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Covid-19 दिमाग पर डाल सकता है बुरा असर, न्यूरोलॉजिकल बीमारियों के भी बढ़ने का खतरा, रिपोर्ट में खुलासा

Updated at : 08 Feb 2023 7:51 PM (IST)
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Covid-19 दिमाग पर डाल सकता है बुरा असर, न्यूरोलॉजिकल बीमारियों के भी बढ़ने का खतरा, रिपोर्ट में खुलासा

Covid-19 को मुख्य रूप से श्वसन संबंधी बीमारी के रूप में देखा और इलाज किया जा सकता है, लेकिन मानव शरीर पर प्रभाव के मामले में यह ज्यादा गंभीर है क्योंकि, यह मस्तिष्क को प्रभावित कर सकता है.

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Covid-19: 2019 में कोविड महामारी के आने के बाद से ही दुनिया पूरी तरह से बदल गयी है. इस बीमारी की वजह से करोड़ों लोगों ने अपनी जान गंवा दी. लेकिन, आज बात उनकी नहीं हो रही है जिनकी इस बीमारी की वजह से जान चली गयी. आज हम बात करेंगे उन लोगों की जो इस बीमारी से ग्रसित हुए हैं. हाल ही में Covid-19 से जुड़ी एक रिपोर्ट सामने आयी है जिसमें इस बीमारी का लम्बे समय में इन्फेक्टेड मरीज पर क्या क्या असर पड़ता है उसकी जानकारी दी गयी है. रिपोर्ट की अगर मानें तो Covid-19 से ग्रसित मरीजों के दिमाग पर इस बीमारी का असर काफी बुरा पड़ता है.

मस्तिष्क को कर सकता है प्रभावित

Covid-19 को मुख्य रूप से श्वसन संबंधी बीमारी के रूप में देखा और इलाज किया जा सकता है, लेकिन मानव शरीर पर प्रभाव के मामले में यह ज्यादा गंभीर है क्योंकि, यह मस्तिष्क को प्रभावित कर सकता है जिससे अल्जाइमर और पार्किंसंस जैसी न्यूरोलॉजिकल संबंधी बीमारियां हो सकती हैं. जाने माने डॉक्टर डॉ. यतीश अग्रवाल ने यह कहा है. वर्द्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज और सफदरजंग अस्पताल के वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. अग्रवाल ने महामारी को ‘हजार सिर वाला दैत्य’ बताते हुए कहा कि- Covid-19 का प्रभाव नाक, गले और फेफड़ों से कहीं आगे तक फैला हुआ है. इसका असर शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंग मस्तिष्क को भी प्रभावित कर सकता है.

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36-84 प्रतिशत कोविड-19 रोगियों में न्यूरोलॉजिकल जटिलताएं

मनोरमा इयरबुक 2023 के लिए एक विशेष लेख में उन्होंने कहा है कि- व्यापक क्लीनिकल अध्ययन से पता चलता है कि 36-84 प्रतिशत कोविड-19 रोगियों में न्यूरोलॉजिकल जटिलताएं होती हैं. कई लोग जो न्यूरोलॉजिकल संबंधी लक्षणों का अनुभव करते हैं 50 साल से कम उम्र के होते हैं और संक्रमण से पहले वे स्वस्थ थे. लेख में उन्होंने कहा है कि संक्रमण से प्रभावित हो चुके कई लोगों में पैनिक अटैक, ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर और अवसाद की समस्या हो सकती है. ये समस्याएं अत्यधिक शराब का सेवन, मादक द्रव्यों का सेवन, आत्महत्या की प्रवृत्ति, भ्रम जैसी स्थिति को भी बढ़ा सकती है.

इनमें से कुछ के प्रभाव गंभीर

डॉक्टर ने कहा है कि Covid-19 से संक्रमित लोगों, उनके परिवार के सदस्यों और समुदाय में मध्यम से गंभीर स्तर की बेचैनी के लक्षण आम हैं. इस बात के पुख्ता सबूत अब मौजूद हैं कि कई स्वरूप वाला कोरोना वायरस मस्तिष्क के कार्य, व्यवहार और बौद्धिक क्षमताओं को कई तरह से प्रभावित कर सकता है. यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन एंड पैरा मेडिकल हेल्थ साइंसेज, गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय के डीन डॉक्टर अग्रवाल ने कहा, ‘‘इनमें से कुछ प्रभाव गंभीर होते हैं और थोड़े समय में दूर भी हो जाते हैं, लेकिन कुछ अन्य लंबे समय तक प्रभावित करते हैं. (भाषा इनपुट के साथ)

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