₹10, जींद से गोहाना: ₹15, जींद से मोहाना: ₹20, जींद से सोनीपत (पूरा सफर): ₹25
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लेखक के बारे में
By आलोक पाठक
आलोक पाठक वर्ष 2019 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अपने पत्रकारिता सफर के दौरान वे खबर मंत्र, गांडीव और नक्षत्र न्यूज़ जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं। वर्तमान में वे प्रभात खबर के डिजिटल विभाग में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। हिंदी भाषा और लेखन के प्रति उनका विशेष लगाव है। उन्हें भू-राजनीति (Geopolitics) और राष्ट्रीय राजनीति से जुड़े विषयों पर लिखना पसंद है। निजी जीवन में कहानियां और कविताएं लिखना तथा कालजयी साहित्य का अध्ययन उनकी प्रमुख रुचियों में शामिल है। उनका प्रयास तथ्यों पर आधारित, सरल और प्रभावी लेखन के माध्यम से पाठकों तक सार्थक जानकारी पहुंचाना है।
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